जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए निजी रिकवरी एजेंटों द्वारा वाहन जब्त किए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और एसके फाइनेंस लिमिटेड को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
हाईकोर्ट ने मामले में प्रारम्भिक सुनवाई के बाद राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला श्रीगंगानगर जिले के घड़साना निवासी 69 वर्षीय तरसेम सिंह द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट पहुंचा।
जस्टिस रेखा बोराणा की एकलपीठ के समक्ष पेश याचिका में आरोप लगाया गया कि एसके फाइनेंस लिमिटेड और उससे जुड़े निजी रिकवरी एजेंटों ने कानून, आरबीआई गाइडलाइन तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों की अवहेलना करते हुए वाहन को जबरन कब्जे में ले लिया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रजाक खान हैदर ने अदालत में दलील दी कि फाइनेंस कंपनियां ऋण वसूली के नाम पर कानून अपने हाथ में नहीं ले सकतीं।
उन्होंने कहा कि राज्य में कई निजी फाइनेंस कंपनियां निजी रिकवरी एजेंटों और बाहुबलियों के माध्यम से लोगों के वाहन जबरन छीन रही हैं, जो पूरी तरह अवैध और असंवैधानिक है।
याचिका के अनुसार, 7 फरवरी 2026 को अनूपगढ़-घड़साना रोड स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के पास कथित रूप से निजी रिकवरी एजेंटों ने वाहन को जबरन रुकवाया और कब्जे में ले लिया।
उस समय वाहन याचिकाकर्ता तरसेम सिंह स्वयं चला रहे थे। हालांकि वाहन उनके पुत्र हरविंदर सिंह चन्नी के नाम पंजीकृत बताया गया है।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वाहन एसके फाइनेंस लिमिटेड से फाइनेंस कराया गया था तथा वे स्वयं भी उक्त कंपनी के पुराने ग्राहक हैं।
इसके बावजूद कंपनी ने कथित रूप से निजी एजेंटों के जरिए दबाव और अवैध तरीके अपनाए।
याचिका में कहा गया कि वाहन जब्ती की पूरी कार्रवाई बिना किसी सक्षम प्राधिकारी के आदेश, बिना पूर्व नोटिस और बिना वैधानिक प्रक्रिया के की गई, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 300-ए का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से विधिक प्रक्रिया के बिना वंचित नहीं किया जा सकता।
तरसेम सिंह की ओर से अदालत को यह भी बताया कि इस घटना के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान, मानसिक प्रताड़ना, सामाजिक अपमान और आजीविका संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
मामले में अनूपगढ़ थाने में एफआईआर संख्या 0123/2026 दर्ज करवाई गई थी, लेकिन आरोप है कि गंभीर संज्ञेय अपराध दर्ज होने के बावजूद पुलिस निष्पक्ष और प्रभावी जांच नहीं कर रही है तथा आरोपियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता रजाक खान हैदर ने अदालत का ध्यान सुप्रीम कोर्ट और आरबीआई द्वारा रिकवरी एजेंटों के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि फाइनेंस कंपनियां केवल वैधानिक प्रक्रिया के तहत ही कार्रवाई कर सकती हैं।
निजी एजेंटों के जरिए सड़क पर वाहन रोककर जब्ती करना कानून के शासन के विपरीत है।
मामले की प्रारम्भिक सुनवाई के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने एसके फाइनेंस लिमिटेड और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
साथ ही अदालत ने राज्य पक्ष को अगली सुनवाई तक तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने मामले को 26 मई 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है।