जोधपुर के पुराने जिला कोर्ट की जगह नए भवन का दिया सुझाव, हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग का भी किया जिक्र
जोधपुर। नवनिर्मित सात मंजिला G-7 जिला कोर्ट भवन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता ने तैयार न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर के समय पर इस्तेमाल पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि तैयार भवन को लंबे समय तक खाली रखना न केवल सार्वजनिक संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि इससे भवन को भी नुकसान पहुंच सकता है।
जस्टिस मेहता ने कहा कि यह परिसर उनके साथ-साथ जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की भी कर्मस्थली रहा है।
उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट में लगातार सुनवाई के बीच एक कोर्ट से दूसरे कोर्ट भागते हुए उनका महत्वपूर्ण समय इसी परिसर में बीता है।
‘एक साल से तैयार थी बिल्डिंग, उपयोग में देरी नहीं होनी चाहिए’
जस्टिस मेहता ने बताया कि CJI जस्टिस सूर्यकांत के जोधपुर आने की जानकारी मिलने पर उनके मन में जिला कोर्ट की तैयार इमारत के उद्घाटन का विचार आया।
जानकारी लेने पर पता चला कि यह भवन करीब एक वर्ष पहले ही तैयार हो चुका था, लेकिन अब तक इसका उपयोग शुरू नहीं हो पाया था।
उन्होंने कहा कि किसी संस्थान में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो जाए तो उसके उपयोग में देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होने कहा कि लंबे समय तक भवन खाली रहने से नमी, दीमक और अन्य क्षति की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने नीति-निर्माताओं और निर्णय लेने वाले अधिकारियों से तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर को जल्द से जल्द उपयोग में लाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “Litigating public का अधिकार है कि उन्हें बेहतर और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में सुविधाएं मिलें। तैयार भवन को इस्तेमाल में नहीं लेना sheer wastage है।”
पुराने जिला कोर्ट की जगह नया भवन बनाने का सुझाव
जस्टिस मेहता ने कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों के समक्ष महत्वपूर्ण सुझाव रखते हुए कहा कि वर्तमान पुराना जिला कोर्ट भवन काफी पुराना हो चुका है और उसमें अब अतिरिक्त मंजिलें बनाने की पर्याप्त संभावना नहीं है।
उन्होंने सुझाव दिया कि पुराने भवन में संचालित अदालतों को नए G-7 भवन में स्थानांतरित करने के बाद पुरानी इमारत को ध्वस्त कर वहां एक और सात मंजिला आधुनिक न्यायिक भवन बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जोधपुर की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए आने वाले समय में और अधिक अदालतों की आवश्यकता होगी।
‘1924 के ऐतिहासिक परिसर की गरिमा बनाए रखना जरूरी’
जस्टिस मेहता ने कहा कि यह न्यायिक परिसर ऐतिहासिक महत्व रखता है और 1924 में यहां हाईकोर्ट भवन का उद्घाटन हुआ था।
ऐसे में परिसर की गरिमा बनाए रखने के लिए जर्जर और पुराने भवनों के स्थान पर आधुनिक न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नए भवन में डिजिटाइजेशन और आधुनिक तकनीकी सुविधाओं को पहले से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि न्याय व्यवस्था भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार रहे।
दोनों बार एसोसिएशनों के एक मंच पर आने की सराहना
जस्टिस मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन और राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित समारोह की सराहना की।
उन्होंने कहा कि दोनों बार एसोसिएशन “दो तन और एक जान” की तरह हैं और आज एक मंच पर उनका साथ आना बेहद खुशी की बात है।
उन्होंने दोनों बार एसोसिएशनों को भव्य आयोजन के लिए साधुवाद देते हुए उम्मीद जताई कि CJI जस्टिस सूर्यकांत के नेतृत्व और मार्गदर्शन में जोधपुर की न्यायिक राजधानी को भविष्य में भी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास की नई सौगातें मिलती रहेंगी