जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने RAS मुख्य परीक्षा 2013 के सामान्य हिंदी और सामान्य अंग्रेजी के पेपर में कुछ सवालों की जांच को लेकर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को उत्तर पुस्तिका के कुछ सवालों की दोबारा जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
जस्टिस गणेश राम मीणा ने अभ्यर्थी महिपाल सिंह चारण की याचिका मंजूर करते हुए कहा कि सवालों की जांच में तकनीकी गड़बड़ी की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने कहा कि अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका में सवालों के जवाबों पर गलत होने का निशान यानी ‘X’ लगाए बिना लगातार शून्य अंक देना तकनीकी गड़बड़ी की आशंका पैदा करता है।
हाईकोर्ट ने RPSC को पेपर IV में सवाल नंबर 6(iv) से 8(v) तक दिए गए जवाबों की स्वतंत्र परीक्षक से दोबारा जांच कराने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि दोबारा जांच में मिलने वाले अंकों के आधार पर याचिकाकर्ता की मेरिट संशोधित की जाए और उनकी मेरिट व प्राथमिकता के अनुसार सेवा आवंटित की जाए। कोर्ट ने यह प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति जमा करने की तारीख से 90 दिन में पूरी करने को कहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संदीप सिंह शेखावत और अधिवक्ता प्रियांशी जायसवाल ने पैरवी की। RPSC की ओर से अधिवक्ता एम.एफ. बेग ने पक्ष रखा।
लगातार कई सवालों में मिले थे शून्य अंक
महिपाल सिंह चारण ने RAS संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा-2013 की मुख्य परीक्षा में भाग लिया था। वह ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थी थे और कुल 449 अंक हासिल करने के बाद उनका चयन हुआ था।
इनमें सामान्य अध्ययन के तीन पेपर में क्रमशः 81, 118 और 87 अंक शामिल थे। सामान्य हिंदी और सामान्य अंग्रेजी के पेपर में उन्हें 83 अंक मिले थे, जबकि इंटरव्यू में 80 अंक प्राप्त हुए थे। इसके बाद 14 सितंबर 2017 को उन्हें मेरिट के आधार पर टैक्सेशन डिपार्टमेंट में सेवा आवंटित की गई थी।
अभ्यर्थी ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत अपनी उत्तर पुस्तिका की कॉपी हासिल की। इसे देखने पर उन्होंने पाया कि पेपर IV में सवाल नंबर 6(iv) से लेकर 8(v) तक लगातार शून्य अंक दिए गए थे।
उनके अनुसार, इन सवालों के जवाब लिखे गए थे, लेकिन उत्तर गलत होने का संकेत देने वाला ‘X’ निशान नहीं लगाया गया था।
अभ्यर्थी ने कंप्यूटर से कॉपी जांचने की प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ी की आशंका जताते हुए 24 अगस्त 2017 को RPSC में शिकायत की।
इसके बाद 25 सितंबर 2017 को उन्होंने विस्तार से अपनी बात रखी, लेकिन आयोग ने उनकी मांग स्वीकार नहीं की। आयोग ने कहा कि नियमों के तहत उत्तरों की दोबारा जांच नहीं की जा सकती।
RPSC ने कहा- नियमों में दोबारा मूल्यांकन का प्रावधान नहीं
RPSC की ओर से कोर्ट में कहा गया कि उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन विषय विशेषज्ञ ने किया था और इसमें कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं हुई।
आयोग का कहना था कि नियमों के तहत अंकों को दोबारा जोड़ने की अनुमति है, लेकिन जवाबों को फिर से जांचने यानी पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं है।
