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NEET-UG री-एग्जाम के 6 सवालों पर विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की; रिजल्ट और मेरिट लिस्ट में बदलाव से इनकार

Supreme Court Rejects Challenge to Six NEET-UG Re-Exam Questions, Upholds Result and Merit List

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी 2026 री-एग्जाम के छह सवालों के जवाबों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दखल देने का कोई आधार नहीं बनता। इसके साथ ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की ओर से जारी रिजल्ट और मेरिट लिस्ट में बदलाव की मांग भी खारिज हो गई।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच ने केरल की अभ्यर्थी गायत्री अरुण की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और याचिका में उठाए गए तर्कों को देखने के बाद इस मामले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। इसलिए याचिका खारिज की जाती है।

नीट-यूजी 2026 की काउंसलिंग शुरू होने से पहले इस मामले को काफी अहम माना जा रहा था।

अगर कोर्ट याचिका स्वीकार कर लेता, तो छह सवालों की उत्तर कुंजी में बदलाव के साथ मेरिट लिस्ट दोबारा जारी करनी पड़ सकती थी, जिसका असर हजारों अभ्यर्थियों की रैंक और दाखिला प्रक्रिया पर पड़ता।

किसने दाखिल की थी याचिका?

इस साल 3 मई को हुई नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई थी। इसके बाद एनटीए ने 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई।

केरल की अभ्यर्थी गायत्री अरुण ने री-एग्जाम के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की।

उनका कहना था कि रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान के छह सवालों के आधिकारिक जवाब एनसीईआरटी की किताबों के अनुरूप नहीं हैं।

याचिका में कहा गया कि इन छह सवालों के आधिकारिक जवाब गलत होने की वजह से अभ्यर्थियों के अंक और ऑल इंडिया रैंक पर सीधा असर पड़ा है।

उनका कहना था कि मेडिकल प्रवेश में एक अंक भी रैंक बदल सकता है, इसलिए इन जवाबों के आधार पर तैयार मेरिट लिस्ट सही नहीं मानी जा सकती।

याचिकाकर्ता ने क्या मांग की?

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी कि विवादित छह सवालों को स्वतंत्र विषय विशेषज्ञों के पास भेजा जाए। अगर उत्तर कुंजी में गलती मिलती है तो उसे संशोधित किया जाए और नई मेरिट लिस्ट जारी की जाए।

याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की कि उनकी रैंक दोबारा तय की जाए और चल रही दाखिला प्रक्रिया के दौरान उनकी सीट सुरक्षित रखी जाए, ताकि अगर छह विवादित सवालों के जवाबों में कोई बदलाव होता है, तो उन्हें उसका नुकसान न उठाना पड़े।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि काउंसलिंग शुरू होने से पहले विवादित छह सवालों की स्वतंत्र विषय विशेषज्ञों से जांच कराई जानी चाहिए।

अगर आधिकारिक जवाब गलत पाए जाते हैं, तो मेरिट लिस्ट में जरूरी संशोधन किया जाए। उनका कहना था कि इन सवालों के लिए दिए गए अंक सही नहीं माने जा सकते।

केरल हाईकोर्ट में भी नहीं मिली थी राहत

सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से पहले गायत्री अरुण ने केरल हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल की थी।

उन्होंने कहा था कि उत्तर कुंजी पर आपत्ति दर्ज करते समय तकनीकी दिक्कतों की वजह से वह अपने समर्थन में जरूरी दस्तावेज अपलोड नहीं कर सकीं।

उन्होंने यह भी मांग की थी कि अंतिम उत्तर कुंजी जारी होने और रिजल्ट घोषित होने के बीच कम से कम तीन दिन का अंतर रखा जाए, ताकि अभ्यर्थियों को उस पर आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिल सके।

हालांकि, 7 जुलाई को केरल हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट ने कहा कि उत्तर कुंजी की जांच करना कोर्ट काम नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि रिजल्ट में देरी होने से दूसरे अभ्यर्थियों के हित प्रभावित होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका रद्द की

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिका और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री देखने के बाद अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इसका मतलब है कि एनटीए की ओर से जारी अंतिम उत्तर कुंजी, रिजल्ट और मेरिट लिस्ट में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा।

याचिकाकर्ता का कहना था कि केरल हाईकोर्ट में उनकी पहले की याचिका आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया से जुड़ी थी, जबकि सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने छह सवालों के आधिकारिक जवाबों की सही होने पर सवाल उठाया है। उनका तर्क था कि दोनों मामले अलग-अलग हैं।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इस दलील से सहमत नहीं हुआ और मामले में दखल देने से इनकार कर दिया। इसके बाद एनटीए की ओर से जारी अंतिम उत्तर कुंजी, रिजल्ट और मेरिट लिस्ट के आधार पर दाखिला प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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