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94 वर्षीय जस्टिस वी.एस. दवे का मतदान: जोश के सामने फीकी पड़ी व्यवस्थाएं, बार काउंसिल चुनावों में अव्यवस्था उजागर

Chaos at Rajasthan Bar Council Polls: 94-Year-Old Justice V.S. Dave Votes Amid Mismanagement

जयपुर। राजस्थान बार काउंसिल के चुनावों के दौरान जहां एक ओर 94 वर्षीय पूर्व न्यायाधीश जस्टिस वी.एस. दवे का लोकतांत्रिक उत्साह देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर चुनावी व्यवस्थाओं की पोल भी खुलकर सामने आ गई।

उम्र के इस पड़ाव पर भी जस्टिस दवे का मतदान के प्रति जो समर्पण और ऊर्जा दिखी, उसने सभी को प्रेरित किया, लेकिन उसी समय चुनाव प्रबंधन की गंभीर कमियां भी उजागर हो गईं।

सुबह ठीक 8 बजे राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ में स्थित मतदान केंद्र पर पहुंचकर जस्टिस वी.एस. दवे ने अपने कर्तव्य के प्रति सजगता का परिचय दिया।

हालांकि, उन्हें और अन्य मतदाताओं को मतदान शुरू होने के लिए करीब एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा

निर्धारित समय पर मतदान प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी, जिससे वहां मौजूद वकीलों और मतदाताओं में असंतोष देखने को मिला।

मतदान में देरी की मुख्य वजह मतपेटियों का समय पर केंद्र तक नहीं पहुंचना रहा। जब मतपेटियां पहुंचीं, तब उन्हें खोलने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी।

स्थिति यह रही कि चुनाव अधिकारी बी.एस. छाबा स्वयं मतपेटियों को खोलने में जुटे नजर आए। इस दौरान प्रशासनिक तैयारियों की कमी साफ तौर पर दिखाई दी।

केवल मतपेटियां ही नहीं, बल्कि कई बूथों पर मतपत्र भी समय पर उपलब्ध नहीं हो सके।

अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी अधूरी रहीं, जिससे मतदान प्रक्रिया बाधित हुई।

हैरानी की बात यह रही कि मौके पर चुनाव पर्यवेक्षक की मौजूदगी के बावजूद भी व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हो सकीं और मतदान लगभग एक घंटे देरी से शुरू हुआ।

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में स्थित मतदान केंद्र पर यह अव्यवस्था सबसे अधिक स्पष्ट रूप से सामने आई।

विशेष रूप से यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या के अनुसार सबसे बड़ा मतदान केन्द्र है, लेकिन उसके अनुरूप व्यवस्थाएं बिल्कुल भी नजर नहीं आईं।

इतने बड़े मतदान केंद्र पर मूलभूत प्रबंधन की कमी ने चुनाव समिति की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

वहीं, 94 वर्षीय जस्टिस वी.एस. दवे ने इन तमाम परेशानियों के बावजूद न केवल मतदान किया, बल्कि अपनी तीन पीढ़ियों के साथ इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी निभाई।

ह दृश्य अपने आप में बेहद प्रेरणादायक था। हालांकि, मतदान केंद्र पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी चिंता का विषय रहा। न तो रैंप की व्यवस्था थी, न ही लिफ्ट चालू थी।

यहां तक कि कार पार्किंग से ऊपर चढ़ने के लिए ढलान भी काफी कठिन थी, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

मतदान के बाद जस्टिस दवे ने अपने लंबे न्यायिक और सामाजिक अनुभव साझा करते हुए वर्तमान अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में इस तरह की लापरवाही उचित नहीं है और इससे संस्थाओं की साख प्रभावित होती है।

गौरतलब है कि जस्टिस वी.एस. दवे राजस्थान में हुए पहले बार काउंसिल चुनाव में सदस्य चुने गए थे और जज बनने तक लगभग 20 वर्षों तक लगातार बार काउंसिल की चुनावी प्रक्रिया से जुड़े रहे।

उनके अनुभव और योगदान इस क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहले चुनावों में सीमित संसाधनों के बावजूद व्यवस्थाएं अधिक व्यवस्थित और जिम्मेदारीपूर्ण होती थीं।

वर्तमान समय में तकनीकी और प्रशासनिक संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद इस तरह की अव्यवस्था चिंताजनक है।

कुल मिलाकर, जहां एक ओर जस्टिस वी.एस. दवे का उत्साह और लोकतंत्र के प्रति समर्पण सभी के लिए प्रेरणा बना, वहीं दूसरी ओर राजस्थान बार काउंसिल की चुनावी व्यवस्थाओं में खामियां एक बड़ा सवाल खड़ा करती नजर आईं।

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