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राजस्थान का किसान बहादुर, उसने संघर्ष को अपनाया लेकिन हार नहीं मानी -जस्टिस विजय बिश्नोई

Justice Vijay Bishnoi Calls Rajasthan Farmers Brave; Urges Legal and Technical Empowerment at Sikar Conference

कृषक अधिकार एवं कृषि तकनीकी विषय पर सीकर के बरसींधुरा में हुआ किसान न्याय सम्मेलन

जयपुर, 9 नवंबर |

देशभर में जहां किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं, वहीं राजस्थान का किसान संघर्ष को जीवन का हिस्सा मानते हुए हार नहीं मानता। यह बात सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस विजय बिश्नोई ने रविवार को सीकर जिले के बरसींधुरा गांव में आयोजित किसान न्याय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही.

स्वर्गीय किशन सिंह आर्य की स्मृति में आयोजित इस सम्मेलन का विषय “कृषक अधिकार एवं कृषि तकनीकी” रखा गया था.

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथी के रूप में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस विजय बिश्नोई मौजूद रहे, वहीं विशिष्ट अतिथियों में तेलंगाना हाईकोर्ट के जज जस्टिस ई. वी. वैष्णव गोपाल, राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस अनिल कुमार उपमन और जस्टिस अनुप कुमार ढंड ने समारोह को संबोधित किया.

राजस्थान का किसान बहादुर है – जस्टिस विजय बिश्नोई

जस्टिस विजय बिश्नोई ने कहा कि देशभर में किसानों की आत्महत्याओं के मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन राजस्थान का किसान अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है, संघर्ष करता है और कभी हार नहीं मानता।

उन्होंने कहा, “किसान को हम सब देश की ताकत मानते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या हमारा कानून किसानों के साथ खड़ा रहता है या नहीं — इस पर हमें गंभीरता से विचार करना होगा।”

उन्होंने बताया कि वे स्वयं एक किसान परिवार से आते हैं — “मैंने कभी खेती नहीं की, लेकिन आज भी हमारे नाम पर कृषि भूमि है और हम खेती से जुड़े हुए हैं।”

जस्टिस बिश्नोई ने कहा कि किसानों को समय पर फसलों का उचित मूल्य, बीमा का लाभ और सरकारी सहायता नहीं मिल पाती। इसके पीछे कई प्रशासनिक कारण हैं जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि किसान पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीक को भी अपनाएं ताकि उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हो सके।

किसान न्याय केंद्र — समय की मांग

जस्टिस बिश्नोई ने कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन की ओर से “किसान न्याय केंद्र” की स्थापना के विचार का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह केंद्र किसानों को योजनाओं, अधिकारों और कानूनी सहायता की जानकारी देने में सहायक सिद्ध होंगे।

उन्होंने कहा, “अगर देश के हर जिले में ऐसे किसान न्याय केंद्र खुलते हैं तो किसानों की स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा और न्यायिक व प्रशासनिक तंत्र के बीच सेतु बनेगा।”

किसानों के हितों पर न्यायपालिका को और संवेदनशील होना चाहिए -जस्टिस अनिल उपमन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के जज जस्टिस अनिल उपमन ने कहा कि किसान देश का सबसे बड़ा वर्ग है, लेकिन आज़ादी के 75 साल बाद भी उसकी स्थिति संतोषजनक नहीं है।

उन्होंने कहा, “संविधान के सभी स्तंभ किसानों के प्रति संवेदनशील हैं, लेकिन क्या यह संवेदनशीलता पर्याप्त है? जब तक किसानों के हितों की रक्षा के लिए जमीनी स्तर पर कार्य नहीं किया जाएगा, तब तक बदलाव संभव नहीं।”

उन्होंने यह भी कहा कि किसान सबसे कठिन परिस्थितियों में कार्य करता है — उसका सब कुछ प्रकृति पर निर्भर है। ऐसे में सरकार को लागत मूल्य घटाने के लिए डीज़ल पर सब्सिडी देनी चाहिए।

