जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में चल रहे प्रशासनिक और न्यायिक घटनाक्रम के बीच सोमवार को जयपुर पीठ से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आदेश सामने आया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने 1 सितंबर से 5 सितंबर 2026 तक जयपुर बेंच के लिए संशोधित रोस्टर जारी करते हुए खुद को न्यायिक कार्य से दूर करते हुए नॉन सिटिंग किया है.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा तीन दिन के अवकाश पर चले गए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के आदेश से जारी हुए नए रोस्टर में कोर्ट संख्या 2 की खंडपीठ यानी खुद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की पीठ को नॉन सिटिंग कि गयी है.
हाईकोर्ट की जयपुर बेंच की ओर से 31 अगस्त 2026 को जारी आदेश में 24 अगस्त को जारी मौजूदा रोस्टर में आंशिक संशोधन करते हुए 1 सितंबर से 5 सितंबर 2026 तक के लिए नई बेंचों का गठन किया गया है।
साथ ही 5 सितंबर तक के लिए बदलाव करते हुए कोर्ट संख्या 3 में खंडपीठ का गठन किया गया हैं.
जिसमें जस्टिस इन्द्रजीत और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ उन मामलो की सुनवाई करेगी जो कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की पीठ को आवंटित थे.
नए रोस्टर के मुताबिक कोर्ट नंबर 3 में डिवीजन बेंच-2 के तहत जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा CAT मामले, सिविल रिट याचिकाएं, सिविल रेसिड्यू मामले, फैमिली कोर्ट एवं मैट्रिमोनियल मामले, PIL, स्पेशल अपील, इनकम टैक्स से जुड़े मामले और हाईकोर्ट द्वारा दायर अथवा उसके खिलाफ दायर मामले शामिल हैं।
वहीं कोर्ट नंबर 14 में जस्टिस भुवन गोयल को आपराधिक अपील, क्रिमिनल लीव टू अपील और क्रिमिनल रिवीजन से जुड़े निर्धारित मामलों की जिम्मेदारी दी गई है।
कोर्ट नंबर 25 में जस्टिस संगीता शर्मा वर्ष 2023 से 2025 तक के आपराधिक अपील, लीव टू अपील और क्रिमिनल रिवीजन मामलों की सुनवाई करेंगी।
जस्टिस मेहता ने रोस्टर और केस लिस्टिंग सहित हाईकोर्ट के कामकाज को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, ये आरोप अभी आरोप ही हैं और इन्हें जस्टिस शर्मा के खिलाफ कोई न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना गया है।

कोर्ट नंबर-14 और 25 में भी बदला न्यायिक काम
संशोधित रोस्टर में कोर्ट नंबर-14 में जस्टिस भुवन गोयल को आपराधिक मामलों से जुड़ी सुनवाई सौंपी गई है। इसमें निर्धारित अवधि के क्रिमिनल अपील, क्रिमिनल लीव टू अपील और क्रिमिनल रिवीजन शामिल हैं।
वहीं कोर्ट नंबर-25 में जस्टिस संगीता शर्मा को वर्ष 2023 से 2025 तक के क्रिमिनल अपील, क्रिमिनल लीव टू अपील और क्रिमिनल रिवीजन मामलों की सुनवाई का जिम्मा दिया गया है।
31 अगस्त को जारी यह संशोधित रोस्टर 1 सितंबर से 5 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा।

विवाद के बीच सामने आया रोस्टर बदलाव
यह बदलाव राजस्थान हाईकोर्ट में कार्यवाहक चीफ जस्टिस को लेकर चल रहे विवाद के बीच सामने आया है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने अगस्त में CJI सूर्यकांत को तीन पत्र लिखे थे। इनमें उन्होंने जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के प्रशासनिक कामकाज और केस लिस्टिंग को लेकर सवाल उठाए थे।
जस्टिस मेहता ने CJI से राजस्थान हाईकोर्ट में दूसरे राज्य से नियमित चीफ जस्टिस नियुक्त करने और जस्टिस शर्मा को राजस्थान से बाहर ट्रांसफर करने की मांग की थी।
इस पूरे विवाद के बीच CJI सूर्यकांत की ओर से कहा गया कि किसी मौजूदा जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर तय प्रक्रिया के तहत ही विचार किया जा सकता है।
CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि जस्टिस मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों को केवल सार्वजनिक होने के आधार पर जस्टिस शर्मा के खिलाफ निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। संबंधित जज को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना जरूरी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस शर्मा से इन आरोपों पर जवाब भी मांगा है। अब इस मामले पर कॉलेजियम स्तर पर आगे की प्रक्रिया चल रही है।

वकीलों का विरोध भी तेज हुआ
इसी विवाद के बीच 31 अगस्त को राजस्थान हाईकोर्ट के जयपुर और जोधपुर परिसरों में वकीलों का विरोध भी सामने आया।
जयपुर में कुछ वकीलों ने कार्यवाहक चीफ जस्टिस की कोर्ट के बाहर प्रदर्शन किया।
वहीं जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन और राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने 6 सितंबर तक न्यायिक काम से अलग रहने का फैसला किया है।
दोनों एसोसिएशन की ओर से जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को न्यायिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग करने की मांग की गई है।
वकीलों का यह विरोध जस्टिस संदीप मेहता की ओर से CJI को लिखे गए पत्रों के बाद सामने आए विवाद से जुड़ा है। वकीलों ने न्यायपालिका की निष्पक्षता और उसके कामकाज को लेकर चिंता जताई है।
फिलहाल बदलाव 5 दिन के लिए
फिलहाल 31 अगस्त को जारी नया ऑर्डर 1 से 5 सितंबर 2026 तक ही लागू रहेगा। नए रोस्टर में इस अवधि के लिए कार्यवाहक चीफ जस्टिस की कोई नियमित सिटिंग नहीं रखी गई है और अलग-अलग केस की जिम्मेदारी दूसरी बेंचों को दी गई है।
वहीं नया रोस्टर 1 से 5 सितंबर तक लागू रहेगा और इस दौरान केस की सुनवाई दूसरी बेंचों में होगी।