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सुप्रीम कोर्ट ने रोकी जयपुर की श्रीराम कॉलोनी में बुलडोजर कार्रवाई, राजस्थान सरकार को बड़ा झटका; कहा- हाईकोर्ट ने बिना वजह हटाया था स्टे

Supreme Court Halts Demolition Drive in Jaipur, Pulls Up Rajasthan High Court Over Stay Order

जयपुर की श्रीराम कॉलोनी में तोड़फोड़ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बची हुई 10 संरचनाओं को गिराने पर तत्काल रोक

नई दिल्ली/जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार और प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई पर बड़ी रोक लगाते हुए स्पष्ट कहा है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले से लागू स्टे ऑर्डर को हटाने में जल्दबाजी दिखाई।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया हाईकोर्ट का आदेश उचित नहीं था, जिसके कारण प्रशासन ने कथित अवैध निर्माणों को तोड़ना शुरू कर दिया।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश श्री राम कॉलोनी विकास समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब किसी भी अन्य संरचना को नहीं तोड़ा जाएगा और प्रशासन को तत्काल प्रभाव से आगे की कार्रवाई रोकनी होगी।

मामला जयपुर की श्री राम कॉलोनी से जुड़ा है, जहां कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जा रहा था।

याचिकाकर्ता समिति ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट द्वारा पहले दिया गया स्टे आदेश बाद में इम्पलीडमेंट आवेदन की सुनवाई के दौरान हटा दिया गया, जिसके बाद प्रशासन ने तेजी से बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि कई निर्माण पहले ही तोड़े जा चुके हैं और लगभग 10 ढांचे अभी भी गिराए जाने बाकी हैं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए बची हुई सभी संरचनाओं को गिराने पर रोक लगा दी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा—

प्रथम दृष्टया अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि हाईकोर्ट द्वारा स्टे हटाना उचित नहीं था।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि हाईकोर्ट में लंबित विशेष अपील कानून के अनुसार तय की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके द्वारा लगाया गया रोक आदेश तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक हाईकोर्ट विशेष अपील पर फैसला नहीं कर देता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई पक्ष इस रोक आदेश को हटाने के लिए आवेदन देता है, तो हाईकोर्ट संबंधित पक्षों को सुनकर उस पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को निर्देश दिया कि आदेश की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाए ताकि आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित हो सके।

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