जयपुर। त्रिपोलिया बाजार के पुरोहितजी के कटले में हुए अग्निकांड को लेकर राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है।
आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जी.आर. मूलचंदानी ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद जयपुर की अग्निशमन व्यवस्था, पानी की उपलब्धता और फायर सेफ्टी इंतजामों को लेकर कई अहम सवाल उठाए हैं।
आयोग के निरीक्षण में सामने आया कि घटनास्थल तक पहुंचने वाली गलियां संकरी हैं और दुकानों का घनत्व अधिक है।
जली हुई व्यावसायिक सामग्री रास्ते में बिखरी मिली। मौके पर लगा अग्निशमन हाइड्रेंट निष्क्रिय पाया गया।
आयोग को यह भी बताया गया कि संबंधित दुकानदारों के पास अग्निशमन विभाग की NOC उपलब्ध नहीं थी।
सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि घटनास्थल के आसपास करीब डेढ़ किलोमीटर के दायरे में कोई हाइड्रेंट या जलापूर्ति केंद्र उपलब्ध नहीं है।
घाटगेट फायर स्टेशन पर मौजूद हाइड्रेंट घटनास्थल से करीब डेढ़ से दो किलोमीटर दूर है और बीच में घना बाजार तथा ट्रैफिक सिग्नल हैं।
आयोग ने फायर टेंडर में पानी की मात्रा और दबाव को लेकर भी जानकारी मांगी।
विभाग के पास पानी की वास्तविक मात्रा मापने के लिए गेज मीटर उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। आग की सूचना मिलने के वास्तविक समय का रिकॉर्ड भी रजिस्टर में दर्ज नहीं मिला।
मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट
आयोग ने नगर निगम, जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग से विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।
रिपोर्ट में फायर स्टेशनों, हाइड्रेंट प्वाइंट, जल भंडारण, फायर टेंडरों की क्षमता, उपलब्ध संसाधनों और घटना के दौरान की गई कार्रवाई का पूरा विवरण देना होगा।
मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे होगी। आयोग ने जयपुर में भविष्य में ऐसी घटनाओं पर तत्काल नियंत्रण के लिए पर्याप्त हाइड्रेंट, जल उपलब्धता और फायर टेंडरों की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपेक्षा जताई है।
