हाईकोर्ट ने कहा- बिना स्पष्ट आधार और सुनवाई के दर्ज की गई प्रतिकूल टिप्पणी मान्य नहीं; याचिकाकर्ता के प्रमोशन पर नहीं पड़ेगा असर
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन से जुड़े एक अहम मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश देते हुए कहा है कि अस्पष्ट और बिना ठोस आधार के दर्ज की गई “Unsatisfactory” (असंतोषजनक) एंट्री के आधार पर कर्मचारी के प्रमोशन को रोका नहीं जा सकता।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी प्रतिकूल टिप्पणी, जो न तो स्पष्ट हो और न ही संबंधित कर्मचारी को सुनवाई का अवसर देकर दर्ज की गई हो, उसे प्रमोशन में बाधा नहीं बनाया जा सकता।
यह आदेश जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने दिनेश कुमार डोटानिया बनाम राज्य सरकार एवं अन्य मामले में सुनवाई करते हुए दिया है।
यह आदेश उन हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनकी APAR में अस्पष्ट या बिना उचित प्रक्रिया के प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज कर दी जाती हैं।
हाईकोर्ट का यह रुख साफ करता है कि कर्मचारियों के करियर से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता जरूरी है और “प्राकृतिक न्याय” (Natural Justice) के सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जा सकता।
मामला क्या है?
याचिकाकर्ता दिनेश कुमार डोटानिया, जो दौसा जिले के निवासी हैं, ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने Annual Performance Appraisal Report (APAR) में दर्ज “Unsatisfactory” एंट्री को चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मिर्जा फैसल बैग ने पैरवी करते हुए दलील दी कि यह एंट्री बिना किसी आधार और बिना सक्षम प्राधिकारी की उचित सिफारिश के दर्ज की गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि रिपोर्टिंग अथॉरिटी और रिव्यूइंग अथॉरिटी ने संबंधित कॉलम भरे ही नहीं, जबकि केवल Accepting Authority ने सीधे “Unsatisfactory” दर्ज कर दिया, जो नियमों के विपरीत है।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि APAR में “Unsatisfactory” एंट्री स्पष्ट और ठोस कारणों के बिना दर्ज की गई है और रिपोर्ट के अन्य महत्वपूर्ण कॉलम खाली छोड़े गए हैं।
याचिकाकर्ता को इस प्रतिकूल एंट्री से पहले सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी के करियर पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली एंट्री दर्ज की जाती है, तो उसे पहले अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। ऐसा न करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
प्रमोशन पर रोक नहीं
कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में निर्देश दिया कि यदि विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक होती है, तो याचिकाकर्ता के APAR में दर्ज “Unsatisfactory” एंट्री को प्रमोशन के रास्ते में बाधा नहीं बनाया जाएगा।
याचिका को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब तलब किया है और मामले की अगली सुनवाई 11 मई 2026 को तय की गई है।
