जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बेहद दिल दहला देने वाले मामले में सख्त रुख अपनाते हुए 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने वृद्धा के साथ की गई दरिंदगी को लेकर साफ कहा कि यह मामला “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में आता है और इसमें किसी भी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं है।
क्या हुआ था उस रात?
डूंगरपुर जिले के कुआं थाने के एक गांव में 4 जून 2022 की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था।
एक 82 वर्षीय वृद्ध महिला के साथ दुष्कर्म का प्रयास करते हुए निर्मम हत्या कर दी गई थी।
शिकायतकर्ता ने बताया कि जब वह अपने दादा के घर से चीखने की आवाज सुनकर पहुंची, तो सामने का मंजर रूह कंपा देने वाला था—
82 वर्षीय महिला खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थी, शरीर पर कई गंभीर चोटें थीं।
पीड़िता ने खुद बताया कि आरोपी घर में घुसा, जबरन दुष्कर्म की कोशिश की।
विरोध करने पर चाकू से हमला किया और हैवानियत की हद पार करते हुए उसके साथ क्रूर कृत्य किया।
अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही बुजुर्ग महिला ने दम तोड़ दिया।
ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी फांसी
डूंगरपुर जिले के कुआं थाने में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच कर आरोपी को गिरफ्तार किया।
जिला अदालत ने मजबूत साक्ष्यों के आधार पर धारा 302 (हत्या) और धारा 376 (दुष्कर्म) में दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट में क्या हुआ?
ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। दूसरी तरफ ट्रायल कोर्ट की ओर से भी डेथ रेफरेंस हाईकोर्ट को भेजा गया।
दोषी की ओर से दायर अपील में दलीलें दी गईं कि FIR में देरी हुई, गवाहों के बयान पर सवाल हैं और ‘डाइंग डिक्लेरेशन’ पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।
आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि रिपोर्ट देर से दर्ज की गई, जिससे कहानी पर संदेह होता है।
अधिवक्ता ने गवाहों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि गवाह प्रत्यक्षदर्शी नहीं हैं और उनके बयान आपस में मेल नहीं खाते।
अधिवक्ता ने दलील दी कि पारिवारिक रिश्तों के कारण पक्षपात की संभावना है।
अधिवक्ता ने डाइंग डिक्लेरेशन पर संदेह जताते हुए दावा किया कि पीड़िता गंभीर हालत में थी और वह बोलने की स्थिति में नहीं थी, इसलिए उसके कथन को साक्ष्य नहीं माना जाना चाहिए।
चाकू और चोटों को लेकर दलील दी गई कि पोस्टमार्टम में कथित हथियार से मेल नहीं खाता और पूरी घटना संदिग्ध है।
बचाव पक्ष ने कहा कि जमीन/पारिवारिक विवाद के चलते आरोपी को झूठा फंसाया गया है।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वकीलों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए कई दलीलें दीं।
सरकार की ओर से कहा गया कि घटना के बाद पीड़िता को अस्पताल ले जाया गया और अगले ही दिन रिपोर्ट दर्ज करवाई गई, इसलिए देरी का कोई संदेहास्पद कारण नहीं है।
डाइंग डिक्लेरेशन पर सरकार ने कहा कि पीड़िता ने घटना के तुरंत बाद अपने परिजनों को आरोपी का नाम और पूरी घटना बताई, जिसे अदालत ने विश्वसनीय और प्राकृतिक साक्ष्य माना।
सरकार ने कहा कि परिवार के सदस्यों और अन्य गवाहों ने एक जैसी घटना का वर्णन किया है। मामूली विरोधाभासों को स्वाभाविक बताया गया।
सरकार ने दलील दी कि आरोपी का आधार कार्ड मौके से बरामद हुआ, जो उसकी मौजूदगी को साबित करता है।
सरकार ने कहा कि आरोपी ने बुजुर्ग महिला पर चाकू से हमला किया, जबरन यौन हमला किया और अमानवीय तरीके से चोटें पहुंचाईं, जो ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला है।
राज्य ने दलील दी कि अपराध की प्रकृति अत्यंत जघन्य है, इसलिए मृत्युदंड पूरी तरह उचित है।
राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता का बयान पूरी तरह विश्वसनीय और स्वाभाविक है और गवाहों के बयान केस को मजबूत करते हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि अपराध की क्रूरता मानवता को शर्मसार करने वाली है।
कोर्ट ने कहा:
“82 साल की असहाय महिला के साथ इस तरह की दरिंदगी समाज की अंतरात्मा को झकझोर देती है।”
क्यों ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’?
अदालत ने माना कि पीड़िता अत्यंत बुजुर्ग और असहाय थी, अपराध बेहद क्रूर और अमानवीय था और आरोपी के पक्ष में कोई राहतकारी परिस्थिति नहीं है।
अंतिम फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा भेजे गए फांसी की सजा के रेफरेंस को मंजूर करते हुए फांसी की सजा को कन्फर्म किया।
