जयपुर। राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के हर व्यक्ति तक सुलभ, त्वरित और पारदर्शी न्याय पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि लोक अभियोजक न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जो केवल राज्य का प्रतिनिधित्व ही नहीं करते बल्कि न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री शनिवार को जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में विधि एवं विधिक कार्य विभाग द्वारा लोक अभियोजकों एवं विशेष लोक अभियोजकों के लिए आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
इस दौरान उन्होंने कहा कि बदलते कानूनों और आधुनिक अपराधों को देखते हुए अधिकारियों का निरंतर प्रशिक्षण आवश्यक हो गया है। यह कार्यशाला अभियोजकों को नए आपराधिक कानूनों, साइबर कानूनों और दिव्यांगजनों से जुड़े प्रावधानों के प्रति अधिक जागरूक और संवेदनशील बनाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय प्रणाली को औपनिवेशिक सोच से मुक्त करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल हैं।
इन कानूनों में दंड के बजाय न्याय को प्राथमिकता दी गई है और आम नागरिक को केंद्र में रखा गया है। साथ ही डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस के माध्यम से न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाने पर विशेष बल दिया गया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
42 नए न्यायालय
पुलिस और अभियोजन अधिकारियों को इन कानूनों की जानकारी देने के लिए लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश में 42 नए न्यायालय स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि फलौदी, डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा, ब्यावर, बाड़मेर, डीग, कोटपूतली-बहरोड़ और सलूंबर में जिला एवं सेशन न्यायालय स्थापित किए गए हैं। वहीं बड़ी सादड़ी और केशोरायपाटन में अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायालय शुरू किए गए हैं। इसके अलावा झुंझुनूं, प्रतापगढ़, टोंक, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, बारां और सीकर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय खोले गए हैं। हनुमानगढ़, सवाई माधोपुर, चूरू, बीकानेर और जोधपुर में पॉक्सो एक्ट के तहत विशेष अदालतें स्थापित की गई हैं।
27 हजार को विधिक सहायता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर वर्गों को न्याय दिलाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
अब तक 27 हजार से अधिक लोगों को विधिक सहायता उपलब्ध करवाई गई है, जबकि राजस्थान पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत करीब 4 हजार पीड़ितों को 85 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है।
उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में 1 लाख 20 हजार से अधिक विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किए गए, जिनसे लगभग 77 लाख लोग लाभान्वित हुए। साथ ही न्यायालय भवनों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार कर न्याय प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार साइबर अपराधों को लेकर भी पूरी तरह सतर्क है। साइबर खतरों से बचाव के लिए साइबर सुरक्षा सिमुलेशन लैब स्थापित की गई है और “ऑपरेशन साइबर शील्ड” अभियान चलाकर साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में लगभग 10 हजार साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से 12 लाख से अधिक लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वर्ष 2030 तक प्रदेश के सभी जिलों में साइबर पुलिस स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
इसके अलावा राज्य सरकार राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर की स्थापना भी करेगी, जहां साइबर अपराधों के एआई आधारित विश्लेषण और साइबर हेल्पलाइन कॉल सेंटर की व्यवस्था होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन समाज की शक्ति हैं और उनके अधिकारों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने लोक अभियोजकों से अपील करते हुए कहा कि दिव्यांगजनों से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ कार्य किया जाए।
उन्होंने विश्वास जताया कि इस कार्यशाला से लोक अभियोजकों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी और विशेषज्ञों के अनुभव वर्तमान एवं भविष्य की कानूनी चुनौतियों के समाधान में सहायक साबित होंगे।
इस अवसर पर विधि एवं विधिक कार्य मंत्री Jogaram Patel, महाधिवक्ता Rajendra Prasad, मुख्य सचिव V. Srinivas, पुलिस महानिदेशक Rajeev Kumar Sharma सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, लोक अभियोजक और अधिवक्ता उपस्थित रहे।