जयपुर, 19 सितंबर।
राजस्थान हाईकोर्ट ने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अंतर्गत Conciliation Officer द्वारा 27 अगस्त 2025 को पारित आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा को अंतरिम राहत प्रदान की है.
बैंक ऑफ बड़ौदा के जोनल हेड महाप्रबंधक, रीजनल हेड और संबंधित शाखा प्रबंधकों ने इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी.
पे स्केल के आदेश
बैंक ऑफ बड़ौदा के पार्ट टाइम कर्मचारियों ने स्थायी पे स्केल देने की मांग को लेकर सुलह अधिकारी के समक्ष वाद दायर किया था.
जिस पर सुनवाई करते हुए Conciliation Officer ने बैंक ऑफ बड़ौदा को आदेश दिए थे वह उसके अधिन कार्यरत पार्टटाईम कर्मचारियों को पे स्केल प्रदान करें.
इस आदेश के चलते बैंक ऑफ बड़ौदा को पार्ट कर्मचारियों को वेतन के एरियर के रूप में एक बड़ी राशि का भुगतान करन पड़ता.
इस आदेश का प्रभाव देशव्यापी होने से यह मामला कई सैकड़ो करोड़़ तक का था.
सीमा से बाहर
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सुलह अधिकारी ने अपनी अधिकार-सीमा से बाहर जाकर आदेश पारित किया हैं.
याचिका में कहा गया कि अधिनियम की धारा 33(सी)(1) के तहत आवश्यक याचिकाकर्ताओं की संतुष्टि दर्ज किए बिना ही स्वयं को सरकार की भूमिका में मान लिया.
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एन. माथुर और अधिवक्ता रुपिन काला
ने पैरवी करते हुए अदालत से कहा कि यह आदेश विधिसम्मत नहीं है और निरस्त किया जाना चाहिए.
प्रतिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता लोकेश मिश्रा ने उठाए गए कानूनी बिंदुओं का जवाब देने के लिए समय मांगा.
जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल की एकलपीठ ने दोनो पक्षों की बहस सुनने के बाद सुलह अधिकारी के आदेश को अगली सुनवाई तक रोक लगाने के आदेश दिए.