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राजस्थान की न्यायपालिका में जीरो टॉलरेंस का संदेश! करीब 15 साल बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों की समीक्षा के लिए बनी 5 जजों की कमेटी,

Rajasthan High Court Chief Justice Sanjay K. Agrawal’s First Month: A Distinct Style of Judicial Work and Administration

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल की पहल; जिला न्यायाधीश से सिविल जज संवर्ग तक के मामलों की होगी समीक्षा, पहले गठित दोनों समितियों को सौंपे गए मामले भी नई कमेटी के दायरे में

जोधपुर/जयपुर। राजस्थान की न्यायपालिका में जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने न्यायिक अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों की जांच और समीक्षा के लिए पांच न्यायाधीशों की स्क्रीनिंग कमेटी गठित की है।

इस फैसले के बाद जिला न्यायाधीश से लेकर सीनियर सिविल जज और सिविल जज संवर्ग तक के अधिकारियों से संबंधित अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों की समीक्षा एक नई समिति करेगी।

राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के अग्रवाल की पहल पर गठित इस समिति को जिला न्यायाधीश संवर्ग और सीनियर सिविल जज/सिविल जज संवर्ग के न्यायिक अधिकारियों से संबंधित अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी आदेश के अनुसार, यह समिति राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के नियम 53(1) के तहत न्यायिक अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों की जांच करेगी।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में 26 सितंबर 2026 के आदेश के तहत उच्च न्यायपालिका समिति और अधीनस्थ न्यायपालिका समिति को सौंपे गए मामले भी अब नई स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा विचारार्थ लिए जाएंगे।

पांच न्यायाधीशों को सौंपी गई अहम जिम्मेदारी

मुख्य न्यायाधीश की स्वीकृति से गठित इस स्क्रीनिंग कमेटी में राजस्थान हाईकोर्ट के पांच न्यायाधीश शामिल किए गए हैं—

जस्टिस विनीत कुमार माथुर

जस्टिस इंद्रजीत सिंह

जस्टिस अनूप कुमार ढंड

जस्टिस समीर जैन

जस्टिस आशुतोष कुमार

कमेटी न्यायिक अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों की पड़ताल करेगी। इसके बाद संबंधित मामलों पर अपनी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार विचार किया जाएगा।

राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के तहत होगी समीक्षा

हाईकोर्ट के आदेश में अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों की समीक्षा के लिए राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के नियम 53(1) का उल्लेख किया गया है। इस प्रावधान के तहत संबंधित न्यायिक अधिकारियों के मामलों की जांच की जाएगी।

इस प्रक्रिया का दायरा जिला न्यायाधीश संवर्ग के साथ-साथ सीनियर सिविल जज और सिविल जज संवर्ग के अधिकारियों तक रहेगा। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति से संबंधित मामलों के परीक्षण के लिए एक समिति के माध्यम से समीक्षा की व्यवस्था की गई है।

पहले गठित समितियों के मामले भी नई कमेटी को सौंपे

इस आदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 26 सितंबर 2026 के आदेश के तहत उच्च न्यायपालिका समिति और अधीनस्थ न्यायपालिका समिति को सौंपे गए अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामले भी अब नई स्क्रीनिंग कमेटी के विचारार्थ होंगे।

इससे पहले इन दोनों समितियों को सौंपे गए मामलों की समीक्षा की जिम्मेदारी अब नवगठित स्क्रीनिंग कमेटी को दी गई है।

आदेश में संबंधित मामलों को नई समिति के समक्ष विचार के लिए रखने का स्पष्ट प्रावधान किया गया है।

जीरो टॉलरेंस नीति का संदेश

न्यायिक अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों की समीक्षा न्यायिक प्रशासन की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। ऐसे मामलों में लागू सेवा नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप विचार किया जाता है।

फिलहाल, पांच न्यायाधीशों की स्क्रीनिंग कमेटी के गठन और पहले गठित समितियों को सौंपे गए मामलों को नई समिति के विचारार्थ रखने का आदेश जारी हुआ है। अब संबंधित मामलों की समीक्षा इसी व्यवस्था के तहत की जाएगी।

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