जोधपुर। पश्चिम बंगाल में दर्ज पैसों के लेन-देन से जुड़े केस में गिरफ्तारी की आशंका के चलते राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचे हनुमानगढ़ के पिता-पुत्र को 30 दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस दौरान दोनों पश्चिम बंगाल की संबंधित कोर्ट में पेश होकर वहां कानून के मुताबिक आगे की राहत मांग सकते हैं।
जस्टिस संजीत पुरोहित ने संगरिया निवासी प्रवीण कुमार गोयल और उनके बेटे अंकुश गोयल की जमानत अर्जी मंजूर की। दोनों के खिलाफ पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के भक्तिनगर थाने में एफआईआर दर्ज है।
हाईकोर्ट की ओर से दी गई ट्रांजिट अग्रिम जमानत की यह राहत 28 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी।
मामले में दोनों की ओर से अधिवक्ता निशांत गाबा और मुदित नागपाल पेश हुए, जबकि सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता सुरेंद्र बिश्नोई ने पैरवी की।
पिता-पुत्र के खिलाफ पश्चिम बंगाल में दर्ज है केस
प्रवीण कुमार गोयल और अंकुश गोयल हनुमानगढ़ जिले के संगरिया के रहने वाले हैं। दोनों के खिलाफ पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के भक्तिनगर थाने में FIR दर्ज की गई है।
FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2), 318(4) और 61(2) के तहत केस दर्ज किया गया है। दोनों ने इसी मामले में गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में ट्रांजिट अग्रिम जमानत की मांग की थी।
पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार किए जाने की है आशंका
सुनवाई के दौरान दोनों की ओर से पेश वकीलों ने कोर्ट को बताया कि मामला पैसों के लेन-देन से जुड़ा विवाद है। उन्होंने बताया कि एफआईआर पश्चिम बंगाल में दर्ज है, जबकि दोनों आवेदक राजस्थान के हनुमानगढ़ के रहने वाले हैं।
वकील ने कोर्ट को बताया कि दोनों को पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार किए जाने की आशंका है। ऐसे में उन्हें कुछ समय की सुरक्षा दी जाए।
इसी आधार पर दोनों की ओर से 30 दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मांगी गई। उनका कहना था कि इस अवधि में वे पश्चिम बंगाल की संबंधित कोर्ट के सामने पेश होकर कानून के तहत उपलब्ध राहत मांग सकेंगे।
इस दौरान राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता ने पिता-पुत्र की इस जमानत का विरोध किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि कोर्ट चाहे तो सीमित अवधि के लिए ट्रांजिट जमानत दी जा सकती है।
हाईकोर्ट ने 30 दिन तक गिरफ्तारी से राहत दी
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पेश किए गए पुराने फैसलों को देखने के बाद जस्टिस संजीत पुरोहित ने माना कि यह ऐसा मामला है, जिसमें दोनों आवेदकों को 30 दिन की ट्रांजिट जमानत दी जा सकती है।
हाईकोर्ट ने इसी आधार पर दोनों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली और उन्हें 30 दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी।
गिरफ्तारी होने पर 50-50 हजार के बॉन्ड पर मिलेगी जमानत
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि अगर एफआईआर के मामले में प्रवीण कुमार गोयल और अंकुश गोयल को गिरफ्तार किया जाता है तो उन्हें 30 दिन की अवधि के लिए जमानत पर रिहा किया जाए।
इसके लिए दोनों को 50-50 हजार रुपये का निजी मुचलका यानी व्यक्तिगत बॉन्ड और 25-25 हजार रुपये की दो जमानतें देनी होंगी। यह बॉन्ड संबंधित जांच अधिकारी या थाना प्रभारी की संतुष्टि पर देना होगा।
जांच में सहयोग करना होगा, देश नहीं छोड़ सकेंगे
हाईकोर्ट ने राहत के साथ कुछ शर्तें भी लगाई हैं। दोनों को जांच में सहयोग करना होगा और जांच को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी होगी।
इसके अलावा कोर्ट की अनुमति के बिना वे इस आदेश के लागू रहने तक देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।
28 अक्टूबर तक लागू रहेगा आदेश
हाईकोर्ट ने साफ किया कि यह राहत स्थायी जमानत नहीं है। दोनों को 30 दिन की अवधि के भीतर पश्चिम बंगाल की संबंधित कोर्ट के सामने पेश होकर वहां उचित कानूनी राहत मांगनी होगी।
हाईकोर्ट का यह आदेश 28 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगा। इसके बाद ट्रांजिट जमानत अपने आप खत्म हो जाएगी।
यानी हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में दर्ज केस की सुनवाई अपने हाथ में नहीं ली है। कोर्ट ने सिर्फ दोनों को 30 दिन तक गिरफ्तारी से राहत दी है, ताकि वे इस दौरान पश्चिम बंगाल की संबंधित कोर्ट में पेश होकर आगे की कानूनी राहत मांग सकें। इसके बाद ट्रांजिट जमानत अपने आप खत्म हो जाएगी।