हाईकोर्ट ने कहा-पिंक सिटी की वैश्विक पहचान और UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज स्टेटस की सुरक्षा के लिए तत्काल ठोस कदम जरूरी; मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने स्वतः संज्ञान मामले को PIL में किया तब्दील
जयपुर। गुलाबी नगरी जयपुर की वैश्विक पहचान और उसके UNESCO World Heritage Site दर्जे को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है।
ऐतिहासिक परकोटे वाले जयपुर शहर में तेजी से हो रहे निर्माण, अतिक्रमण और विरासत स्वरूप में बदलाव को लेकर हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा है कि अब तत्काल, प्रभावी और ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने एकलपीठ की ओर से रेफर किए गए मामले में संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका को Public Interest Litigation (PIL) के रूप में दर्ज करते हुए नोटिस जारी किए हैं।
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने इस मामले को “Suo Moto – In Re: Global Identity of the Pink City” के नाम से दर्ज किया है।
‘पिंक सिटी’ की हालत पर कोर्ट ने जताई गहरी चिंता
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट ने जयपुर की ऐतिहासिक वाल्ड सिटी के लगातार हो रहे क्षरण पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और सामने आई जमीनी परिस्थितियों को देखते हुए वर्ष 2019 में जयपुर को मिले UNESCO World Heritage Site के प्रतिष्ठित दर्जे की रक्षा के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की गंभीर आवश्यकता है।
राज्य सरकार सहित विभागों को नोटिस
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ जनहित याचिका को दर्ज करने के साथ इस मामले में राजस्थान सरकार के साथ ही कई विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया हैं।
राज्य की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने नोटिस स्वीकार किया और जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया।
मामले को 26 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान पत्रिका की खबर पर लिया संज्ञान
गौरतलब हैं जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की एकलपीठ ने 26 सितंबर 2026 को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित खबर पर प्रसंज्ञान लिया था।
राजस्थान पत्रिका की खबर के साथ वर्ष 2025 में World Heritage Committee द्वारा लिए गए निर्णय और उसके ड्राफ्ट निर्णयों को देखते हुए मामले को मुख्य न्यायाधीश को रेफर किया था।
एकलपीठ ने मामले को मुख्य न्यायाधीश को रेफर करने के साथ ही कोर्ट सहायता के लिए अधिवक्ता संदीप पाठक सहित तीन अन्य अधिवक्ताओं को न्यायमित्र भी नियुक्त किया था।
पहले ही चेतावनी दे चुका है UNESCO
इससे पहले 26 सितंबर 2026 के आदेश में जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर ने जयपुर की वाल्ड सिटी की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई थी।
कोर्ट ने कहा था कि जयपुर में अवैध निर्माण, अनधिकृत बदलाव और अतिक्रमण की समस्या गंभीर रूप ले रही है तथा ऐतिहासिक संरचनाओं में बदलाव और उनके संरक्षण नियमों की अनदेखी से शहर की वास्तुकला और विरासत की मूल पहचान प्रभावित हो रही है।
कोर्ट ने यह भी दर्ज किया था कि UNESCO World Heritage Committee ने वर्ष 2025 में जयपुर की ऐतिहासिक इमारतों के ध्वस्तीकरण और Heritage Cell की कार्यक्षमता को लेकर चिंता व्यक्त की थी।
दिसंबर 2026 तक सुधार नहीं हुआ तो गंभीर खतरा
कोर्ट ने कहा था कि यदि दिसंबर 2026 से पहले पर्याप्त और प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो जयपुर की वाल्ड सिटी के UNESCO World Heritage Site के रूप में मिले दर्जे को खोने का गंभीर जोखिम है।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि अतीत में कुछ UNESCO World Heritage Sites को सूची से हटाया जा चुका है और अनियंत्रित शहरी विस्तार तथा नई निर्माण गतिविधियों के कारण विरासत मूल्यों को हुए नुकसान का उदाहरण सामने है।
पहले आदेश में JDA और नगर निगमों से मांगा गया था सर्वे
26 सितंबर के आदेश में हाईकोर्ट ने JDA और जयपुर के नगर निगमों को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों के माध्यम से वाल्ड सिटी को नुकसान पहुंचाने वाले अनधिकृत और अनियमित निर्माणों का सर्वे कर दो सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने अधिकारियों से यह भी बताने को कहा था कि पिछले पांच वर्षों में कितने अनधिकृत या अनियमित निर्माण हुए, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, Heritage Impact Assessment हुआ या नहीं, और विरासत संरक्षण से जुड़े नियमों के पालन की निगरानी किस तरह की जा रही है।
‘विरासत एक बार खोई तो दोबारा नहीं बनाई जा सकती’
अपने विस्तृत आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विरासत केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि जयपुर और राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। कोर्ट ने कहा कि एक बार विरासत नष्ट हो जाने के बाद उसे दोबारा नहीं बनाया जा सकता।
कोर्ट ने राज्य सरकार को विरासत संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई करने की आवश्यकता बताई और यह भी कहा कि शहर के विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी है।
अब 26 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में इस मामले की अगली सुनवाई हो