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गहलोत सरकार के समय हुए आवंटनों को निरस्त करने के फैसले पर अंतरिम रोक, उत्तराखंड समाज सहित तीन संस्थाओं को मिली राहत।

Major Setback for Rajasthan Government: High Court Stays Cancellation of Concessional Land Allotments

प्रतापनगर की जमीनों पर फिलहाल यथास्थिति रहेगी, बिना सुनवाई आवंटन रद्द करने पर कोर्ट ने उठाए सवाल।

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के कार्यकाल में रियायती दर पर विभिन्न समाजों को आवंटित की गई जमीनों को निरस्त करने के राज्य सरकार के फैसले पर बड़ा हस्तक्षेप करते हुए अंतरिम रोक (स्टे) लगा दी है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने मामलीे में यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने के आदेश देते हुए राज्य सरकार तथा राजस्थान हाउसिंग बोर्ड को चार सप्ताह में जवाब पेश करने का आदेश दिया है।

यह मामला उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें भजनलाल सरकार ने मंत्रिमंडलीय एम्पावर्ड कमेटी की सिफारिश पर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के अंतिम छह माह में किए गए कई भूमि आवंटनों की समीक्षा करते हुए उन्हें निरस्त करने का निर्णय लिया था।

उत्तराखंड समाज को मिली बड़ी राहत

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस शुभा मेहता की एकलपीठ ने उत्तराखंड समाज समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए आवंटन निरस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि विवादित भूमि को किसी भी तीसरे पक्ष के पक्ष में न तो हस्तांतरित किया जाए और न ही उस पर कोई नया अधिकार सृजित किया जाए।

समिति की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि आवंटन रद्द करने से पहले न तो समिति को सुनवाई का अवसर दिया गया और न ही आदेश के पीछे कोई ठोस कारण बताया गया। ऐसे में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है।

प्रतापनगर सेक्टर-28 में आवंटित थी जमीन

याचिका के अनुसार, उत्तराखंड समाज समिति को प्रतापनगर आवासीय योजना सेक्टर-28 में 953 वर्गमीटर भूमि सांस्कृतिक कार्यक्रमों, वृद्धजन कल्याण एवं पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियों के लिए रियायती दर पर आवंटित की गई थी।

समिति ने आवंटन की निर्धारित 2 प्रतिशत राशि 6 अक्टूबर 2023 को जमा भी करा दी थी।

इसके बावजूद सरकार बदलने के बाद गठित मंत्रिमंडलीय एम्पावर्ड कमेटी की सिफारिश पर राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने 21 अप्रैल 2026 को आवंटन निरस्त करने की सूचना जारी कर दी थी।

दो अन्य समाजों का आवंटन भी हुआ था निरस्त

सरकार की कार्रवाई केवल उत्तराखंड समाज तक सीमित नहीं थी।

इसी निर्णय के तहत श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान और अग्रवाल समाज सेवा समिति, प्रतापनगर को आवंटित रियायती भूमि भी निरस्त कर दी गई थी।

श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान को प्रतापनगर सेक्टर-28 में 2000 वर्गमीटर भूमि उच्च शिक्षार्थी बालिका छात्रावास निर्माण के लिए आवंटित की गई थी।

अग्रवाल समाज सेवा समिति को सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 1500 वर्गमीटर भूमि आवंटित की गई थी, जिसके लिए समिति ने 2 अक्टूबर 2023 को लगभग ₹3.02 लाख की प्रारंभिक राशि भी जमा कराई थी।

इन दोनों संस्थाओं के आवंटन भी मंत्रिमंडलीय एम्पावर्ड कमेटी की सिफारिश पर निरस्त किए गए थे।

सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक

हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल इन आवंटनों को निरस्त करने की कार्रवाई पर रोक लग गई है।

अब राज्य सरकार और राजस्थान हाउसिंग बोर्ड को अदालत में अपना पक्ष रखना होगा।

मामले की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि भूमि आवंटन निरस्तीकरण का निर्णय कानूनी कसौटी पर कितना टिकता है।

यह मामला पूर्ववर्ती सरकार के अंतिम महीनों में किए गए भूमि आवंटनों की वैधता और सरकार द्वारा उनके पुनरीक्षण की संवैधानिक सीमा को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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