सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद बढ़ी हलचल; जस्टिस भाटी का लंबा न्यायिक, प्रशासनिक और बार का अनुभव बना अहम पक्ष
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने की दिशा में बड़ा कदम सामने आया है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा उनके नाम की सिफारिश किए जाने के बाद अब उनकी नई जिम्मेदारी को लेकर तस्वीर साफ होती दिखाई दे रही है।
जस्टिस भाटी राजस्थान हाईकोर्ट के उन न्यायाधीशों में शामिल हैं, जिनके पास न्यायिक कार्य के साथ-साथ वकालत, प्रशासनिक मामलों, शिक्षा, बार एसोसिएशन और सामाजिक गतिविधियों का लंबा अनुभव है।
1992 में वकालत से शुरुआत, 2016 में हाईकोर्ट जज बने
जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी का जन्म 21 सितंबर 1970 को हुआ। उन्होंने बीए, एलएलबी और मर्केंटाइल लॉ में एलएलएम की शिक्षा प्राप्त की। इसके अलावा उन्होंने “Promotion & Seniority in Public Employment, its Changing Dimensions and Role of Supreme Court” विषय पर पीएचडी भी की है।
उन्होंने वर्ष 1992 में वकालत शुरू की और राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर में मुख्य रूप से रिट क्षेत्र में प्रैक्टिस की। उन्हें 16 नवंबर 2016 को राजस्थान हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
उनके विशेषज्ञता वाले प्रमुख क्षेत्रों में सर्विस लॉ, रिट क्षेत्राधिकार, राजस्व, चुनाव, खनन, शिक्षा, पंचायती राज, आपराधिक मामले और जनहित याचिकाएं शामिल हैं।
एडिशनल एडवोकेट जनरल से हाईकोर्ट जज तक का सफर
जस्टिस भाटी ने राजस्थान सरकार के लिए एडिशनल एडवोकेट जनरल के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने 13 अक्टूबर 2008 से 29 दिसंबर 2008 तक तथा इसके बाद 6 जनवरी 2014 से हाईकोर्ट में पदोन्नति तक यह जिम्मेदारी संभाली।
इसके अलावा वे केंद्रीय विद्यालय संगठन, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन, राजस्थान सरकार के श्रम विभाग और आयुर्वेद विभाग सहित विभिन्न संस्थानों के पैनल लॉयर रहे।
उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर सहित कई अन्य संस्थाओं का भी प्रतिनिधित्व किया। वे भारतीय रेलवे के 16 वर्षों तक स्टैंडिंग काउंसल भी रहे।
बार की राजनीति और प्रशासन का भी लंबा अनुभव
जस्टिस भाटी का बार से भी लंबा जुड़ाव रहा है। वे 2009 से 2015 तक बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के सदस्य रहे।
इसके अलावा उन्होंने 2011 से 2013 तक राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और 2001 में राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के महासचिव के रूप में जिम्मेदारी निभाई।
वे राजस्थान हाईकोर्ट में प्रशिक्षित मध्यस्थ (Trained Mediator) भी रहे हैं।
19 साल तक लॉ फैकल्टी में विजिटिंग फैकल्टी
न्यायिक और वकालत के साथ जस्टिस भाटी का शिक्षा क्षेत्र से भी गहरा जुड़ाव रहा है। वे अपने अल्मा मेटर जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर की फैकल्टी ऑफ लॉ में 1997 से 2016 तक करीब 19 वर्षों तक विजिटिंग फैकल्टी रहे।
इसके अलावा उन्होंने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर में भी विजिटिंग फैकल्टी के रूप में सेवाएं दी हैं।
वे इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट के राजस्थान चैप्टर की एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य भी हैं और वर्ष 1992 से सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य हैं।
घुड़सवारी से लेकर शूटिंग और ग्लाइडिंग तक का शौक
जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी की प्रोफाइल का एक खास पहलू उनकी साहसिक गतिविधियों में रुचि भी है।
वे घुड़सवारी, तैराकी और शूटिंग में रुचि रखते हैं। इसके अलावा वे सोलो ग्लाइडर पायलट और पैरासेलर भी रहे हैं। एनसीसी से जुड़े रहते हुए उन्होंने कई साहसिक गतिविधियों में हिस्सा लिया और उनके पास A, B और C सर्टिफिकेट हैं।
वे विभिन्न राष्ट्रीय सम्मेलनों और टेलीविजन डिबेट्स में भी हिस्सा लेते रहे हैं तथा न्याय प्रशासन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी राय रखते रहे हैं।
छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे
जस्टिस भाटी अपने छात्र जीवन में भी सक्रिय रहे। वे 1990-91 में जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी के स्टूडेंट्स यूनियन के उपाध्यक्ष रहे।
वकालत से लेकर बार नेतृत्व, सरकारी विधिक दायित्व, न्यायिक सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में लंबे अनुभव के बाद अब जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी प्रस्तावित नियुक्ति उनके न्यायिक करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।
राजस्थान हाईकोर्ट से जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट तक
जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी के तबादले और मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति से राजस्थान हाईकोर्ट में भी प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव होगा। उनकी नई जिम्मेदारी ऐसे समय में सामने आ रही है जब राजस्थान हाईकोर्ट के प्रशासनिक ढांचे को लेकर भी लगातार महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ रहे हैं।
अब निगाहें केंद्र सरकार की मंजूरी और नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया पर हैं।
