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चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: राजस्थान, MP और UP को युद्धस्तर पर कार्रवाई के निर्देश

Supreme Court Slams Authorities Over 4-Km Secret Pipeline Discharging Waste Into Jojari River, SIT Probe Ordered

राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में पर्यावरणीय संकट पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी; NH-44 पुल की सुरक्षा पर भी जताई गंभीर चिंता

नई दिल्ली। राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत खनन और उससे वन्यजीवों, पर्यावरण तथा सार्वजनिक अवसंरचना पर पड़ रहे गंभीर प्रभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान से दायर “In Re: Illegal Sand Mining in the National Chambal Sanctuary and Threat to Endangered Aquatic Wildlife” मामले में विस्तृत आदेश पारित करते हुए राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सरकारों को समयबद्ध एवं सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य जैसे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र में अवैध खनन केवल पर्यावरणीय अपराध नहीं, बल्कि जैव विविधता, दुर्लभ जलीय जीवों और महत्वपूर्ण सार्वजनिक ढांचे के लिए गंभीर खतरा है।

जताई गंभीर चिंता

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवैध रेत खनन के कारण राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य का पारिस्थितिक संतुलन तेजी से प्रभावित हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से घड़ियाल, डॉल्फिन और अन्य संकटग्रस्त जलीय जीवों के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को लेकर चिंता व्यक्त की।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अवैध खनन गतिविधियां केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इससे राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर स्थित चंबल पुल जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक अवसंरचनाओं की संरचनात्मक सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।

कोर्ट ने माना कि नदी क्षेत्र में अनियंत्रित खुदाई से पुल की नींव और आसपास की स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

राजस्थान सरकार ने कोर्ट को क्या बताया?

राजस्थान सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने अवैध खनन रोकने के लिए व्यापक स्तर पर निगरानी और प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई शुरू कर दी है।

शर्मा ने अदालत को बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान उपस्थित हुए पांच वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शपथपत्र दायर कर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। इन रिपोर्टों में विभिन्न विभागों द्वारा उठाए गए कदमों का विवरण दिया गया।

राजस्थान सरकार ने अदालत को बताया that राज्य में IT आधारित सर्विलांस सिस्टम विकसित करने के लिए लगभग 65.47 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई है।

इसके तहत संवेदनशील क्षेत्रों में आधुनिक निगरानी तंत्र विकसित किया जा रहा है।

CCTV निगरानी और RAC तैनाती

राजस्थान ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अवैध खनन प्रभावित क्षेत्रों में CCTV आधारित निगरानी प्रणाली स्थापित की जा रही है। विशेष रूप से धौलपुर-आगरा परिवहन मार्ग पर हाई-टेक मॉनिटरिंग शुरू की गई है ताकि अवैध खनन से जुड़े वाहनों की पहचान और ट्रैकिंग की जा सके।

राज्य सरकार ने यह भी बताया कि राजस्थान आर्म्ड कांस्टेबुलरी (RAC) की तैनाती की गई है तथा संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी कैंप और अस्थायी चेक-पोस्ट स्थापित किए गए हैं।

इसके अलावा धौलपुर, करौली, कोटा, बूंदी और सवाई माधोपुर सहित प्रभावित जिलों में जिला स्तरीय टास्क फोर्स गठित की गई हैं, जो अवैध खनन गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख रही हैं।

40 संवेदनशील स्थानों की पहचान

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि राजस्थान सरकार ने अवैध खनन गतिविधियों की रोकथाम के लिए 40 संवेदनशील स्थानों की पहचान की है। इन स्थानों पर विशेष निगरानी और संयुक्त कार्रवाई की जा रही है।

राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष यह भी जानकारी दी कि अवैध खनन से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में FIR दर्ज की गई हैं, आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और बड़ी संख्या में वाहन जब्त किए गए हैं।

“प्रशासनिक देरी अब बर्दाश्त नहीं”

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासनिक विलंब के कारण अवैध खनन, पर्यावरण विनाश और सार्वजनिक अवसंरचना पर खतरे को जारी नहीं रहने दिया जा सकता।

कोर्ट ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सरकारों को निर्देश दिया कि निगरानी अवसंरचना को युद्धस्तर पर विकसित किया जाए, फॉरेस्ट गार्ड्स की भर्ती प्रक्रिया तेज की जाए, अवैध खनन में प्रयुक्त वाहनों की तत्काल जब्ती और कुर्की सुनिश्चित की जाए, केवल वाहन चालकों पर नहीं बल्कि वाहन मालिकों, फाइनेंसरों और संगठित अवैध खनन नेटवर्क से जुड़े संचालकों पर भी आपराधिक कार्रवाई की जाए।

अदालत ने कहा कि अवैध खनन केवल छोटे स्तर की आपराधिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के रूप में कार्य कर रहा है, जिसे सख्ती से खत्म करना आवश्यक है।

NHAI को भी मिले निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि Morena-Dholpur NH-44 पुल क्षेत्र के आसपास हाई-रिजॉल्यूशन CCTV सर्विलांस सिस्टम स्थापित किया जाए।

इसके साथ ही NHAI को पुलिस और वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर पुल क्षेत्र के आसपास होने वाली अवैध खुदाई गतिविधियों पर निगरानी रखने और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।

पर्यावरण संरक्षण बनाम खनन माफिया

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह संकेत भी दिया कि अवैध खनन गतिविधियों के पीछे संगठित नेटवर्क सक्रिय हैं, जो पर्यावरणीय कानूनों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को चुनौती दे रहे हैं।

राज्यों की जवाबदेही तय

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यदि संबंधित राज्य सरकारें प्रभावी कार्रवाई नहीं करतीं, तो अदालत आगे और कठोर कदम उठाने पर विचार कर सकती है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पर्यावरणीय संरक्षण केवल कागजी योजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित होना चाहिए।

अगली सुनवाई 22 जुलाई को

मामले में अब अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को होगी। तब तक राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और अन्य संबंधित एजेंसियों को अपनी अनुपालन रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करनी होगी।

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