पाली। पाली जिले के नाडोल स्थित प्रसिद्ध राजराजेश्वरी आशापुरा माताजी धाम ट्रस्ट से जुड़े बहुचर्चित विवाद में जिला सेशन न्यायालय, पाली ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित करते हुए वर्तमान ट्रस्ट अध्यक्ष करण सिंह उचियारड़ा एवं निर्वाचित कार्यकारिणी को बड़ी राहत प्रदान की है।
जिला अदालत ने स्पष्ट निर्देश देते हुए अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी को हटाने की किसी भी कार्रवाई पर रोक लगा दी है और ट्रस्ट के संचालन में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करने के आदेश दिए हैं।
पाली जिला अदालत ने ट्रस्ट अध्यक्ष करण सिंह उचियारड़ा एवं वर्तमान निर्वाचित कार्यकारिणी को हटाने की किसी भी कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई गई है।

इसके साथ ही ट्रस्ट के दैनिक प्रशासनिक और धार्मिक कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह आदेश ऐसे समय में आया है, जब ट्रस्ट की दो अलग-अलग कार्यकारिणियों को लेकर गंभीर विवाद चल रहा है।
क्या हैं मामला
यह पूरा विवाद ट्रस्ट की कार्यकारिणी के गठन और उसके अधिकारों को लेकर सामने आया है।
28 दिसंबर 2025 को एक बैठक के माध्यम से नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसके बाद 9 मार्च 2026 को नई कार्यकारिणी गठित होने का दावा किया गया।
वर्तमान अध्यक्ष करण सिंह उचियारड़ा और उनकी टीम ने इस प्रक्रिया को अवैधानिक बताते हुए अदालत का रुख किया।
करणसिंह उचियाड़ा पक्ष की दलीलें
करण सिंह उचियारड़ा की ओर से एडवोकेट पी. एम. जोशी और डॉ. मोहित सिंघवी ने पैरवी करते हुए कहा कि 7 मार्च 2026 को कराए गए चुनाव पूरी तरह से विधि विरुद्ध और ट्रस्ट के प्रावधानों के खिलाफ हैं।
13 अगस्त 2023 को विधिवत निर्वाचित कार्यकारिणी का गठन हुआ था, जिसमें कार्यकारिणी द्वारा करण सिंह उचियारड़ा को अध्यक्ष चुना गया था, जिसका कार्यकाल 13 अगस्त 2028 तक निर्धारित है।
ऐसे में कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व ही चुनाव नहीं कराए जा सकते हैं और यह संविधान के विपरीत है।
विरोध में दलीलें
वहीं दूसरी तरफ नई कार्यकारिणी की ओर से कहा गया कि उनके द्वारा किए गए चुनाव सही हैं। नई कार्यकारिणी ने अपने चुनाव को उचित बताते हुए कहा कि उन्होंने विधि अनुसार 9 मार्च को कार्यकारिणी का गठन कर लिया है।
जिसका रजिस्ट्रेशन कराने हेतु देवस्थान विभाग में दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं।
अदालत ने क्या कहा
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद जिला सेशन जज राजेन्द्र कुमार द्वितीय ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि 13.08.2023 को गठित कार्यकारिणी विधिवत निर्वाचित है और उसका कार्यकाल अभी समाप्त नहीं हुआ है।
ऐसे में उसके अधिकारों में हस्तक्षेप करना या उसे हटाने का प्रयास करना न्यायसंगत नहीं होगा।
अदालत ने कहा कि जब तक नई कार्यकारिणी के गठन की वैधता पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक वर्तमान कार्यकारिणी ही ट्रस्ट का संचालन करेगी।
फाइल में उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, प्रकरण में प्रस्तुत तथ्यों, दलीलों और रिकॉर्ड का गहन अवलोकन करने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि वर्तमान स्थिति में बदलाव करने से न केवल प्रशासनिक अस्थिरता उत्पन्न होगी, बल्कि ट्रस्ट के धार्मिक एवं सामाजिक कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं।
आदेश के मुख्य बिंदु
जिला अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं-
ट्रस्ट अध्यक्ष करण सिंह उचियारड़ा एवं वर्तमान निर्वाचित कार्यकारिणी को हटाने की किसी भी कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई गई है।
ट्रस्ट के दैनिक प्रशासनिक और धार्मिक कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न करने के निर्देश दिए गए हैं।
दोनों पक्षों को अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के लिए बाध्य किया गया है।
मामले में प्रतिवादियों को जवाब प्रस्तुत करने के लिए 4 मई तक का समय दिया गया है।
कोर्ट ने कहा कि “दोनों पक्ष आगामी तिथि तक यथास्थिति बनाए रखें और ट्रस्ट के कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न करें।”
