जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में विवाहित बेटी को उसके दिवंगत पिता के स्थान पर अनुकम्पात्मक नियुक्ति नहीं दिए जाने पर गंभीर रुख अपनाते हुए शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग से जवाब तलब किया है कि उत्तराधिकारी होने के बावजूद याचिकाकर्ता को अनुकम्पात्मक नियुक्ति क्यों नहीं दी गई।
जस्टिस गणेश राम मीणा की एकलपीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता अनिता राजौरा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
6 साल से नहीं मिला निर्णय
याचिकाकर्ता के पिता ओमप्रकाश राजौरा शिक्षा विभाग के अधीन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, नैनवा में स्कूल व्याख्याता के पद पर कार्यरत थे।
वर्ष 2017 में सेवा के दौरान उनका निधन हो गया।
पिता के निधन के बाद मृतक की विवाहित पुत्री याचिकाकर्ता ने स्वयं को उत्तराधिकारी बताते हुए अनुकम्पात्मक नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने वर्षों बीत जाने के बावजूद उस पर कोई निर्णय नहीं लिया।
याचिकाकर्ता ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हितेष बागड़ी ने मामले में पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि विवाह के बाद भी याचिकाकर्ता अपने पिता की देखभाल और सेवा में निरंतर लगी रही।
इसी कारण पिता ने अपने सेवा लाभों एवं अन्य अधिकारों का उत्तराधिकारी उसे घोषित करते हुए विधिवत वसीयत भी बनाई थी।
अधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि पिता की मृत्यु के बाद याचिकाकर्ता ने उत्तराधिकारी के रूप में अनुकम्पात्मक नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने करीब छह वर्षों तक कोई नियुक्ति नहीं दी और न ही कोई उचित निर्णय लिया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा…
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस गणेश राम मीणा ने प्रथम दृष्टया मामले को विचारणीय मानते हुए याचिका स्वीकार की तथा शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने विभाग से स्पष्ट करने को कहा है कि जब याचिकाकर्ता मृत कर्मचारी की वैध उत्तराधिकारी है, तब उसे अनुकम्पात्मक नियुक्ति से वंचित क्यों रखा गया।
