टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

‘देशद्रोह कानून’ पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी चाहे तो चल सकती है ट्रायल और अपील की सुनवाई, SC ने सुनवाई जारी रखने का रास्ता खोला

Supreme Court Clarifies Sedition Law: Trials Can Proceed If Accused Has No Objection
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि आरोपी को कोई आपत्ति नहीं है, तो अदालतें Section 124A IPC यानी देशद्रोह कानून से जुड़े मामलों में ट्रायल और अपील की सुनवाई merits पर जारी रख सकती हैं। अदालत ने कहा कि 2022 के अंतरिम आदेश को पूरी तरह सुनवाई रोकने के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह (Section 124A IPC) से जुड़े मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि यदि आरोपी को कोई आपत्ति नहीं है, तो अदालतें ऐसे मामलों में ट्रायल या अपील की सुनवाई जारी रख सकती हैं और उन्हें मेरिट यानी गुण-दोष के आधार पर तय कर सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मई 2022 में SG Vombatkere मामले में दिए गए अंतरिम आदेश का उद्देश्य हर परिस्थिति में सभी मामलों की सुनवाई रोकना नहीं था। यदि आरोपी स्वयं चाहता है कि उसकी सुनवाई आगे बढ़े, तो अदालतें कानून के अनुसार उस मामले का फैसला कर सकती हैं।

मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और जस्टिस Vipul M Pancholi की बेंच ने यह आदेश मध्य प्रदेश के एक आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

यह स्पष्टता उस पृष्ठभूमि में आई है, जब मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह कानून के उपयोग पर अंतरिम रोक लगाते हुए उससे जुड़े सभी लंबित मामलों की सुनवाई पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। अब अदालत ने बताया है कि उस आदेश का अर्थ पूर्ण प्रतिबंध नहीं है।

आखिर क्या है पूरा मामला ?

यह स्पष्टीकरण एक ऐसे आरोपी के मामले में आया, जो पिछले 17 वर्षों से जेल में बंद है और जिसकी अपील मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित है।

यह मामला कमरान नाम के आरोपी से जुड़ा है, जिसे मध्य प्रदेश पुलिस ने वर्ष 2008 में प्रतिबंधित संगठन Students Islamic Movement of India (SIMI) से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था।

अभियोजन के अनुसार आरोपी और उसके साथियों पर देशविरोधी गतिविधियों, हथियार रखने और गैरकानूनी संगठन से संबंध रखने के आरोप लगाए गए थे।

मामले की सुनवाई के बाद सत्र अदालत ने 27 फरवरी 2017 को कमरान और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया। आरोपी पर:

  • Section 122 IPC,
  • Section 124A IPC (देशद्रोह),
  • Section 153A IPC,
  • UAPA की धाराएं,
  • Arms Act

लगाई गई थीं। अदालत ने आरोपी और उसके सह-आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

याचिका में आरोपी की दलील

इसके खिलाफ आरोपी ने Madhya Pradesh High Court में आपराधिक अपील दायर की।

लेकिन हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ाई, क्योंकि 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह कानून से जुड़े मामलों की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह पिछले 17 वर्षों से जेल में है और उसे इस बात पर कोई आपत्ति नहीं कि उसकी अपील में Section 124A IPC से जुड़े आरोपों पर भी सुनवाई की जाए।

आरोपी ने अदालत से कहा कि उसकी अपील merits पर सुनी जानी चाहिए।

यानी आरोपी खुद चाहता था कि उसका मामला जल्द से जल्द मेरिट पर तय हो, न कि केवल तकनीकी आधार पर लंबित रखा जाए।

2022 में सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया था ?

मई 2022 में SG Vombatkere मामले में सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह कानून को लेकर बड़ा अंतरिम आदेश पारित किया था। उस समय केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि वह Section 124A IPC की समीक्षा करने को तैयार है।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने Section 124A IPC के तहत नए मामले दर्ज करने, लंबित ट्रायल, अपील और अन्य कार्यवाहियों
को अस्थायी रूप से रोकने का आदेश दिया था।

अदालत ने कहा था कि जब तक केंद्र सरकार इस कानून की दोबारा समीक्षा नहीं कर लेती, तब तक नागरिकों के खिलाफ इस धारा का इस्तेमाल सीमित रखा जाए। उस आदेश के बाद देशभर की कई अदालतों में देशद्रोह से जुड़े मुकदमों की सुनवाई रुक गई थी। कई मामलों में अपीलें भी लंबित रह गईं।

अब सुप्रीम कोर्ट ने क्या स्पष्ट किया

अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि उसके 2022 के आदेश का यह मतलब नहीं निकाला जा सकता कि यदि आरोपी स्वयं सुनवाई चाहता हो तब भी अदालतें हाथ बांधकर बैठी रहें।

अदालत ने अपने आदेश में कहा:

