जयपुर। 22 गोदाम से महेश नगर फाटक, गोपालपुरा बाईपास होते हुए बी टू बाईपास तक सड़क की जमीन पर मौजूद 310 अतिक्रमण अब हटाए जाएंगे।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को इन अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई पूरी करने के लिए 3 महीने का समय दिया है।
हाईकोर्ट ने साफ किया कि अतिक्रमण चाहे निजी लोगों ने किया हो या किसी वैधानिक संस्था ने, सड़क की जमीन को खाली कराना होगा।
हालांकि कार्रवाई से पहले प्रभावित लोगों को 15 दिन का नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का मौका देना होगा।
हाईकोर्ट ने जेडीए सचिव को 25 नवंबर को पालना रिपोर्ट के साथ कोर्ट में पेश होने का निर्देश भी दिया है।
जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने सीताराम देवंदा और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम निर्देश दिए।
6 किलोमीटर की सड़क पर 310 अतिक्रमण
सुनवाई के दौरान जेडीए की ओर से अधिवक्ता अमित कुड़ी ने कोर्ट में हलफनामा पेश किया। इसमें सड़क की मौजूदा स्थिति और प्रस्तावित चौड़ाई को लेकर जानकारी दी गई।
जेडीए के अनुसार 22 गोदाम से बी टू बाईपास तक सड़क की लंबाई करीब 6 किलोमीटर है और इसके अलग-अलग हिस्सों में कुल 310 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं।
इनमें करीब 160 मकान और 150 दुकानें और दूसरे ढांचे शामिल हैं।
जेडीए ने यह भी बताया कि सड़क के कुछ हिस्से पर रेलवे की ओर से भी अतिक्रमण है।
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सड़क की चौड़ाई भी अलग-अलग तय
जेडीए ने हलफनामे में 22 गोदाम से बी टू बाईपास तक सड़क के अलग-अलग हिस्सों की प्रस्तावित चौड़ाई की जानकारी दी है।
22 गोदाम रेलवे स्टेशन से महेश नगर फाटक तक करीब 1400 मीटर सड़क की चौड़ाई 40 फीट रहेगी।
महेश नगर फाटक से गोपालपुरा बाईपास तक करीब 1600 मीटर हिस्से की चौड़ाई 60 फीट तय की गई है।
वहीं गोपालपुरा बाईपास से बी टू बाईपास तक करीब 2900 मीटर सड़क 80 फीट चौड़ी होगी।
इस तरह जेडीए की योजना के अनुसार पूरी सड़क को उसकी निर्धारित चौड़ाई के मुताबिक विकसित करने के लिए रास्ते में आने वाले अतिक्रमण हटाने होंगे।
निजी हो या सरकारी, सभी अतिक्रमण हटेंगे
हाईकोर्ट ने जेडीए को सड़क की जमीन पर मौजूद अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई करने के लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि सड़क की जमीन पर मौजूद सभी अतिक्रमणों के संबंध में संबंधित लोगों को कार्रवाई से पहले 15 दिन का नोटिस देकर अपना पक्ष रखने और संबंधित दस्तावेज पेश करने का मौका देना होगा।
हाईकोर्ट ने साफ किया कि अतिक्रमण निजी व्यक्ति ने किया हो या किसी वैधानिक संस्था ने, नियम के मुताबिक सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यानी सड़क की तय सीमा में आने वाले सभी 310 अतिक्रमण इस कार्रवाई के दायरे में होंगे
JDA ने मांगा था 4 महीने का समय
सुनवाई के दौरान जेडीए ने 310 अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई पूरी करने के लिए कोर्ट से 4 महीने का समय मांगा था।
हालांकि, हाईकोर्ट ने जेडीए को 4 महीने के बजाय 3 महीने में कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई मनमाने तरीके से नहीं होगी।
जिन लोगों या संस्थाओं पर कार्रवाई होनी है, उन्हें पहले नोटिस देना होगा और अपनी बात रखने का मौका भी देना होगा।
हाईकोर्ट ने जेडीए सचिव को तय समय के अंदर कार्रवाई की पालना रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
25 नवंबर को JDA सचिव देंगे रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को तय की है।
उस दिन जेडीए सचिव को कोर्ट में पालना रिपोर्ट पेश करनी होगी।
रिपोर्ट में यह बताना होगा कि 310 अतिक्रमणों को हटाने के निर्देश पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और सड़क की जमीन को खाली कराने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची।
फिलहाल कोर्ट के निर्देश के बाद 22 गोदाम से बी टू बाईपास तक सड़क की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
हालांकि, कार्रवाई से पहले प्रभावित लोगों को 15 दिन का नोटिस और अपना पक्ष रखने का मौका देना होगा।
