बार अध्यक्ष राजीव सोगरवाल बोले-आरोपों की सच्चाई सामने आना जरूरी, न्यायपालिका की गरिमा और विश्वसनीयता से समझौता नहीं; महासचिव दीपेश शर्मा ने कहा-आम वकीलों में आक्रोश, संस्थागत स्तर पर तत्काल कार्रवाई जरूरी
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से जुड़े विवाद के बीच राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर बार एसोसिएशन भी अब खुलकर सामने आ गई है।
सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के संबंध में गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद सोमवार को हुए विरोध-प्रदर्शन के बीच राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और महासचिव दीपेश शर्मा ने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
बार अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने स्पष्ट कहा कि मामला किसी व्यक्ति विशेष के समर्थन या विरोध का नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा, पारदर्शिता और संस्थागत विश्वसनीयता का है।
उन्होंने कहा कि आरोपों की वास्तविकता सामने आनी चाहिए और इसके लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
‘आरोप सार्वजनिक होने से न्यायपालिका की गरिमा को लेकर चिंता’
राजीव सोगरवाल ने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के संबंध में कुछ आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आने के बाद पूरे वकील समुदाय में असंतोष की स्थिति है।
ऐसे आरोपों के कारण न्यायपालिका जैसे महत्वपूर्ण संस्थान की गरिमा और विश्वसनीयता को लेकर स्वाभाविक रूप से चिंता उत्पन्न हुई है।
उन्होंने कहा कि बार की स्पष्ट मांग है कि मामले की वास्तविकता सामने आनी चाहिए और इसकी निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
सोगरवाल के अनुसार यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि आखिर शिकायतें क्या थीं, उनका स्तर और स्वरूप क्या था तथा उन्हें किस प्रक्रिया के तहत सार्वजनिक डोमेन में लाया गया।
‘शिकायतों के समाधान की संस्थागत प्रक्रिया थी तो मामला सार्वजनिक क्यों हुआ?’
बार अध्यक्ष सोगरवाल ने कहा कि यदि इस तरह के मामले का समाधान संस्थागत स्तर पर किया जा सकता था, तो उसे मीडिया और सार्वजनिक मंच तक लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी, यह भी जांच का विषय है।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसकी प्रतिष्ठा अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी आरोप की सच्चाई सामने आए बिना उसे सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाना पूरे न्यायिक संस्थान की छवि को प्रभावित कर सकता है।
राजीव सोगरवाल ने कहा कि वकील समुदाय में इस बात को लेकर आक्रोश है कि किसी व्यक्ति या संस्था के संबंध में आरोपों को इस प्रकार सार्वजनिक किए जाने से न्यायपालिका और उससे जुड़े पूरे संस्थागत ढांचे की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है।
इसी कारण कुछ अधिवक्ता साथियों ने अपना आक्रोश भी व्यक्त किया है।
बार अध्यक्ष की मांग-सीजेआई तत्काल संज्ञान लें, निष्पक्ष जांच कराएं
राजीव सोगरवाल ने कहा कि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के नाते उनकी मांग है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश इस मामले का तत्काल संज्ञान लें, निष्पक्ष जांच कराएं और यथाशीघ्र वास्तविक तथ्यों को सभी के संज्ञान में लाया जाए।
उन्होंने साफ किया कि बार का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का समर्थन या विरोध करना नहीं है।
राजीव सोगरवाल कहते हैं..
