जोधपुर। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने रविवार को नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) जोधपुर के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कानून और तकनीक के बदलते संबंधों पर महत्वपूर्ण विचार रखे।
NLU जोधपुर के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में CJI ने छात्रों से कहा कि आने वाले समय में कानूनी पेशे की तस्वीर तेजी से बदलने वाली है और इस बदलाव में तकनीक की भूमिका निर्णायक होगी।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि कानूनी पेशा लंबे समय तक तकनीक को अपनाने में अपेक्षाकृत धीमा रहा है, लेकिन अब तकनीक कानूनी क्षेत्र के दरवाजे पर दस्तक नहीं दे रही, बल्कि वह पहले ही कानूनी व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी है।
अनुबंधों की ड्राफ्टिंग, ड्यू डिलिजेंस, कानूनी शोध, विवाद प्रबंधन और विवाद समाधान जैसे क्षेत्रों में तकनीक तेजी से बदलाव ला रही है।
‘लॉ स्कूल बदलाव के दर्शक नहीं, नेतृत्वकर्ता बनें’
CJI ने कहा कि कानूनी शिक्षा को तकनीकी बदलाव का केवल दर्शक नहीं रहना चाहिए। लॉ स्कूल वह स्थान होना चाहिए, जहां तकनीक के प्रति कानूनी क्षेत्र की प्रतिक्रिया और दृष्टिकोण को आकार दिया जाए।
उन्होंने कहा कि कानून के छात्र अपने लॉ स्कूल से केवल कानूनी ज्ञान लेकर नहीं निकलते, बल्कि सोचने, निर्णय लेने और समस्याओं का समाधान करने की आदतें भी वहीं विकसित करते हैं।
इसलिए छात्रों को तकनीकी साधनों के इस्तेमाल के साथ-साथ उनकी सीमाओं, जोखिमों और नैतिक पहलुओं को समझाना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी के कानून स्नातक अदालतों और लॉ फर्मों के अलावा कॉरपोरेट क्षेत्र, सार्वजनिक सेवा, नीति-निर्माण, नियमन, तकनीक और अनुपालन जैसे क्षेत्रों में भी काम करेगी।
ऐसे में उन्हें तकनीक को कानूनी कार्य से अलग नहीं, बल्कि बदलती दुनिया के अभिन्न हिस्से के रूप में समझना होगा।
‘AI को कक्षा से बाहर रखना समाधान नहीं’
CJI सूर्यकांत ने जनरेटिव AI और अन्य तकनीकी टूल्स को लेकर कानून संस्थानों में मौजूद चिंताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छात्रों को तकनीक से पूरी तरह दूर रखना इसका समाधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्र को लॉ स्कूल में नियंत्रित और अनुशासित वातावरण में इन तकनीकी साधनों को समझने का अवसर नहीं दिया जाएगा, तो वह पेशेवर जीवन में प्रवेश करने के बाद इनका सामना करेगा।
ऐसे में उसे तकनीक की क्षमताओं के साथ-साथ उसके जोखिमों और सीमाओं की जानकारी होना जरूरी है।
CJI ने जोर दिया कि छात्रों को यह सिखाया जाना चाहिए कि किसी तकनीकी टूल पर कब भरोसा किया जा सकता है, कब उसके आउटपुट की स्वतंत्र रूप से जांच जरूरी है और कब मानवीय निर्णय को तकनीक से ऊपर रखा जाना चाहिए।
‘तकनीक निर्णय क्षमता का विकल्प नहीं बन सकती’
CJI ने कहा कि ऐसा कानून स्नातक जो केवल तकनीकी टूल के आउटपुट को समझता है, लेकिन उसकी सीमाओं और जोखिमों से अनजान है, वह तकनीक पर निर्भर हो सकता है।
इसके विपरीत, ऐसा स्नातक जो तकनीक के निष्कर्षों पर सवाल उठाने, उन्हें सत्यापित करने और स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए प्रशिक्षित है, तकनीक का अधिक प्रभावी और जिम्मेदार इस्तेमाल कर सकता है।
उन्होंने कहा कि AI और अकादमिक ईमानदारी से जुड़े सवाल आज कानूनी शिक्षा के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से हैं।
इन विषयों को संविधान या साक्ष्य कानून जैसे महत्वपूर्ण विषयों की तरह ही गंभीरता से पाठ्यक्रम और शिक्षण प्रक्रिया में शामिल करने की आवश्यकता है।
‘कानून को तकनीकी बदलाव का नेतृत्व करना होगा’
CJI सूर्यकांत ने कहा कि केवल तकनीक के साथ खुद को ढालना पर्याप्त नहीं है।
यदि कानून को तकनीकी क्षेत्र में नेतृत्व करना है तो उसे बदलाव का पूर्वानुमान लगाना होगा, उसकी दिशा को प्रभावित करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक कानून तथा न्याय के मूल्यों की सेवा करे।
उन्होंने देशभर के राष्ट्रीय कानून विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से इस दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि लॉ स्कूलों को लीगल टेक्नोलॉजी पर गंभीर और व्यापक शोध के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
‘तकनीक का लाभ छोटे शहर के मुकदमेबाज तक भी पहुंचे’
CJI ने तकनीक के इस्तेमाल में समानता और न्याय तक पहुंच को केंद्र में रखने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि तकनीक केवल संसाधन-संपन्न लोगों और बड़े कॉरपोरेट संस्थानों की दक्षता बढ़ाने का माध्यम नहीं बननी चाहिए, बल्कि इसका लाभ छोटे शहरों और सामान्य मुकदमेबाजों तक भी पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अदालतों और कानूनी व्यवस्था में तकनीक से दक्षता बढ़नी चाहिए, लेकिन यह निष्पक्षता की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।
NLU जोधपुर के 25 साल पूरे होने पर दी बधाई
समापन संबोधन में CJI सूर्यकांत ने NLU जोधपुर के 25 वर्ष पूरे होने पर विश्वविद्यालय परिवार को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि 25 वर्ष पहले NLU जोधपुर भारत में कानूनी शिक्षा के भविष्य में विश्वास का प्रतीक है और आज यह एक मजबूत संस्थान तथा कानूनी क्षेत्र में योगदान देने वाली पीढ़ियों का केंद्र बन चुका है।
CJI ने छात्रों और शिक्षकों को संदेश देते हुए कहा कि तकनीक कानूनी संस्थानों और सेवाओं को अधिक सक्षम बनाए, लेकिन यह मानव मूल्यों को पीछे नहीं छोड़ सकती।
नवाचार न्याय प्रक्रिया को तेज कर सकता है, लेकिन उसे कभी कम निष्पक्ष नहीं बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हर तकनीकी प्रगति को इस कसौटी पर परखा जाना चाहिए कि क्या वह न्याय को उन लोगों के और करीब लेकर आती है, जिन्हें उसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
CJI ने NLU जोधपुर की कुलपति प्रोफेसर डॉ. हरप्रीत कौर और विश्वविद्यालय परिवार को कार्यक्रम के आयोजन तथा 25 वर्षों की उल्लेखनीय यात्रा के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में कानून, तकनीक और न्याय के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल करेगा