नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने लॉ स्टूडेंट्स पर कार्रवाई करने को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी BCI के अधिकारों को स्पष्ट कर दिया है।
इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने NALSAR यूनिवर्सिटी के लॉ स्टूडेंट्स के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ इंडिया की कार्रवाई को गलत माना।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि जब तक कोई लॉ स्टूडेंट वकील के तौर पर एनरोल नहीं हो जाता, तब तक उसके आचरण पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार BCI या स्टेट बार काउंसिल के पास नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लॉ स्टूडेंट्स के आचरण और अनुशासन से जुड़ा मामला उनकी यूनिवर्सिटी या संबंधित शैक्षणिक संस्था के दायरे में आता है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए BCI की ओर से जारी निर्देशों को गैर कानूनी तरीके से जारी किया हुआ और BCI के अधिकार क्षेत्र से बाहर का माना।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत BCI की शक्तियां एनरोल हो चुके वकीलों तक हैं, लॉ की पढ़ाई करे रहे छात्रों तक नहीं।
मामला NALSAR के छात्रों के उस विरोध से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी।
NALSAR के छात्रों पर BCI ने लिया था एक्शन
पूरा मामला हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों से जुड़ा है।
छात्रों के एक समूह ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी।
छात्रों ने कुछ हालिया न्यायिक टिप्पणियों और प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामले को लेकर अपनी असहमति जाहिर की थी।
मामला तब बड़ा हो गया, जब BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की ओर से 13 अगस्त को निर्देश जारी किए गए।
इन निर्देशों में NALSAR के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स के एनरोलमेंट पर रोक लगाने की बात कही गई थी। साथ ही छात्रों और कुछ फैकल्टी सदस्यों की भूमिका को लेकर जानकारी जुटाने के निर्देश भी दिए गए थे।
विवाद सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंचा?
BCI ने अपने शुरुआती निर्देश के कुछ ही समय बाद एनरोलमेंट रोकने वाला फैसला वापस ले लिया था। इसके बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ।
सवाल यह बना रहा कि क्या BCI के पास कानून के छात्रों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई करने का अधिकार था ही?
इसी सवाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका पहुंची।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि BCI वकीलों के पेशे को रेगुलेट करने वाली संस्था है, लेकिन पढ़ाई कर रहे छात्रों पर उसका अनुशासनात्मक अधिकार नहीं हो सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने इसी कानूनी सवाल पर अब स्थिति साफ कर दी है।
BCI को छात्रों पर कार्रवाई का अधिकार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत BCI का गठन हुआ है, उसमें ऐसी कोई स्पष्ट या छिपी हुई शक्ति नहीं है, जिसके आधार पर BCI लॉ स्टूडेंट्स के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सके।
यानी सिर्फ लॉ की पढ़ाई कर रहे किसी छात्र के व्यवहार को लेकर BCI सीधे कार्रवाई नहीं कर सकता।
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, छात्र के खिलाफ अनुशासन का मामला उसकी यूनिवर्सिटी या उस संस्था के नियमों के तहत तय होगा, जहां वह पढ़ रहा है।
वकील बनने के बाद शुरू होती है BCI की शक्ति
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान BCI की भूमिका और उसके अधिकार की सीमा भी साफ कर दी।
सुप्रीम कोर्ट ने समझाया कि जब कोई लॉ स्टूडेंट पढ़ाई पूरी करके वकील के तौर पर एनरोल हो जाता है, तब बार काउंसिल का वैधानिक अधिकार शुरू होता है।
उसके बाद वकील के पेशेवर आचरण को रेगुलेट करने और जरूरत पड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की जिम्मेदारी बार काउंसिल की होती है।
लेकिन स्टूडेंट रहते हुए किसी छात्र के खिलाफ कार्रवाई करना BCI के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
पढ़ाई के मानक तय करे, छात्रों पर एक्शन नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि BCI का लॉ यूनिवर्सिटीज से कोई संबंध ही नहीं है।
BCI कानून के तहत लीगल एजुकेशन के मानक तय कर सकता है और संबंधित नियमों के मुताबिक उनकी निगरानी कर सकता है।
लेकिन शिक्षा के दौरान किसी छात्र ने क्या किया, उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए या नहीं, यह फैसला BCI नहीं कर सकता।
यह जिम्मेदारी यूनिवर्सिटी या संबंधित शैक्षणिक संस्था की होगी।
13 अगस्त का BCI आदेश अधिकार से बाहर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि BCI चेयरमैन की ओर से NALSAR को भेजा गया 13 अगस्त का सर्कुलर और उसके बाद जारी संशोधित निर्देश BCI के कानूनी अधिकार के बाहर थे।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि लॉ स्टूडेंट्स के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई करने की शक्ति BCI के पास नहीं है। इसलिए इन दोनों निर्देशों को कानूनन अधिकार के बिना जारी किया गया माना गया।
इसका मतलब है कि NALSAR के छात्रों या फैकल्टी के खिलाफ इस विवाद को लेकर BCI अब कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकता।
CJI ने पहले ही जताई थी नाराजगी
इस मामले की पिछली सुनवाई में CJI सूर्यकांत ने BCI के दखल पर कड़ी नाराजगी जताई थी।
उन्होंने कहा था कि अगर छात्र किसी मुद्दे पर विरोध कर रहे हैं, तो उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार है।
CJI ने यह भी कहा था कि यह छात्रों और उनके बीच का मामला है और BCI को इसमें दखल नहीं देना चाहिए।
अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में इसी विवाद के कानूनी पहलू को साफ कर दिया है।
यानी लॉ कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार उसकी यूनिवर्सिटी के पास है।
BCI का अनुशासनात्मक अधिकार तब शुरू होता है, जब वह छात्र वकील के तौर पर एनरोल हो जाता है।
NALSAR मामले में BCI की ओर से जारी कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट ने इसी वजह से कानूनन अधिकार के बिना जारी माना है।