हाईकोर्ट ने सड़क सुरक्षा को जीवन के अधिकार से जोड़ा, कहा अनुच्छेद-21 के तहत नागरिकों के जीवन जीने का अधिकार
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने सड़क सुरक्षा और आमजन के जीवन की सुरक्षा को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए संपूर्ण राजस्थान के नेशनल और स्टेट हाईवे पर मौजूद करीब 2000 अतिक्रमण अगले दो माह में हटाने के आदेश दिये हैं.
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया हैं कि अतिक्रमण चाहे धार्मिक स्थल हो या आवासिय मकान हो या व्यवसायिक प्रतिष्ठान हो, किसी को भी छूट नहीं दी जायेगी.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इन अतिक्रमणों को हटाने के लिए सात दिनों के भीतर प्रत्येक जिले में डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स गठित करने का आदेश दिया है।
इस टास्क फोर्स में जिला प्रशासन, पुलिस, NHAI, PWD और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे, जो संयुक्त रूप से अतिक्रमण चिन्हित कर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद संपूर्ण राज्य के नेशनल और स्टेट हाईवे के ROW क्षेत्र में अतिक्रमण में 103 धार्मिक संरचनाएं, 881 आवासीय निर्माण और 1,232 व्यावसायिक अतिक्रमण हटायें जायेंगे.
जनहित याचिका पर दिया फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ में जस्टिस पुष्पेन्द्रसिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने यह ऐतिहासिफ फैसला जोधपुर के चौपासनी निवासी हिम्मत सिंह गहलोत की ओर से दायर जनहित याचिका पर दिया हैं.
जनहित याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश जोशी, रिषी सोनी और कामिनी जोशी ने पैरवी करते हुए अदालत से हाईवे पर अतिक्रमण के चलते हो रहे हादसों को लेकर सरकार को आदेश देने का अनुरोध किया था.
धार्मिक स्थल हो या घर, हटाना होगा
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया हैं कि अतिक्रमण चाहे धार्मिक स्थल हो या आवासिय मकान हो या व्यवसायिक प्रतिष्ठान हो, किसी को भी छूट नहीं दी जायेगी.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इन अतिक्रमणों को हटाने के लिए सात दिनों के भीतर प्रत्येक जिले में डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स गठित करने का आदेश दिया है।
इस टास्क फोर्स में जिला प्रशासन, पुलिस, NHAI, PWD और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे, जो संयुक्त रूप से अतिक्रमण चिन्हित कर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
हर हाल में दो माह में हटाए अतिक्रमण
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस, NHAI और अन्य विभागों को राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों के सुरक्षा क्षेत्र में मौजूद सभी अतिक्रमणों को दो माह के भीतर हटाने या स्थानांतरित करने के सख्त आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि दो माह के भीतर जिला-वार विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत कर यह बताए कि कितने अतिक्रमण हटाए गए, कितने शेष हैं और भविष्य में सड़क किनारे गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए क्या नियम बनाए जा रहे हैं।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजमार्ग के राइट ऑफ वे (ROW) क्षेत्र में मौजूद किसी भी प्रकार की संरचना—चाहे वह व्यावसायिक हो, आवासीय हो या धार्मिक—कानूनन अवैध मानी जाएगी और उसे नियमित करने का कोई अधिकार नहीं होगा।
जीवन जीने का अधिकार
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाइवे पर आम जनता की सुरक्षित यात्रा के लिए सड़क सुरक्षा को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि संविधान के अनुच्छेद-21 के अंतर्गत नागरिकों के जीवन जीने के अधिकार का अभिन्न हिस्सा माना हैं.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि वह सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करे।
हाईकोर्ट खुद करेगा मोनिटरिंग
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च 2026 को तय करते हुए कहा है कि आदेशों के पालन की निगरानी अदालत स्वयं करेगी और आवश्यक होने पर अतिरिक्त निर्देश भी जारी किए जाएंगे।