जोधपुर से उठी आवाज अब प्रदेशभर में तेज; बार एसोसिएशनों ने कहा-न्याय फाइलों की संख्या का लक्ष्य नहीं, निष्पक्षता और गुणवत्ता का विषय है
जयपुर/जोधपुर। राजस्थान की न्यायिक व्यवस्था में पेंडिंग और सूचीबद्ध मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए अपनाई जा रही ‘टार्गेटेड/लिस्टेड फाइल सिस्टम’ व्यवस्था को लेकर अधिवक्ताओं का विरोध अब व्यापक रूप लेता जा रहा है।
जोधपुर और जयपुर के बाद अब प्रदेश के कई जिलों की बार एसोसिएशन ने न्यायिक कार्यों से दूरी बनाते हुए हड़ताल का ऐलान कर दिया है।
राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर और राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन, जोधपुर की ओर से 1 सितंबर 2026 को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए संयुक्त अभ्यावेदन में लिस्टेड/टार्गेटेड मामलों के शीघ्र निस्तारण के दबाव के कारण न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं की न्यायिक कार्यप्रणाली एवं पारित न्यायिक आदेशों की गुणवत्ता पर पड़ रहे संभावित प्रभाव पर गंभीर चिंता जताई गई है।

‘न्याय को टार्गेट नहीं, स्वतंत्रता चाहिए’
बार एसोसिएशन द्वारा भेजे गए प्रतिवेदन में तर्क दिया गया है कि किसी मामले का केवल लंबे समय से लंबित होना उसके तत्काल निस्तारण का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। प्रत्येक मामले में तथ्यों, साक्ष्यों, दस्तावेजों, लागू कानून और न्यायिक पहलुओं पर पर्याप्त विचार आवश्यक है।

बार एसोसिएशनों ने अपने प्रतिवेदन में कहा है कि अलग-अलग मामलों की प्रकृति और जटिलता अलग होती है। ऐसे में केवल निर्धारित संख्या में मामलों के निस्तारण को न्यायिक कार्य की सफलता का आधार बनाना उचित नहीं है।
बार ने जटिल, साक्ष्य-प्रधान और विस्तृत बहस वाले मामलों को केवल लक्ष्य पूरा करने के लिए जल्द निपटाने से न्याय की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई है।
वकीलों पर भी बढ़ रहा पेशेवर दबाव
बार एसोसिएशन के अनुसार टार्गेटेड मामलों की वजह से एक ही दिन में अलग-अलग न्यायालयों में बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई के लिए उपस्थित होना पड़ता है।
इससे अधिवक्ताओं को प्रत्येक मामले के तथ्यों, दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं की पर्याप्त तैयारी तथा प्रभावी बहस के लिए समय नहीं मिल पाता।
अभ्यावेदन में यह भी कहा गया है कि लगातार बढ़ते कार्य-दबाव का असर अधिवक्ताओं के वर्क-लाइफ बैलेंस और पेशेवर जीवन पर पड़ रहा है।
तीन बड़ी मांगों पर जोर
जोधपुर की दोनों प्रमुख हाईकोर्ट बार एसोसिएशनों ने अपनी मांगों में मुख्य रूप से कहा है कि—
टार्गेटेड/लिस्टेड मामलों के शीघ्र निस्तारण से संबंधित जारी दिशा-निर्देशों एवं आदेशों पर पुनर्विचार करने, मामलों की संख्या तय करने के बजाय प्रत्येक न्यायालय की वास्तविक कार्यक्षमता और मामलों की प्रकृति को ध्यान में रखने और जटिल, साक्ष्य-प्रधान और विस्तृत बहस वाले मामलों को केवल लक्ष्य पूरा करने के उद्देश्य से जल्द निपटाने के लिए बाध्य नहीं करने की मांग की है।
इसके साथ ही बार ने अधिवक्ताओं को प्रभावी पैरवी और पर्याप्त तैयारी का अवसर उपलब्ध कराने की मांग करते हुए व्यावहारिक एवं संतुलित व्यवस्था बनाने का अनुरोध किया गया है।
बाड़मेर बार ने भी 6 सितंबर तक न्यायिक कार्य से दूरी का फैसला लिया
जोधपुर बार एसोसिएशन के हड़ताल पर जाने के बाद अब लगातार प्रदेशभर के बार एसोसिएशन भी इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं।
जोधपुर के बाद बाड़मेर बार एसोसिएशन के 1 सितंबर के निर्णय के अनुसार अधिवक्ताओं ने न्यायिक संस्था की स्वतंत्रता, गरिमा और जनविश्वास की रक्षा के मुद्दे पर विचार-विमर्श के बाद 6 सितंबर 2026 तक न्यायिक कार्य से स्वैच्छिक रूप से दूर रहने का निर्णय लिया।
बाड़मेर बार ने अपने प्रस्ताव में संपूर्ण राजस्थान में टार्गेटेड फाइल सिस्टम को तत्काल बंद करने की मांग भी उठाई है।

