नई दिल्ली। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और उससे जलीय वन्यजीवों पर पड़ रहे गंभीर प्रभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की कार्रवाई की सराहना करते हुए बड़ी बात कही हैं. ।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन रोकने के लिए राजस्थान जो मॉडल विकसित कर रहा है, वह भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए “रोल मॉडल” बन सकता है।
हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि केवल योजनाओं, बैठकों और हलफनामों से संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता, बल्कि इसका वास्तविक असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
यह महत्वपूर्ण टिप्पणी जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध खनन से जुड़े स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) मामले की सुनवाई के दौरान की।
राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने कोर्ट के समक्ष सरकार का पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लंबी चर्चा भी की।
कोर्ट में गृह विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग, खान एवं पेट्रोलियम विभाग, परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, PCCF, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
सरकार ने क्या कहा कोर्ट में..
राजस्थान सरकार ने कोर्ट को बताया कि 14 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद मुख्य सचिव ने कई उच्चस्तरीय बैठकें बुलाईं और सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया गया।
गृह, वन, खान, परिवहन, वित्त और विधि विभाग के बीच लगातार बैठकों के बाद जमीनी स्तर पर बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई।
सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध खनन रोकने के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स पहले ही गठित की जा चुकी हैं।
पुलिस, वन, खान, परिवहन और राजस्व विभाग के अधिकारियों की संयुक्त गश्ती टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।
धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, कोटा और बूंदी जिलों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
वन विभाग ने दिया हलफनामा
वन विभाग ने अपने हलफनामे में बताया कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध खनन से प्रभावित 40 संवेदनशील स्थानों की पहचान कर ली गई है।
इन स्थानों पर AI आधारित हाई-रिजोल्यूशन CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिन्हें कंट्रोल रूम और कमांड सेंटर से जोड़ा जाएगा ताकि रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सके।
खनन वाहनों में GPS अनिवार्य
राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर, डंपर, एक्सकेवेटर और अन्य वाहनों में GPS सिस्टम लगाने का काम शुरू कर दिया गया है।
खान विभाग ने बताया कि धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, बूंदी और कोटा जिलों में GPS इंस्टॉलेशन का कार्य जारी है और इसे 31 जुलाई 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।
परिवहन विभाग ने कोर्ट को बताया कि धौलपुर जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सभी खनन वाहनों में GPS अनिवार्य कर दिया गया है।
निर्देशों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।
गृह विभाग का हलफनामा भी
गृह विभाग ने अपने हलफनामे में कहा कि अवैध खनन और परिवहन के मामलों में लगातार FIR दर्ज की जा रही हैं, आरोपियों की गिरफ्तारी हो रही है और बड़ी संख्या में वाहन जब्त किए जा चुके हैं।
पुलिस विभाग ने इसके लिए विशेष कमांड सेंटर आधारित निगरानी तंत्र भी सक्रिय किया है।
वित्त विभाग का जवाब—65.47 करोड़ मंजूर
वित्त विभाग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए तकनीकी निगरानी प्रणाली को मजबूत करने हेतु लगभग 65.47 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
इसके अलावा CCTV नेटवर्क, कंट्रोल रूम, वाहनों और प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करने के लिए भी बजट स्वीकृत किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा..
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जंगलों और वन्यजीवों की प्रभावी सुरक्षा के लिए फॉरेस्ट गार्ड, रेंजर और अन्य फील्ड स्टाफ की संख्या बढ़ाना बेहद जरूरी है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को वन सुरक्षा से जुड़े रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए।
राज्य सरकार की विस्तृत अनुपालन रिपोर्टों पर संतोष जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भविष्य की सुनवाई में अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट भी दे दी।
साथ ही कोर्ट ने राजस्थान के अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा की भी सराहना की और कहा कि उन्होंने विभिन्न विभागों के समन्वय और विस्तृत हलफनामों की तैयारी में सक्रिय भूमिका निभाई