“हमारा उद्देश्य न्यायपालिका की गरिमा, पारदर्शिता और संस्थागत विश्वसनीयता को बनाए रखना है। आरोपों की सच्चाई निष्पक्ष जांच के माध्यम से सामने आनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रांति या अनावश्यक विवाद की स्थिति समाप्त हो सके।”
महासचिव दीपेश शर्मा बोले-न्यायपालिका की गरिमा और विश्वसनीयता के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर के महासचिव दीपेश शर्मा ने भी पूरे मामले में तत्काल संस्थागत कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
दीपेश शर्मा ने कहा कि मीडिया में लगातार ऐसी खबरें सामने आ रही हैं, जिनमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट के माननीय मुख्य न्यायाधीश के संबंध में गंभीर आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है।
उनके द्वारा लिखे गए पत्रों में संबंधित घटनाओं की तिथियों का भी उल्लेख किया गया है।
दीपेश शर्मा ने कहा कि ऐसी स्थिति में मुख्य न्यायाधीश को पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करनी चाहिए। इस विषय को लेकर आम अधिवक्ताओं में काफी असंतोष और आक्रोश है।
कोर्ट नंबर-2 के बाहर वकीलों ने जताया विरोध
महासचिव ने कहा कि सोमवार को कोर्ट नंबर-2 के सामने भी अधिवक्ताओं ने विरोध दर्ज कराया और अपनी आवाज उठाई।
उनके अनुसार अधिवक्ताओं का विरोध इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पूरे प्रकरण से न्यायपालिका की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
‘युवा वकीलों और आम जनता की धारणा पर पड़ रहा असर’
दीपेश शर्मा ने कहा कि सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस पूरे विवाद का असर युवा अधिवक्ताओं और आम लोगों की न्यायपालिका के प्रति धारणा पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि लोग न्याय की उम्मीद लेकर अदालत आते हैं और न्यायपालिका को न्याय के मंदिर के रूप में देखते हैं।
ऐसे में यदि न्यायपालिका के शीर्ष स्तर पर इस तरह के आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं, तो आम नागरिक और युवा अधिवक्ताओं के मन में स्वाभाविक रूप से भय, संशय और असमंजस की स्थिति पैदा होती है।
दीपेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि
बार यह नहीं कह रही कि लगाए गए आरोप सही हैं या गलत। आरोपों की सच्चाई निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आनी चाहिए। लेकिन जब कोई गंभीर विषय सार्वजनिक डोमेन में आ चुका है, तो अब उस पर तत्काल संस्थागत स्तर पर कार्रवाई आवश्यक है।
‘क्या शिकायतों के निस्तारण की कोई संस्थागत प्रक्रिया नहीं?’
दीपेश शर्मा ने एक अहम सवाल उठाते हुए कहा कि यह भी विचारणीय है कि क्या न्यायपालिका के भीतर ऐसी शिकायतों और आरोपों के निस्तारण के लिए कोई निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसी प्रक्रिया है, तो उसका पालन होना चाहिए। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि……..
यदि आज सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश द्वारा किसी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के संबंध में आरोप लगाए जाते हैं और मामला सार्वजनिक डोमेन में आता है, तो भविष्य में यदि कोई हाईकोर्ट जज किसी अन्य न्यायिक अधिकारी के खिलाफ इसी तरह के आरोप सार्वजनिक रूप से लगाएगा, तो इसका न्यायपालिका की संस्थागत व्यवस्था और आम जनता के विश्वास पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
‘हम किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में नहीं’
महासचिव दीपेश शर्मा ने कहा कि बार किसी व्यक्ति विशेष के पक्ष या विपक्ष में नहीं है। उसकी चिंता केवल न्यायपालिका की गरिमा, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर है।
उन्होंने कहा कि मामले का निष्पक्ष और शीघ्र निस्तारण होना चाहिए, ताकि अधिवक्ताओं और आम जनता के मन में उत्पन्न संशय दूर हो और न्यायपालिका के प्रति विश्वास बना रहे।
जोधपुर के बाद जयपुर बार पर भी बढ़ा दबाव, मंगलवार को होगी अहम बैठक
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ की दोनों बार एसोसिएशनों के हड़ताल पर जाने के बाद अब जयपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन पर भी दबाव बढ़ गया है।
जयपुर में सोमवार को अधिवक्ताओं के विरोध-प्रदर्शन के बाद अब निगाहें मंगलवार को होने वाली बार की बैठक पर टिक गई हैं।
बार एसोसिएशन के महासचिव दीपेश शर्मा ने कहा है कि मंगलवार को बैठक में पूरे मामले पर चर्चा की जाएगी और आगे की रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा।
ऐसे में मंगलवार की बैठक राजस्थान हाईकोर्ट के मौजूदा विवाद के बीच बेहद अहम मानी जा रही है।
यदि जयपुर बार भी आंदोलन या हड़ताल का फैसला करती है, तो राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर और जोधपुर दोनों पीठों में न्यायिक कार्य प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।