नई दिल्ली: जोधपुर में नाबालिग से रेप मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से फिलहाल इनकार कर दिया है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की मेडिकल रिपोर्ट पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत देने से मना कर दिया।
हालांकि, कोर्ट ने याचिका को लंबित रखते हुए कहा कि अगर भविष्य में उनकी तबीयत बिगड़ती है, तो वे दोबारा अंतरिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच ने कहा कि फिलहाल आसाराम को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है।
हालांकि, उन्हें चौबीसों घंटे चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत है। इसी को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें अपनी पसंद का प्रशिक्षित केयरगिवर रखने की अनुमति भी दे दी।
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार ने आरोप लगाया कि आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट से 20 दिन की पैरोल लेते समय सुप्रीम कोर्ट में लंबित अंतरिम जमानत याचिका की जानकारी छिपाई थी।
इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि स्वास्थ्य की स्थिति बिगड़ने पर वह दोबारा राहत की मांग कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका को खारिज नहीं किया जा रहा है, बल्कि पेंडिंग रखा जा रहा है ताकि भविष्य में स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति में इस पर फिर से विचार किया जा सके।
एम्स की मेडिकल रिपोर्ट में क्या कहा गया?
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक को डॉक्टरों की टीम बनाकर आसाराम की मेडिकल जांच कराने और विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट यह जानना चाहता था कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति इतनी गंभीर है या नहीं कि स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत दी जा सके।
डॉक्टरों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि फिलहाल आसाराम को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है।
हालांकि, उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें चौबीसों घंटे चिकित्सकीय निगरानी और देखभाल की जरूरत है।
इसी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
केयरगिवर रखने की अनुमति
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को एक राहत भी दी।
सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अपनी पसंद का प्रशिक्षित केयरगिवर चौबीसों घंटे अपने साथ रखने की अनुमति दे दी, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत चिकित्सकीय सहायता मिल सके।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भविष्य में उनकी तबीयत बिगड़ती है या मेडिकल स्थिति गंभीर होती है, तो वे फिर से अंतरिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
राजस्थान सरकार के आरोप
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आसाराम की अंतरिम जमानत का विरोध किया।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट से 20 दिन की पैरोल मांगते समय सुप्रीम कोर्ट में लंबित अंतरिम जमानत याचिका की जानकारी नहीं दी।
राजस्थान सरकार का कहना था कि यह अहम तथ्य छिपाकर पैरोल हासिल की गई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी नाराजगी जताई और इस तरह की जानकारी छिपाने को गंभीर माना।
हाईकोर्ट से मिली है 20 दिन की पैरोल
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम को 20 दिन की पैरोल दी है।
हाईकोर्ट ने यह राहत जेल में बिताई गई अवधि और पहले मिली पैरोल के दौरान उनके आचरण सहित अन्य परिस्थितियों को देखते हुए दी थी।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के सामने सिर्फ स्वास्थ्य आधार पर मांगी गई अंतरिम जमानत का मामला था, जिस पर कोर्ट ने एम्स की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर राहत देने से इनकार कर दिया।
तबीयत बिगड़ी तो फिर कर सकेंगे आवेदन
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत देने से इनकार किया है, लेकिन याचिका को खत्म नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर भविष्य में आसाराम की तबीयत बिगड़ती है या उनकी मेडिकल स्थिति गंभीर होती है, तो वे दोबारा अंतरिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
फिलहाल उन्हें अपनी पसंद का प्रशिक्षित केयरगिवर रखने की अनुमति रहेगी और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
वहीं, अंतरिम जमानत की मांग पर आगे का फैसला उनकी स्वास्थ्य स्थिति और भविष्य में आने वाली मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर होगा।