DRT बार एसोसिएशन जयपुर भी समर्थन में
विरोध का असर अन्य न्यायिक मंचों पर भी दिखाई दे रहा है। DRT Bar Association, Jaipur ने 2 सितंबर 2026 को डेब्ट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल, जयपुर के रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर बताया कि जयपुर एवं राजस्थान की अन्य बार एसोसिएशनों के आह्वान के समर्थन में उसकी कार्यकारिणी ने 2 सितंबर से 5 सितंबर 2026 तक न्यायिक कार्य से अनुपस्थित रहने का सर्वसम्मत निर्णय लिया है।
एसोसिएशन ने इस अवधि में किसी भी पक्ष के खिलाफ प्रतिकूल आदेश पारित नहीं करने का अनुरोध किया है।
जालोर बार का भी विरोध
बुधवार को जालोर जिला बार के अधिवक्ताओं ने भी न्यायिक कार्य का बहिष्कार करते हुए न्यायिक कार्य नहीं किया है।

ब्यावर में न्यायिक कार्य का बहिष्कार
जिला बार एसोसिएशन ब्यावर ने निर्णय लिया है कि 1 सितंबर से 6 सितंबर 2026 तक अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।
बार ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और सम्मान बनाए रखते हुए टार्गेट आधारित निस्तारण को लेकर व्यावहारिक एवं सहकारात्मक निर्णय नहीं होने के कारण यह कदम उठाया गया है।
चित्तौड़गढ़ में 2 से 5 सितंबर तक पूर्ण न्यायिक कार्य बहिष्कार
चित्तौड़गढ़ बार ने भी राजस्थान हाईकोर्ट की प्रस्तावित टार्गेटेड स्कीम के विरोध में बड़ा फैसला लिया है।
संस्थान ने घोषणा की है कि 2 सितंबर से 5 सितंबर 2026 तक न्यायिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। संगठन के अनुसार, पांच वर्ष की अवधि वाले मामलों के निस्तारण के लिए 11 अगस्त 2026 को Phase-VI के तहत जारी आदेश पर अधिवक्ता संगठनों ने पुनर्विचार की मांग की है।

चूरू में टार्गेट मामलों के खिलाफ वकीलों ने सौंपा ज्ञापन
टार्गेट आधारित मामलों के निस्तारण के विरोध में चूरू के अधिवक्ताओं ने जिला एवं सेशन न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपकर योजना पर पुनर्विचार की मांग की।
अधिवक्ताओं का कहना है कि लक्षित मामलों के निस्तारण का दबाव न्यायिक प्रक्रिया और अधिवक्ताओं के कार्य को प्रभावित कर रहा है।

अब सवाल-क्या ‘टार्गेट’ से तय होगा न्याय का पैमाना?
राजस्थान के अधिवक्ताओं की इस मुहिम का मूल सवाल यही है कि क्या न्यायिक कार्य की सफलता को केवल निस्तारित फाइलों की संख्या से मापा जा सकता है?
बार का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया में गति जरूरी है, लेकिन उसके साथ निष्पक्ष सुनवाई, पर्याप्त तैयारी, कानून का समुचित परीक्षण और गुणवत्तापूर्ण निर्णय भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
बाड़मेर बार के प्रस्ताव में भी इसी भावना को रेखांकित करते हुए कहा गया है कि बार और बेंच की गरिमा तभी सुरक्षित रह सकती है जब न्यायिक संस्थान निष्पक्षता, पारदर्शिता, स्वतंत्रता और जनविश्वास के उच्चतम मानकों पर काम करे।
