जयपुर। देश की प्रतिष्ठित लॉ फर्म The Law Desk के जयपुर मुख्यालय में सोमवार को मदर्स डे के अवसर पर एक विशेष एवं भावनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में संस्थान से जुड़े अधिवक्ताओं, लॉ स्टूडेंट्स और टीम सदस्यों ने अपनी माताओं के प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनसे जुड़े प्रेरणादायक अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम की शुरुआत The Law Desk के फाउंडर एवं अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने की। उन्होंने कहा कि मां केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा और शक्ति होती हैं। बचपन में मां द्वारा सिखाए गए संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्य व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बनते हैं।
उन्होंने कहा कि दुनिया में हर त्योहार एक दिन मनाया जाता है, लेकिन मां का सम्मान और प्रेम वर्ष के सभी 365 दिनों तक महसूस किया जाना चाहिए।

पूरे आयोजन के दौरान आत्मीयता, पारिवारिक भावनाओं और अपनत्व का अनूठा माहौल देखने को मिला।

कार्यक्रम के दौरान सीनियर एसोसिएट प्रकाश शर्मा, नवीन अग्रवाल, आशा शर्मा, गौरी जसाना, शुभम भाटी, प्रियंका तिवारी, वर्णाली पुरोहित, आकाश वशिष्ठ, मानसी दाधीच, सिद्धार्थ जैन, प्रखर सारस्वत, विदुषी सिंह, चैतन्य तिवारी, भूमिका जैन एवं मयंक गोठी ने भी अपनी माताओं से जुड़े भावनात्मक अनुभव साझा किए।
एसोसिएट प्रकाश शर्मा ने कहा कि मां का निस्वार्थ प्रेम व्यक्ति को हर कठिन परिस्थिति में आगे बढ़ने की शक्ति देता है।

गौरी जसाना ने मां को अपने जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बताया. प्रियंका तिवारी ने कहा कि चाहे व्यक्ति दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न चला जाए, घर और सुकून का अहसास केवल मां के पास ही मिलता है।
नवीन अग्रवाल ने कहा कि मां त्याग, संघर्ष, धैर्य और निस्वार्थ प्रेम की जीवंत मिसाल होती हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित लॉ स्टूडेंट्स ने भी अपने विचार साझा करते हुए मां के अपनत्व, स्नेह और त्याग को बेहद भावुक शब्दों में व्यक्त किया।

लॉ स्टूडेंट ने कहा कि जिस प्रकार न्यायालय न्यायाधीश के बिना अधूरा होता है, उसी प्रकार परिवार मां के बिना अधूरा है। कई प्रतिभागियों ने अपनी माताओं के संघर्ष, त्याग और परिवार के लिए किए गए समर्पण को याद करते हुए भावुक क्षण साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में सभी माताओं को समर्पित संदेश देते हुए मदर्स डे की शुभकामनाएं दी गईं।
साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि मां का प्रेम दुनिया की सबसे पवित्र शक्ति है, जिसे शब्दों में पूर्ण रूप से व्यक्त नहीं किया जा सकता।