जयपुर/जोधपुर। प्रदेश की सबसे बड़ी वकीलों की संस्था बार काउंसिल ऑफ राजस्थान (BCR) के चुनावों के दौरान व्यापक अनियमितताओं और विवादों ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राज्य के अलग-अलग जिलों में कुल चार प्रमुख पोलिंग बूथों पर मतदान रद्द या स्थगित करना पड़ा, जिससे पूरे चुनावी माहौल में तनाव और असमंजस की स्थिति बन गई।
डॉ सचिन आचार्य, रिटर्निग अधिकारी
सबसे बड़ा विवाद जयपुर में सामने आया, जहां हाईकोर्ट परिसर स्थित पोलिंग बूथ पर फर्जी मतदान को लेकर जमकर हंगामा हुआ।
आरोप है कि कुछ लोगों ने नियमों की अनदेखी करते हुए मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

हालात बिगड़ने पर चुनाव समिति को यहां मतदान रद्द करने का निर्णय लेना पड़ा। यह पोलिंग बूथ प्रदेश का सबसे बड़ा मतदान केंद्र माना जाता है, जहां कुल 14,781 अधिवक्ता मतदाता पंजीकृत हैं।
इस केंद्र पर मतदान रद्द होने से चुनाव की निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं।
जानकारी के अनुसार, जयपुर हाईकोर्ट के इस पोलिंग बूथ पर मतदान निर्धारित समय से करीब 50 मिनट की देरी से शुरू हुआ था।

शुरुआत से ही अव्यवस्थाओं की शिकायतें सामने आने लगी थीं, जो बाद में बड़े विवाद में बदल गईं। वकीलों के बीच बहस और आरोप-प्रत्यारोप के चलते माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसके बाद मतदान निरस्त करने का फैसला लिया गया।
इसी क्रम में जयपुर के सेशन कोर्ट स्थित पोलिंग बूथ पर भी अनियमितताओं और फर्जी मतदान की शिकायतें सामने आईं।
यहां भी चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे और अंततः मतदान रद्द कर दिया गया।
लगातार दो प्रमुख बूथों पर मतदान रद्द होने से जयपुर में चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो गई।
जोधपुर में निरस्त
जोधपुर में स्थित हेरिटेज बिल्डिंग के पोलिंग बूथ पर अलग तरह की समस्या देखने को मिली। यहां बैलेट पेपर खत्म हो जाने के कारण मतदान प्रक्रिया को बीच में ही रोकना पड़ा।
परिसर में बनाए गए चारों बूथों पर मतदान स्थगित कर दिया गया।
इससे वहां मतदान के लिए पहुंचे अधिवक्ताओं में नाराजगी देखी गई। कई वकीलों ने इसे चुनाव प्रबंधन की बड़ी लापरवाही बताया।

उधर, श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर पोलिंग बूथ पर भी विवाद के चलते मतदान रोक दिया गया।
यहां बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों के हस्ताक्षर को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
विवाद बढ़ने पर मतदान प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया और पोलिंग बूथ पर ताला लगा दिया गया। इस घटना ने भी चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने बार काउंसिल चुनाव की विश्वसनीयता को प्रभावित किया है।

अधिवक्ताओं के बीच इस बात को लेकर नाराजगी है कि चुनाव जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में इस तरह की अव्यवस्थाएं क्यों हुईं। कई वरिष्ठ वकीलों ने चुनाव प्रबंधन में सुधार और सख्त निगरानी की मांग की है।
चुनाव समिति ने संकेत दिए हैं कि जिन पोलिंग बूथों पर मतदान रद्द या स्थगित हुआ है, वहां जल्द ही नई तारीख घोषित की जाएगी।
हालांकि, इन घटनाओं के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अगली बार चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।
बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के ये चुनाव न केवल वकीलों के प्रतिनिधित्व के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था में उनकी भूमिका को भी निर्धारित करते हैं।
ऐसे में चुनाव प्रक्रिया का निष्पक्ष और शांतिपूर्ण होना अत्यंत आवश्यक है। फिलहाल, इन विवादों के चलते पूरे प्रदेश की नजर अब चुनाव समिति के अगले फैसले पर टिकी हुई है।
