जयपुर। राजस्थान के विधि जगत के लिए सोमवार का दिन बेहद दुखद रहा। राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के सदस्य नवरंग सिंह चौधरी का सोमवार अलसुबह हृदयाघात (हार्ट अटैक) के कारण आकस्मिक निधन हो गया।
उनके निधन की खबर मिलते ही अधिवक्ता समुदाय में शोक छा गया. हर कोई यह खबर सुनकर ही स्तब्ध हैं.
नवरंग सिंह चौधरी विधि क्षेत्र के एक सशक्त, सिद्धांतवादी और निर्भीक व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे।
उन्होंने अपने लंबे कानूनी करियर में न केवल अपने ज्ञान और अनुभव से न्यायिक व्यवस्था को समृद्ध किया, बल्कि अपने उच्च नैतिक मूल्यों और ईमानदारी के लिए भी विशेष पहचान बनाई।
विधि जगत को गहरा आघात
वे अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले अधिवक्ता थे और जीवन भर उन्होंने अपने उसूलों से कभी समझौता नहीं किया। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में एक अवमानना प्रकरण के दौरान भी उन्होंने माफी मांगने से इनकार कर दिया था, जो उनके दृढ़ व्यक्तित्व और आत्मसम्मान को दर्शाता है।
उनके आकस्मिक निधन से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे विधि जगत को गहरा आघात पहुंचा है।
साथी अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और उनके परिचितों ने इसे एक अपूरणीय क्षति बताया है।
विधि समुदाय के कई सदस्यों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
सभी ने एक स्वर में कहा कि नवरंग सिंह चौधरी का योगदान और उनकी सादगी, ईमानदारी और संघर्षशीलता हमेशा याद रखी जाएगी।
2010–11 में रहे अध्यक्ष
नौरंग सिंह चौधरी लंबे समय से बार काउंसिल ऑफ राजस्थान से जुड़े हुए थे और उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान संगठन को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वे वर्ष 2004 में पहली बार बार काउंसिल के सदस्य निर्वाचित हुए थे।
इसके बाद उनके कार्य और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए अधिवक्ताओं ने उन्हें वर्ष 2009 और 2018 में भी पुनः सदस्य चुना। यह उनके प्रति अधिवक्ता समुदाय के विश्वास और सम्मान को दर्शाता है।
अपने लंबे और समर्पित करियर में चौधरी ने कई अहम पदों पर कार्य किया। वे 24 फरवरी 2008 से 21 दिसंबर 2008 तक बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के उपाध्यक्ष रहे।
इसके बाद 11 दिसंबर 2010 से 27 नवंबर 2011 तक उन्होंने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा, उनके अधिकारों की मजबूती और न्यायिक व्यवस्था में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
हाल ही में 8 जून 2024 से वे सह-अध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे और सक्रिय रूप से संगठन की गतिविधियों में भाग ले रहे थे।
बार में दी गई श्रद्धांजलि
उनके निधन के बाद बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के कार्यालय में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।
बार काउंसिल कार्यालय में न्यायिक अधिकारियों, पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
राजस्थान बार काउंसिल के कार्यालय में जस्टिस मनोज कुमार गर्ग, निर्वाचन अधिकारी डॉ. सचिन आचार्य, उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह राठौड़, बार सदस्य राजेश पंवार सहित बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के समस्त कर्मचारीगण ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रभावशाली संगठनकर्ता
इस मौके पर जस्टिस मनोज कुमार गर्ग ने कहा कि नौरंग सिंह चौधरी का व्यक्तित्व अत्यंत सरल, सहज और मिलनसार था। वे न केवल एक कुशल अधिवक्ता थे, बल्कि एक प्रभावशाली संगठनकर्ता भी थे।
उन्होंने कहा कि नौरंग सिंह चौधरी ने अपने जीवन को विधि और न्याय व्यवस्था के लिए समर्पित किया। उनकी कार्यशैली और सिद्धांतों से आने वाली पीढ़ियाँ प्रेरणा लेती रहेंगी।
निर्वाचन अधिकारी डॉ. सचिन आचार्य ने कहा कि वे हमेशा युवा अधिवक्ताओं को मार्गदर्शन देने और उन्हें आगे बढ़ाने का कार्य करते थे। उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण पहलें की गईं, जिनका लाभ आज भी अधिवक्ता समुदाय को मिल रहा है।
न्यायिक क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य व्यक्तियों ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
अधिवक्ता समुदाय के बीच चौधरी की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में थी, जो हमेशा अपने साथियों के हितों के लिए खड़े रहते थे।
सादगी और विनम्रता
उन्होंने बार काउंसिल के माध्यम से अधिवक्ताओं की समस्याओं को उठाया और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास किए। चाहे वह अधिवक्ताओं के कल्याण से जुड़े मुद्दे हों या पेशे से संबंधित चुनौतियाँ, उन्होंने हर स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई।
उनकी सादगी और विनम्रता भी लोगों के बीच उन्हें खास बनाती थी। वे हमेशा सहयोगी भावना के साथ कार्य करते थे और हर किसी की बात को गंभीरता से सुनते थे। यही कारण है कि वे न केवल अपने सहयोगियों, बल्कि न्यायिक अधिकारियों के बीच भी सम्मानित थे।
नौरंग सिंह चौधरी के निधन से उनके परिवार, मित्रों और सहयोगियों को गहरा आघात पहुँचा है। उनके करीबी लोगों का कहना है कि वे एक जिम्मेदार, समर्पित और ईमानदार व्यक्ति थे, जिन्होंने अपने जीवन में हमेशा उच्च आदर्शों का पालन किया।
