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BIG BREAKING NEWS : 2022 शिक्षक भर्ती विवाद में बड़ा मोड़, राजस्थान हाईकोर्ट ने नियमितीकरण रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक

Rajasthan High Court Stays Order Cancelling Regularisation of Teacher Grade-III Employees

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए उन शिक्षकों को अंतरिम राहत दी है, जिनकी सेवाओं का नियमितीकरण रद्द कर रिकवरी के आदेश जारी किए गए थे।

राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ के जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार के 12 मार्च 2026 के विवादित आदेश के प्रभाव पर रोक लगा दी है।

ये हैं मामला

याचिकाकर्ता राम सिंह चौधरी सहित 10 शिक्षकों द्वारा दायर की गई है।

इन शिक्षकों का चयन राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) द्वारा जारी 16 दिसंबर 2022 की शिक्षक ग्रेड-III लेवल-2 भर्ती प्रक्रिया के तहत हुआ था।

चयन के बाद इन्हें 27 सितंबर 2023, 4 अक्टूबर 2023 और 5 अक्टूबर 2023 को नियुक्ति आदेश जारी किए गए थे तथा संबंधित विद्यालयों में पदस्थापन भी दे दिया गया था।

सभी शिक्षकों ने अपनी सेवाएं जॉइन करने के बाद सफलतापूर्वक परिवीक्षा अवधि पूरी की और 12 नवंबर 2025 तथा 5 फरवरी 2026 को उनकी सेवाओं का नियमितीकरण कर दिया गया। विभाग ने उनकी सेवाओं को संतोषजनक बताते हुए प्रमाण पत्र भी जारी किए थे।

विवाद क्या हैं

दरअसल, इस भर्ती प्रक्रिया को पहले कुछ अभ्यर्थियों ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

उस समय एकलपीठ ने 28 नवंबर 2023 को आदेश देते हुए कहा था कि यदि संशोधित परिणाम में किसी अभ्यर्थी का नाम नहीं आता है तो पूर्व में दी गई नियुक्ति उसे सेवा जारी रखने का अधिकार नहीं देगी।

बाद में इस आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी गई और 19 अगस्त 2025 को खंडपीठ ने एकलपीठ के उक्त निर्देशों को निरस्त कर दिया।

बिना कारण नियमितीकरण वापस, वेतन रिकवरी
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी ने 12 मार्च 2026 को आदेश जारी कर उनका नियमितीकरण वापस ले लिया और कथित अतिरिक्त वेतन की रिकवरी के निर्देश भी दे दिए।

शिक्षकों का कहना है कि यह आदेश बिना नोटिस और बिना सुनवाई का अवसर दिए पारित किया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता हरेंद्र नील, अमोघ गुप्ता और रोहन गुप्ता ने अदालत को बताया कि डिवीजन बेंच पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि जिन नियुक्त अभ्यर्थियों पर किसी प्रकार की धोखाधड़ी या तथ्य छिपाने का आरोप नहीं है, उनकी सेवाएं समाप्त नहीं की जा सकतीं।

सरकार को नोटिस

हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार और अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी किए हैं।

साथ ही अगली सुनवाई तक 12 मार्च 2026 के आदेश के संचालन पर रोक लगा दी है। इससे फिलहाल याचिकाकर्ता शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है।

यह मामला अब प्रदेश में शिक्षक भर्ती, नियमितीकरण और संशोधित परिणामों के बाद सेवा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

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