जयपुर। राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और मानवाधिकारों को लेकर राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेते हुए देवस्थान विभाग, मंदिर-दरगाह प्रबंधन समितियों, न्यासों और जिला प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं.
राज्य मानवाधिकार आयोग के चैयरमेन जस्टिस जी आर मूलचंदानी ने स्वप्रेणा से प्रंसज्ञान लेते हुए राज्य के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने और भीड़-प्रबंधन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तत्काल लागू करने का आदेश दिया हैं.
आयोग ने राज्य के देवस्थान आयुक्त, संबंधित जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और मंदिर प्रबंधन/न्यासों को नोटिस जारी करते हुए सभी से 12 मार्च तक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई है।
मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च 2026 को सुबह 11 बजे निर्धारित की गई है, जिसमें व्यवस्थाओं की प्रगति की समीक्षा होगी।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव मानवाधिकारों का हनन
आयोग ने स्पष्ट कहा है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और गरिमापूर्ण दर्शन सुनिश्चित करना सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है।
आयोग चेयरमैन जस्टिस जी.आर. मूलचंदानी द्वारा लिए गए इस प्रसंज्ञान से जारी आदेश में कहा गया है कि राजस्थान के कई प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों पर रोज़ाना और विशेष पर्वों, मेलों व तिथियों पर लाखों श्रद्धालु आते हैं।

आयोग ने कहा कि इस भारी भीड़ के बीच पानी, छाया, बैठने की व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा, दिव्यांग-अनुकूल इंतज़ाम, शौचालय, अग्निशमन, एम्बुलेंस और स्पष्ट समय-सारिणी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव सीधे-सीधे मानवाधिकारों का हनन है।
आयोग ने चेतावनी दी कि लापरवाही के चलते पूर्व में हुई भगदड़ जैसी घटनाएं दोहराई गईं तो इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
राज्य के 17 प्रमुख धार्मिक स्थलों की बात
आयोग ने अपने आदेश में राज्य के 17 प्रमुख धार्मिक स्थलों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यहां प्रतिदिन और विशेष अवसरों पर असाधारण भीड़ रहती है—जैसे रामदेवरा, श्रीनाथजी, सांवरिया सेठ, खाटू श्यामजी, मेहंदीपुर बालाजी, गोविंद देवजी, सालासर बालाजी, चौथमाता, वेणेश्वर धाम, जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर व वहां स्थित शिव मंदिर, गलता तीर्थ, गोवर्धन परिक्रमा मार्ग, जोधपुर के रामदेवरा व पाल बालाजी, मंडोर रोड संतोषी माता मंदिर, रातानाड़ा गणेश मंदिर और अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह शामिल हैं।
आयोग ने कहा कि इन स्थलों पर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
भगदड़ की घटनाओं से सबक
आयोग ने पूर्व में खाटू श्यामजी, मेहंदीपुर बालाजी और अजमेर दरगाह सहित विभिन्न स्थानों पर हुई भगदड़ की दुखद घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं प्रशासनिक चूक और भीड़-प्रबंधन की विफलता का परिणाम होती हैं।
आयोग ने चेतावनी दी है कि श्रद्धालुओं की जान की कीमत पर व्यवस्थागत लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी मानवाधिकार उल्लंघन के दायरे में आएगी।
क्या-क्या सुविधाएं होंगी अनिवार्य
आयोग ने विस्तृत सूची जारी कर कहा है कि सभी नियंत्रित और निजी/न्यास संचालित धार्मिक स्थलों पर निम्न व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं, जिसमें
- पीने के पानी की पर्याप्त और स्वच्छ व्यवस्था।
- लाइनबद्ध दर्शन, छाया और बैठने की सुविधा।
- वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों के लिए विशेष कतारें।
- आपात चिकित्सा, प्राथमिक उपचार कक्ष, दवाइयां और प्रशिक्षित स्टाफ।
- वर्षा या आपदा की स्थिति में सुरक्षित शेड/आश्रय।
- पर्याप्त शौचालय और दिव्यांग-अनुकूल शौचालय, रोशनी के साथ।
- अग्निशमन यंत्र और आपदा-प्रबंधन उपकरण।
- व्हीलचेयर, स्ट्रेचर और एम्बुलेंस की उपलब्धता।
- फूल-माला, प्रसाद आदि की नियंत्रित व उचित मूल्य पर बिक्री।
- यात्रियों के लिए विश्रामालय।
- दर्शन के दिन-समय-वार समय-सारिणी का व्यापक प्रचार-प्रसार।
देवस्थान विभाग और न्यासों पर जिम्मेदारी
आयोग ने देवस्थान विभाग, पुरातत्व विभाग, धरोहर प्राधिकरण और मंदिर प्रबंधन समितियों/न्यासों को निर्देश दिया है कि वे मंदिरों की आय, चढ़ावे और सरकारी अनुदानों का उपयोग प्राथमिक रूप से श्रद्धालु सुविधाओं पर करें।
आयोग ने कहा कि संसाधनों की कमी का बहाना स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि अधिकांश प्रमुख स्थलों पर पर्याप्त वित्तीय स्रोत उपलब्ध हैं।
संविधान का हवाला
आयोग ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म मानने और आचरण करने की स्वतंत्रता के साथ-साथ राज्य और प्रबंधन की यह जिम्मेदारी भी है कि श्रद्धालु सुरक्षित और सम्मानजनक ढंग से दर्शन कर सकें।
भीड़ में बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांग और बीमार श्रद्धालुओं की उपेक्षा असंवैधानिक है।
SOP और नियमावली लागू करने के निर्देश
आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), नियमावली और भीड़-प्रबंधन योजना तुरंत लागू की जाए।
पर्व-त्योहार, मेलों और विशेष तिथियों पर अतिरिक्त पुलिस बल, स्वयंसेवक, यातायात प्रबंधन और आपात प्रतिक्रिया दल तैनात किए जाएं। दर्शन व्यवस्था को तकनीक-आधारित (टोकन/स्लॉट) बनाने पर भी विचार के संकेत दिए गए हैं।