कर्जमाफी के विषय पर जस्टिस उपमन ने कहा कि कर्जमाफी पर नियंत्रण होना चाहिए, लेकिन किसान की जमीन किसी भी कीमत पर न छीनी जाए। उन्होंने कहा, “हिंदू परंपरा के अनुसार ऋण का ब्याज मूल धन से दोगुना नहीं होना चाहिए। किसानों के लिए भी यही नियम लागू होना चाहिए।”

किसान की मुश्किलें बढ़ा रहीं आधुनिक चुनौतियां — जस्टिस अनुप कुमार ढंड

राजस्थान हाईकोर्ट के जज जस्टिस अनुप कुमार ढंड ने कहा कि आज किसान अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है — कर्ज का बोझ, कीटनाशकों का अनुचित उपयोग, और प्राकृतिक आपदाएं उसकी सबसे बड़ी चिंताएं हैं।

उन्होंने कहा, “जब फसलें बर्बाद होती हैं तो किसान कर्ज के बोझ तले दब जाता है और कई बार निराशा में गलत कदम उठा लेता है। हमें ऐसे हालात रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।”

उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार द्वारा किसानों के लिए बनाए गए कानूनों व योजनाओं की जानकारी दी और कहा कि जब किसान सुरक्षित होगा, खेत स्वस्थ होंगे और पर्यावरण सुरक्षित होगा — तभी भारत वास्तव में समृद्ध राष्ट्र बनेगा।

हर गांव में बने लीगल एड सेंटर

“देश में लगभग 400 करोड़ एकड़ जमीन अन्नदाताओं के हाथों में है, और आज जो अनाज हमारी थाली तक पहुंच रहा है, उसके लिए हमें किसानों का आभार मानते हुए उनके साथ हमेशा खड़ा रहना चाहिए।”

यह बात तेलंगाना हाईकोर्ट के जज जस्टिस ई. वी. वैणु गोपाल ने राजस्थान के सीकर जिले के बरसींधुरा में आयोजित किसान न्याय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि जब कोई किसान अदालत में आता है तो यह देखकर बहुत पीड़ा होती है। “किसान को अपने खेतों में होना चाहिए, अदालतों में नहीं। उसका समय खेती में लगना चाहिए, न कि कानूनी प्रक्रियाओं में,” उन्होंने भावुक होकर कहा।

जस्टिस वैणु गोपाल ने कहा कि आज देश केवल सरकार से नहीं, बल्कि किसानों की अथक मेहनत से चल रहा है। “हम आज दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और जल्द ही तीसरी बनने जा रहे हैं — लेकिन यह सबकुछ हमारे किसानों की वजह से संभव हुआ है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने समाज, सरकार और न्यायपालिका से अपील की कि किसानों के प्रति अधिक जवाबदेह और संवेदनशील बनें। किसानों को न्यायिक प्रक्रियाओं की जटिलताओं से राहत दिलाने के लिए उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया — देश के हर गांव में लीगल एड सेंटर (किसान न्याय केंद्र) स्थापित किए जाएं, ताकि किसान अपने अधिकारों की जानकारी और कानूनी सहायता गांव में ही प्राप्त कर सकें।

जस्टिस वैणु गोपाल ने कहा, “आज राजस्थान के सीकर से एक विचार खड़ा हुआ है — किसानों को अदालतों में तकलीफ न हो, इसलिए गांव-गांव में लीगल एड सेंटर बनाए जाएं। जब किसानों को न्याय उनके द्वार पर मिलेगा, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होगा।”

कई हस्तियों की मौजूदगी

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम आर्य ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य न्यायपालिका और किसान समाज के बीच संवाद और समन्वय को मजबूत करना है।

कार्यक्रम में कैप्टन एम. पी. जाट, ब्रिगेडियर बी. आर. आर्य, जवाहिर सिंह आर्य, मोहनलाल आर्य सहित कई सामाजिक और विधि क्षेत्र से जुड़ी हस्तियां उपस्थित थीं।

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