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जब हिरासत में पूछताछ जरूरी नहीं तो पहले जेल क्यों?-2011 के Prize Chits केस में रेखा त्रिपाठी को अग्रिम जमानत, हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर उठाया सवाल?

Rajasthan HC Acquits Man After 13 Years in Jail, Sets Aside Life Sentence in Murder Case

जयपुर। 15 साल पुराने प्राइज चिट्स और मनी सर्कुलेशन स्कीम्स के केस में राजस्थान हाईकोर्ट ने 51 वर्षीय रेखा त्रिपाठी को गिरफ्तारी से पहले जमानत दे दी है।

रेखा के खिलाफ प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (बैनिंग) एक्ट, 1978 की धारा 3, 4, 5 और 6 के तहत केस दर्ज है।

जस्टिस फरजंद अली ने उन्हें अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि एफआईआर में उनके खिलाफ पीड़ित को पैसे लगाने के लिए सीधे तौर पर उकसाने का आरोप नहीं है।

साथ ही मामले में सह-आरोपी पहले ही नियमित जमानत पर बाहर है और रेखा से हिरासत में पूछताछ की जरूरत भी नहीं है। ऐसे में उन्हें पहले गिरफ्तार कर जेल भेजना और फिर जमानत देना जरूरी नहीं है।

15 साल पुरानी FIR में अब गिरफ्तारी का डर क्यों?

मामला जयपुर के सिंधी कैंप थाने में दर्ज FIR नंबर 211/2011 से जुड़ा है। रेखा त्रिपाठी को आशंका थी कि इस केस में उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।

इसी वजह से उन्होंने BNSS की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई। रेखा की ओर से कहा गया कि उनके खिलाफ ऐसा कोई आधार नहीं है, जिससे उनकी गिरफ्तारी या हिरासत में पूछताछ जरूरी हो।

सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध किया गया। उनका कहना था कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए रेखा को इस स्तर पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने माना-रेखा पर सीधे तौर पर आरोप नहीं

हाईकोर्ट ने FIR में रेखा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को देखा। कोर्ट ने पाया कि रेखा पर सीधे तौर पर यह आरोप नहीं है कि उन्होंने पीड़ित को पैसे लगाने के लिए तैयार किया था।

FIR में पीड़ित से पैसे लेने के लिए उसे तैयार करने की भूमिका अजय मिश्रा और दूसरे लोगों की बताई गई है। रेखा को लेकर रिकॉर्ड में यह भी नहीं है कि उन्होंने पीड़ित को किसी गलत इरादे से निवेश के लिए तैयार किया और इसके चलते उसे आर्थिक नुकसान हुआ।

हाईकोर्ट के सामने रेखा के खिलाफ ऐसा कोई ठोस आरोप नहीं आया, जिससे यह लगे कि उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है। यही वजह रही कि हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी से पहले जमानत मंजूर कर दी।

सह-आरोपी को जमानत मिली, तो रेखा को जेल भेजना क्यों जरूरी?

हाईकोर्ट ने इस मामले में सह-आरोपी आलोक त्रिपाठी को पहले ही नियमित जमानत मिलने की बात को भी ध्यान में रखा।

हाईकोर्ट ने कहा कि जब सह-आरोपी को जमानत मिल चुकी है और रेखा के खिलाफ भी हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है, तो गिरफ्तारी के बाद उन्हें भी जमानत मिलने की स्थिति बनती है।

ऐसे में अगर रेखा को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें भी जमानत पर छोड़ना है, तो पहले उन्हें जेल भेजने की जरूरत क्या है।

महिला होने और हिरासत की जरूरत नहीं होने पर दी राहत

हाईकोर्ट ने रेखा के महिला होने और उनके मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं होने को भी ध्यान में रखा।

हाईकोर्ट का जोर इस बात पर था कि सिर्फ गिरफ्तारी की आशंका के कारण किसी व्यक्ति को पहले जेल भेजना जरूरी नहीं है। जब जांच के लिए हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं हो, तो गिरफ्तारी से पहले ही जमानत देकर कानूनी सुरक्षा दी जा सकती है।

हाईकोर्ट ने 3 शर्तों पर दी अग्रिम जमानत

हाईकोर्ट ने रेखा त्रिपाठी को अग्रिम जमानत देते हुए 50 हजार रुपये का पर्सनल बॉन्ड और 25-25 हजार रुपये की दो जमानतें देने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट ने तीन शर्तें भी लगाई हैं। रेखा को जरूरत पड़ने पर पुलिस पूछताछ के लिए उपलब्ध रहना होगा। वह मामले से जुड़े किसी व्यक्ति को प्रभावित करने, धमकाने या प्रलोभन देने की कोशिश नहीं करेंगी। इसके अलावा कोर्ट की अनुमति के बिना वह भारत से बाहर नहीं जा सकेंगी।

हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस आदेश में की गई टिप्पणियों का असर ट्रायल के दौरान मामले की मेरिट पर नहीं पड़ेगा। यानी कोर्ट ने यह तय नहीं किया है कि रेखा के खिलाफ लगाए गए आरोप सही हैं या गलत।

फैसला फिलहाल सिर्फ इस बात पर है कि मौजूदा परिस्थितियों में उनकी गिरफ्तारी जरूरी नहीं है।

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