जयपुर। निविक अस्पताल के संचालक डॉ. सोमदेव बंसल की गिरफ्तारी को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन खुलकर पुलिस के समर्थन में आ गई है।
बार एसोसिएशन ने साफ कहा है कि यह कार्रवाई मेडिकल नेग्लिजेंस का मामला नहीं, बल्कि आरजीएचएस (RGHS) में कथित फर्जीवाड़े और अनियमितताओं से जुड़ी गंभीर शिकायतों के आधार पर की गई है।
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव दीपेश शर्मा ने पुलिस की कार्रवाई को नियमसम्मत और निष्पक्ष बताते हुए कहा कि जांच के बाद ही डॉ. बंसल को आरोपी माना गया और उसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई।
उन्होंने कहा कि “कानून सबके लिए बराबर है—चाहे वह डॉक्टर हो, पुलिस हो या आम नागरिक।”
दीपेश शर्मा, महासचिव, राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर
हड़ताल और विवाद के बीच बार का स्पष्ट रुख
आईएमए राजस्थान द्वारा निजी अस्पतालों और RGHS सेवाओं की हड़ताल के सवाल पर दीपेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि वकीलों का विरोध किसी भी प्रकार की मेडिकल नेग्लिजेंस को लेकर नहीं था, बल्कि आरजीएचएस में हुए कथित फर्जीवाड़े को लेकर था। उन्होंने कहा कि इस मामले को जानबूझकर अलग दिशा देने की कोशिश की जा रही है।
फर्जी बिल और अनियमितताओं के आरोप
महासचिव शर्मा ने आरोप लगाया कि डॉ. सोमदेव बंसल पर आरजीएचएस के तहत करोड़ों रुपये के फर्जी बिल उठाने के आरोप हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में ऐसे मरीजों के नाम पर भी बिल पेश किए गए, जो पहले ही डिस्चार्ज हो चुके थे या जिनका इलाज संदिग्ध परिस्थितियों में दिखाया गया।
उन्होंने कहा, “यह किसी एक डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई नहीं है, बल्कि उन लोगों के खिलाफ है जो सिस्टम का दुरुपयोग कर रहे हैं। हमारा किसी अन्य डॉक्टर से कोई विरोध नहीं है, लेकिन जहां फर्जीवाड़ा होगा, वहां कार्रवाई जरूरी है।”
गंभीर धाराओं में दर्ज है मामला
डॉ. बंसल के खिलाफ दर्ज एफआईआर में आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात), 465 (जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। बार एसोसिएशन का कहना है कि ये धाराएं खुद इस मामले की गंभीरता को दर्शाती हैं।
एक और एफआईआर की संभावना
दीपेश शर्मा ने यह भी दावा किया कि डॉ. बंसल के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज हो सकती है। उन्होंने बताया कि आरजीएचएस विभाग द्वारा अलग से जांच की जा रही है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
पुलिस की निष्पक्ष जांच की सराहना
बार एसोसिएशन ने पुलिस की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस ने “पॉइंट-टू-पॉइंट” निष्पक्ष जांच की है। शर्मा ने कहा कि पहली बार पुलिस ने इतनी सक्रियता दिखाते हुए हर पहलू पर गहन जांच की, जिसके बाद ही गिरफ्तारी की गई।
सरकार भी सख्त, पहले भी हो चुकी हैं कार्रवाइयां
शर्मा ने बताया कि आरजीएचएस में अनियमितताओं को लेकर सरकार पहले भी सख्त कदम उठा चुकी है। उन्होंने सीकर में हुए एक मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी सरकार ने तुरंत कार्रवाई की थी, जिससे यह स्पष्ट है कि इस तरह के मामलों में अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
‘जनता के लिए संदेश’
बार एसोसिएशन का मानना है कि यह कार्रवाई आम जनता के लिए एक संदेश है कि सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो उसे कानून के तहत सजा मिलनी ही चाहिए-चाहे वह किसी भी पेशे से जुड़ा क्यों न हो।