आयोग ने यह भी दलील दी कि परीक्षक किसी गलत जवाब के लिए सीधे शून्य अंक दे सकता है या जवाब को गलत बताते हुए उस पर ‘X’ का निशान लगाकर शून्य अंक दे सकता है। इसलिए सिर्फ ‘X’ का निशान नहीं होने के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि जवाब की जांच नहीं हुई।
याचिकाकर्ता ने तकनीकी गड़बड़ी की आशंका जताई
दूसरी ओर, याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उनकी मांग पूरी उत्तर पुस्तिका की दोबारा जांच कराने की नहीं है। वे केवल उन्हीं सवालों की जांच चाहते हैं, जिनमें तकनीकी गड़बड़ी की आशंका है।
उनका कहना था कि कंप्यूटर से कॉपी जांचने के दौरान तकनीकी गड़बड़ी हो सकती है। लगातार कई सवालों पर शून्य अंक दिए गए, लेकिन जवाबों को गलत बताने के लिए ‘X’ का निशान नहीं लगाया गया। ऐसे में यह जांचना जरूरी है कि इन सवालों के जवाबों का सही तरीके से मूल्यांकन हुआ था या नहीं।
हाईकोर्ट ने कहा- गड़बड़ी की आशंका को नजरअंदाज नहीं कर सकते
जस्टिस गणेश राम मीणा ने जब अभ्यर्थी की कॉपी देखी, तो पाया कि जिन सवालों के जवाब सही माने गए थे, उनके सामने ‘✔’ का निशान लगाकर अंक दिए गए थे। लेकिन सवाल नंबर 6(iv) से 8(v) तक लगातार शून्य अंक दिए गए थे और किसी भी जवाब के सामने ‘X’ का निशान नहीं था, जिससे पता चलता कि उसे गलत माना गया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि वह विषय विशेषज्ञ नहीं है, लेकिन जब कई सवालों के जवाबों पर शून्य अंक दिए गए हों और उन्हें गलत बताने का कोई निशान भी न हो, तो तकनीकी गड़बड़ी की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने माना कि मूल्यांकन के दौरान परीक्षक से अनजाने में गलती होने की संभावना भी हो सकती है।
हाईकोर्ट ने पहले के एक मामले वन राम बनाम राज्य एवं अन्य का भी जिक्र किया, जिसमें RPSC ने माना था कि कुछ अभ्यर्थियों की कॉपी में सवाल या उनके कुछ हिस्सों की जांच नहीं हुई थी।
बाद में विशेषज्ञों से उनकी जांच कराई गई और कुछ अभ्यर्थियों की मेरिट में बदलाव भी हुआ था। इससे साफ है कि कॉपी जांचने की प्रक्रिया में तकनीकी गलती होने की संभावना पूरी तरह खारिज नहीं की जा सकती।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा मामले में सभी अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच का निर्देश नहीं दिया जा रहा है। मामला केवल याचिकाकर्ता के कुछ खास सवालों से जुड़ा है।
स्वतंत्र परीक्षक करेगा दोबारा जांच, मेरिट के मुताबिक मिलेगी सेवा
हाईकोर्ट ने RPSC को निर्देश दिया कि महिपाल सिंह चारण के पेपर IV में सवाल नंबर 6(iv) से 8(v) तक के जवाबों की जांच किसी दूसरे स्वतंत्र परीक्षक से कराई जाए। परीक्षक को मुकदमे से जुड़ी विस्तृत जानकारी नहीं दी जाएगी, ताकि मूल्यांकन निष्पक्ष तरीके से हो सके।
दोबारा जांच में मिलने वाले अंकों के आधार पर याचिकाकर्ता की मेरिट बदली जाएगी। इसके बाद उनकी मेरिट और सेवा के लिए दी गई पसंद के आधार पर उन्हें सेवा आवंटित की जाएगी।
चयनित अभ्यर्थियों को नहीं हटाया जाएगा
अगर नई मेरिट के आधार पर उन्हें दूसरी सेवा मिलती है, तो उन्हें उसके अनुसार जरूरी लाभ भी दिए जाएंगे। कोर्ट ने साफ किया कि इस प्रक्रिया में पहले से चयनित और नौकरी कर रहे किसी अभ्यर्थी को नहीं हटाया जाएगा।
जरूरत पड़ने पर याचिकाकर्ता को नौकरी देने के लिए राज्य सरकार संबंधित सेवा में एक अतिरिक्त पद यानी शैडो पोस्ट बना सकती है।
हाईकोर्ट ने RPSC को पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति जमा करने की तारीख से 90 दिन के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है।