नई दिल्ली। अब देशभर के कोर्ट्स में जज, वकील और पक्षकारों को बेहतर सुविधाएं मिलने वाली हैं। क्योंकि कोर्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं को बेहतर करने का रोडमेप तैयार हो गया है।
कोर्ट के आधुनिकीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी दूर करने और न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए बनाई गई ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी कमेटी ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है।
कमेटी ने 31 अगस्त को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत से मुलाकात की और तय समय सीमा के भीतर अपनी अंतरिम रिपोर्ट CJI को सौंपी दी है।
कमेटी की रिपोर्ट में जजों, कोर्ट स्टाफ, वकीलों और कोर्ट आने वाले लोगों के लिए बेहतर सुविधाओं के साथ डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने पर भी सुझाव दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली इस ज्यूडिशियल इंफ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी कमेटी का गठन CJI ने 12 मई 2026 को किया था।
इस कमेटी को देशभर के कोर्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों का पता लगाने और उन्हें दूर करने के लिए एक रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
कमेटी का मकसद कोर्ट्स के लिए एक ऐसा बेहतर और समान इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम तैयार करना था, जिससे जजों के साथ-साथ वकीलों, पक्षकारों और कोर्ट स्टाफ को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
अब कमेटी ने तय समयसीमा यानी 31 अगस्त तक अपनी अंतरिम रिपोर्ट तैयार कर CJI को सौंप दी है।
कमेटी की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद CJI सूर्यकांत इस मामले को केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के सामने रखेंगे।
कोर्ट्स में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों की पहचान
कमेटी को देशभर के कोर्ट्स के सामने आने वाली इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याओं की पहचान करने और उन्हें दूर करने के उपाय सुझाने का काम दिया गया था।
इसमें जजों, कोर्ट स्टाफ, वकीलों, पक्षकारों और कोर्ट आने वाले लोगों के लिए जरूरी सुविधाओं का आकलन भी शामिल है।
कमेटी का फोकस सिर्फ कोर्ट बिल्डिंग तक सीमित नहीं है।
न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी और डिजिटल सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
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ई-कोर्ट और डिजिटल सुविधाओं पर भी जोर
कमेटी को ई-कोर्ट्स पहल के तहत कोर्ट्स के कंप्यूटरीकरण को बेहतर बनाने के उपाय बताने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।
इसके अलावा डिजिटल डिवाइड को कम करने, नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और कोर्ट की सेवाओं को ज्यादा आसान और सुलभ बनाने के उपायों पर भी विचार किया गया।
रिपोर्ट में डिजिटल डिवाइड कम करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि कोर्ट की डिजिटल सेवाओं का फायदा उन लोगों तक भी पहुंच सके, जिनके पास अभी इंटरनेट या दूसरी तकनीकी सुविधाओं की कमी है।
इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिन्हें कोर्ट की तारीख, दस्तावेज, केस की जानकारी या दूसरी न्यायिक सेवाओं के लिए बार-बार कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
सरकार से बड़े फंड की जरूरत पर जोर
कमेटी के गठन के समय कोर्ट्स के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार से बड़े स्तर पर फंडिंग की जरूरत भी सामने रखी गई थी।
मई में जारी रिपोर्ट्स के मुताबिक, कमेटी को करीब 40 हजार से 50 हजार करोड़ रुपए तक के सरकारी आवंटन की जरूरत का आकलन तैयार करने का काम भी दिया गया था।
अब अंतरिम रिपोर्ट CJI को सौंपे जाने के बाद इसके सुझावों के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर कोर्ट्स के आधुनिकीकरण के लिए आगे की कार्रवाई का रास्ता तैयार होगा।
कमेटी में कौन-कौन शामिल ?
कमेटी की अध्यक्षता जस्टिस अरविंद कुमार कर रहे हैं। इसमें जस्टिस देबांग्शु बसाक, जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस सोमशेखर सुंदरसन भी शामिल हैं।
इसके अलावा CPWD के डायरेक्टर जनरल सतींदर पाल सिंह और सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल भारत पाराशर भी कमेटी के सदस्य हैं।
कमेटी की रिपोर्ट अब कोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यवस्थाओं को लेकर आगे की योजना बनाने का आधार बन सकती है।
खासकर आधुनिक कोर्ट कॉम्प्लेक्स, डिजिटल सुविधाओं और नागरिकों के लिए बेहतर व्यवस्था पर आगे काम किया जा सकता है।
हालांकि यह अभी अंतरिम रिपोर्ट है। इसलिए इसे तुरंत लागू होने वाले बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
कमेटी की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद CJI इसे केंद्र और राज्य सरकारों के सामने रखेंगे, ताकि देशभर में न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए एक समान दिशा में काम किया जा सके।
