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10 केस दर्ज होने के बावजूद NDPS केस के आरोपी को मिली जमानत, हाईकोर्ट बोला- 4.5 साल जेल में रखना न्यायसंगत नहीं, सहआरोपी को मिल चुकी जमानत

Rajasthan High Court Grants Bail to NDPS Accused After 4.5 Years in Jail, Cites Trial Delay and Supreme Court Parity

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एनडीपीएस एक्ट के एक बड़े मामले में अहम फैसला सुनाते हुए चार साल से ज्यादा समय से जेल में बंद आरोपी प्रभु उर्फ प्रभु लाल उर्फ प्रभु दयाल गुर्जर को जमानत दे दी।

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी लंबे समय से हिरासत में है, ट्रायल अब तक पूरा नहीं हो पाया है और समान परिस्थिति वाले सह-आरोपी को सुप्रीम कोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है।

ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं माना जा सकता।

जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश आरोपी प्रभू की ओर से पेश कि गयी चौथी जमानत याचिका पर दिया हैं.

आरोपी के खिलाफ चित्तौड़गढ़ जिले के मंगलवाड़ थाने में वर्ष 2020 में एफआईआर संख्या 49/2020 दर्ज हुई थी। मामला एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/15 और 8/29 से जुड़ा है।।

3 क्विंटल 9 किलो डोडा पोस्त बरामद, कई नाम आए सामने

अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार 15 मई 2020 को मंगलवाड़ थाना पुलिस को मादक पदार्थों की तस्करी की सूचना मिली थी।

इसके बाद पुलिस ने ट्रक नंबर RJ-09-GA-2363 को रोककर तलाशी ली। तलाशी में 11 प्लास्टिक बैग और 6 बड़े कट्टों से कुल 3 क्विंटल 9 किलो डोडा पोस्त बरामद किया गया।

उस समय ट्रक को जगदीश चला रहा था और उसके साथ दिनेशराम मौजूद था। पूछताछ के दौरान भंवरलाल, प्रकाश, प्रभु और मनोज जाट के नाम सामने आए, जिन पर मादक पदार्थ की सप्लाई और लेन-देन में शामिल होने का आरोप लगाया गया।

चौथी बार पहुंचा हाईकोर्ट, पहले तीन बार नहीं मिली राहत

यह आरोपी की चौथी जमानत याचिका थी। इससे पहले हाईकोर्ट उसकी जमानत अर्जी खारिज कर चुका था।

29 अप्रैल 2024 को तीसरी जमानत याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा था कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत राहत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं।

हालांकि इस बार बचाव पक्ष ने अदालत के सामने कई नए तथ्य रखे।

आरोपी की ओर से अधिवक्ता कैलाश खिलैरी ने कहा कि प्रभु 4 अक्टूबर 2021 से लगातार जेल में बंद है, जबकि ट्रायल अभी भी अधूरा है।

गवाहों के बयान तक पूरे नहीं हुए हैं। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है और अब उसकी हिरासत की आवश्यकता नहीं है।

सह-आरोपी को जमानत बना बड़ा आधार

बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि इसी मामले में सह-आरोपी प्रकाश पुत्र शंभूलाल जाट की जमानत याचिका पहले हाईकोर्ट ने खारिज की थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर 2024 को उसे जमानत दे दी।

इसी आधार पर प्रभु ने समानता (Parity) का लाभ मांगा।

कोर्ट ने माना कि वर्तमान आरोपी की स्थिति सह-आरोपी प्रकाश जैसी ही है।

अदालत ने कहा कि जब समान परिस्थिति वाले आरोपी को सुप्रीम कोर्ट राहत दे चुका है तो वर्तमान मामले में भी उस पहलू पर विचार जरूरी है।

आरोपी पर 10 केस, 8 NDPS एक्ट के

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक ललित किशोर सेन ने जमानत का कड़ा विरोध किया।

सरकार ने कहा कि आरोपी के खिलाफ गंभीर और संगठित अपराध के आरोप हैं।

रिकॉर्ड के अनुसार प्रभु के खिलाफ कुल 10 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 8 मामले एनडीपीएस एक्ट से जुड़े हुए हैं। इनमें तीन मामले वर्ष 2011, एक मामला 2017 और चार मामले 2020 में दर्ज हुए थे।

इसके बावजूद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आपराधिक इतिहास के आधार पर किसी आरोपी को अनिश्चित समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब ट्रायल की गति बेहद धीमी हो। अदालत ने रिकॉर्ड देखकर माना कि अभी भी गवाहों के बयान बाकी हैं और ट्रायल जल्द खत्म होने की संभावना नहीं दिखती।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम Court के कई महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख किया।

हाईकोर्ट ने ‘सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि जमानत नियम है और जेल अपवाद। लंबे समय तक हिरासत में रहना भी एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 की शर्तों को संतुष्ट करने का आधार बन सकता है।

इसके अलावा कोर्ट ने ‘साहिल मनोज मचारे बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामले का जिक्र करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे आरोपी को भी जमानत दी थी, जिसके मामले में चार साल तक एक भी गवाह का बयान नहीं हुआ था।

हाईकोर्ट ने ‘अरविंद धाम बनाम प्रवर्तन निदेशालय’ और ‘जावेद गुलाम नबी शेख बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामलों का भी उल्लेख किया, जिनमें लंबी हिरासत और ट्रायल में देरी को जमानत का आधार माना गया था।

कोर्ट बोला- आरोपी से कोई बरामदगी नहीं हुई

हाईकोर्ट ने आदेश में यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि वर्तमान आरोपी प्रभु से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ था।

बरामदगी ट्रक चालक जगदीश और उसके साथी दिनेशराम से हुई थी। अदालत ने माना कि इस तथ्य को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सख्त शर्तों के साथ मिली जमानत

अदालत ने आरोपी को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके और समान राशि की दो जमानतें पेश करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने आरोपी पर कई सख्त शर्तें भी लगाई हैं। आरोपी को हर महीने के प्रथम और तृतीय बुधवार को मंगलवाड़ थाने में उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

इसके अलावा वह किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेगा, सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा और भविष्य में किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा। शर्तों का उल्लंघन होने पर जमानत स्वतः निरस्त की जा सकेगी।

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