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Rajasthan Highcourt का सख्त रुख: रिटायर्ड IAS निर्मला मीणा के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति पर मुहर

जोधपुर, 6 अक्टूबर

Rajasthan Highcourt का सख्त रुख: रिटायर्ड IAS निर्मला मीणा के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति पर मुहर ने 8 करोड़ रुपए के बहुचर्चित गेहूं घोटाले मामले में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा को राहत देने से इंकार कर दिया है।

Rajasthan Highcourt का सख्त रुख: रिटायर्ड IAS निर्मला मीणा के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति पर मुहर ने निर्मला मीणा के खिलाफ सरकार द्वारा दी गई अभियोजन स्वीकृति को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया है।

जस्टिस सुनील बेनीवाल की एकलपीठ के समक्ष दायर याचिका में मीणा ने तर्क दिया था कि विभागीय जांच अधिकारी ने उन्हें पहले ही क्लीन चिट दे दी थी और अभियोजन स्वीकृति का प्रस्ताव भी पहले अस्वीकार किया गया था।

याचिका में कहा गया कि इसके बावजूद कार्मिक विभाग ने पूर्व में दी गई अस्वीकृति पर विचार किए बिना जनवरी 2025 में अभियोजन की अनुमति जारी कर दी, जो पूरी तरह से मनमानी है।

सरकार का पक्ष और कोर्ट का फैसला

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने दलील दी कि अभियोजन स्वीकृति देने या न देने के मामले में अदालत का हस्तक्षेप सीमित है।

उन्होंने कहा कि मीणा पर गबन के गंभीर आरोप हैं और वे एक माह तक जेल में भी रह चुकी हैं।

Rajasthan Highcourt का सख्त रुख: रिटायर्ड IAS निर्मला मीणा के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति पर मुहर ने सभी तर्क सुनने के बाद स्पष्ट किया कि अभियोजन स्वीकृति का निर्णय न तो अवैध है और न ही मनमाना। कोर्ट ने कहा कि यह मामला सरकारी गेहूं के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है, जिसमें प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।

क्या है गेहूं घोटाला

निर्मला मीणा 2017 में जोधपुर में जिला रसद अधिकारी (DSO) पद पर तैनात थीं। आरोप है कि उनके आदेश पर अतिरिक्त गेहूं की आपूर्ति कर करोड़ों की गड़बड़ी की गई। इसी मामले में एसीबी ने 2017 में एफआईआर दर्ज कर 2018 में चालान पेश किया था।

हालांकि, विभागीय स्तर पर जांच के दौरान मीणा को बरी करने की सिफारिश हुई थी। इसके बावजूद राज्य सरकार ने 27 जनवरी 2025 को अभियोजन स्वीकृति दी। अभियोजन पक्ष का कहना था कि याचिकाकर्ता ने अपने पद और शक्तियों का दुरुपयोग कर सरकारी अनाज का गबन किया, जिससे राज्य को भारी नुकसान हुआ।

अन्य मामले भी दर्ज

गौरतलब है कि 2018 में मीणा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और पुलिस विश्वविद्यालय में गड़बड़ी से जुड़े दो अन्य मामले भी दर्ज किए गए थे, जिनमें एसीबी ने नकारात्मक रिपोर्ट दी। लेकिन गेहूं घोटाले में एसीबी ने आरोपों को सही पाया और सरकार से स्वीकृति मांगी, जिसे जनवरी 2025 में मंजूरी मिल गई।

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