‘जहां आरोपी को ट्रायल, अपील या अन्य कार्यवाही आगे बढ़ने पर कोई आपत्ति नहीं है, वहां अदालतें ऐसे मामलों का merits पर फैसला कर सकती हैं।’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके 2022 के आदेश को इस तरह नहीं पढ़ा जाना चाहिए कि हर परिस्थिति में सुनवाई पूरी तरह बंद हो जाए।

यानी अब यदि आरोपी सुनवाई चाहता है, Section 124A IPC पर आपत्ति नहीं करता और मामला merits पर सुना जाना चाहता है, तो अदालतें उस मामले की सुनवाई जारी रख सकती हैं।

MP हाईकोर्ट को ‘सुप्रीम’ निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने Madhya Pradesh High Court से कहा कि वह कमरान की लंबित आपराधिक अपील को merits पर सुने और कानून के अनुसार फैसला करे। अदालत ने यह भी कहा कि अपील के साथ जुड़े अन्य मामलों की भी सुनवाई की जा सकती है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के तथ्यों या आरोपी के दोषी या निर्दोष होने पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। अदालत ने केवल procedural issue यानी प्रक्रिया संबंधी स्थिति को स्पष्ट किया है।

देशद्रोह कानून पर अहम फैसला

Section 124A IPC यानी देशद्रोह कानून लंबे समय से संवैधानिक बहस का विषय बना हुआ है। इस धारा के तहत सरकार के खिलाफ कथित रूप से भड़काऊ या असंतोष फैलाने वाले कृत्यों पर कार्रवाई की जाती रही है।

कई याचिकाओं में इस कानून को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस कानून का दुरुपयोग होता है। साथ ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित होती है और असहमति जताने वालों पर इसका इस्तेमाल किया जाता है।

इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में इस कानून के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाई थी।

अब ताजा आदेश में अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि जहां आरोपी स्वयं सुनवाई चाहता है, वहां न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं रहेगी।

लंबे समय से जेल में बंद आरोपियों को मिल सकता है रास्ता

यह आदेश उन आरोपियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनकी अपीलें या मुकदमे लंबे समय से लंबित हैं और जिनमें Section 124A IPC भी शामिल है।

कई मामलों मेंआरोपी वर्षों से जेल में हैं, अपील लंबित है और 2022 के आदेश के बाद सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही थी। अब यदि आरोपी स्वयं अदालत से कहे कि उसे सुनवाई पर कोई आपत्ति नहीं है, तो अदालत उसके मामले की सुनवाई merits पर कर सकती है। इससे लंबे समय से लंबित मामलों में सुनवाई का रास्ता खुल सकता है।

इस स्पष्टीकरण के बाद देशभर की अदालतों में लंबित देशद्रोह मामलों पर असर पड़ेगा। खासतौर पर:

  • जिन मामलों में आरोपी सुनवाई के लिए तैयार हैं, वहां तेजी आ सकती है।
  • हाईकोर्ट्स और ट्रायल कोर्ट्स अब स्पष्ट दिशा-निर्देश के साथ काम कर पाएंगे।
  • लंबे समय से लंबित अपीलों का निपटारा संभव होगा।

यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में देरी को कम करने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।

पहले भी उठा था ऐसा सवाल

देशद्रोह कानून से जुड़े मामलों में यह सवाल पहले भी सुप्रीम कोर्ट के सामने उठ चुका है कि जिन आरोपियों को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है, उनकी अपीलों का क्या होगा।

2025 में SIMI के पूर्व नेता सफदर नागौरी के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट के सामने यही मुद्दा आया था कि क्या Section 124A IPC से जुड़े दोषसिद्धि मामलों की अपीलें सुनी जा सकती हैं। उस समय यह मुद्दा बड़ी बेंच के पास भेजा गया था।

अब ताजा आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कम से कम इतना साफ कर दिया है कि यदि आरोपी स्वयं आपत्ति नहीं करता, तो अदालतें सुनवाई जारी रख सकती हैं।

SC का अंतिम आदेश और उसका असर

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश एक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है—जहां एक ओर देशद्रोह कानून के दुरुपयोग को रोकने की कोशिश जारी है, वहीं दूसरी ओर न्याय पाने के इच्छुक आरोपियों को राहत देने का रास्ता भी खोला गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:

  • 2022 के अंतरिम आदेश को पूरी तरह सुनवाई रोकने के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
  • यदि आरोपी को कोई आपत्ति नहीं है तो अदालतें ट्रायल, अपील या अन्य कार्यवाही जारी रख सकती हैं।
  • ऐसे मामलों का merits पर फैसला कानून के अनुसार किया जा सकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से आरोपी की अपील पर शीघ्र सुनवाई करने का अनुरोध किया।

यह आदेश आने वाले समय में देशद्रोह कानून से जुड़े लंबित मुकदमों और अपीलों पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

अब यह स्पष्ट हो गया है कि Section 124A IPC से जुड़े मामलों में पूरी तरह से “ब्रेक” नहीं लगा है, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

सबसे अधिक लोकप्रिय