जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने इनकम टैक्स पेनल्टी से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि महज टैक्स भर देने के बाद पेनल्टी से राहत नहीं मिल सकती।
अगर कम इनकम दिखाने की वजह गलत रिपोर्टिंग है, तो टैक्स जमा करने के बावजूद पेनल्टी से छूट नहीं मिलेगी।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने स्पनवेल सिंटेक्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिका खारिज कर दी।
कंपनी ने विभाग की पेनल्टी कार्रवाई को चुनौती देते हुए Section 270AA के तहत छूट की मांग की थी।
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की डिवीजन बेंच ने कहा कि Section 270AA के तहत पेनल्टी से छूट का फायदा उस मामले में नहीं मिल सकता, जहां कम इनकम दिखाने की वजह गलत रिपोर्टिंग हो।
यानी सिर्फ टैक्स की रकम जमा कर देना इस छूट के लिए पर्याप्त नहीं है।
दरअसल कंपनी ने पेनल्टी से बचने के लिए Section 270AA का सहारा लिया था, लेकिन इनकम टैक्स विभाग ने उसकी अर्जी खारिज कर दी।
कंपनी ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया। अब हाईकोर्ट ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी है।
क्या था मामला?
मामला असेसमेंट ईयर 2018-19 का है। स्पनवेल सिंटेक्स ने अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में कुछ कटौतियों का दावा किया था।
24 फरवरी 2021 को असेसमेंट ऑफिसर ने इन कटौतियों को खारिज कर दिया। इसके बाद कंपनी पर अतिरिक्त टैक्स की मांग बनी।
कंपनी ने यह टैक्स जमा कर दिया। लेकिन इसके बाद इनकम टैक्स विभाग ने Section 270A के तहत पेनल्टी की कार्रवाई शुरू कर दी।
कंपनी ने पेनल्टी से छूट क्यों मांगी?
पेनल्टी की कार्रवाई शुरू होने के बाद कंपनी ने Section 270AA के तहत छूट के लिए आवेदन किया।
कंपनी की दलील थी कि उसने विभाग की ओर से तय टैक्स की रकम जमा कर दी है और असेसमेंट ऑर्डर के खिलाफ अपील भी नहीं की। ऐसे में उसे पेनल्टी से छूट मिलनी चाहिए।
लेकिन विभाग ने 13 जनवरी 2022 को कंपनी की यह अर्जी खारिज कर दी।
इसके बाद 3 फरवरी 2022 को पेनल्टी लगाने का आदेश भी जारी कर दिया गया।
कंपनी ने नोटिस पर भी उठाए सवाल
कंपनी ने हाईकोर्ट में कहा कि पेनल्टी के कारण बताओ नोटिस में यह साफ नहीं किया गया था कि आखिर किस तरह की गलत रिपोर्टिंग के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
कंपनी ने यह भी कहा कि उसे अपनी बात रखने का उचित मौका नहीं दिया गया।
लेकिन हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
सोलर प्लांट के रिकॉर्ड बने अहम
हाईकोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड को देखने के बाद पाया कि असेसमेंट के दौरान कंपनी से उसके सोलर प्लांट से हुई इनकम से जुड़े अकाउंटिंग रिकॉर्ड मांगे गए थे।
लेकिन कंपनी इन रिकॉर्ड को पेश नहीं कर सकी थी। यह बात असेसमेंट ऑर्डर में भी दर्ज थी।
हाईकोर्ट ने माना कि विभाग की आपत्ति और कार्रवाई का आधार रिकॉर्ड में पहले से मौजूद था। इसलिए कंपनी यह नहीं कह सकती कि उसे यह पता नहीं था कि उसके खिलाफ किस आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
Section 270AA में छूट की सीमा क्या है?
इस मामले में सबसे अहम सवाल Section 270AA की छूट का था।
यह नियम कुछ शर्तें पूरी होने पर Section 270A की पेनल्टी से राहत देता है। लेकिन अगर कम इनकम दिखाने की वजह गलत रिपोर्टिंग है, तो इस छूट का फायदा नहीं मिलेगा।
हाईकोर्ट ने इसी आधार पर कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि टैक्स भर देना और पेनल्टी से छूट मिलना एक ही बात नहीं है। टैक्स जमा करने के बाद भी यह देखना जरूरी है कि कम इनकम क्यों दिखाई गई थी।
अगर कम इनकम गलत रिपोर्टिंग की वजह से दिखाई गई है, तो Section 270AA के तहत पेनल्टी से छूट नहीं मिलेगी।
अर्जी पर देरी की दलील भी काम नहीं आई
कंपनी ने यह दलील भी दी कि उसकी Section 270AA की अर्जी पर तय समय में फैसला नहीं लिया गया।
हाईकोर्ट ने इस आधार पर भी राहत देने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने माना कि जब कंपनी इस छूट की हकदार ही नहीं थी, तो सिर्फ अर्जी पर फैसला लेने में हुई देरी के आधार पर उसे Section 270AA का लाभ नहीं दिया जा सकता।
कंपनी की याचिका खारिज
हाईकोर्ट ने स्पनवेल सिंटेक्स प्राइवेट लिमिटेड की रिट याचिका खारिज कर दी।
कंपनी ने टैक्स की मांग जमा करने के बाद Section 270AA के तहत पेनल्टी से छूट मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कम इनकम दिखाने की वजह गलत रिपोर्टिंग थी।
इसलिए कंपनी को इस प्रावधान के तहत पेनल्टी से छूट नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट ने विभाग की ओर से कंपनी की छूट की अर्जी खारिज करने और उसके खिलाफ पेनल्टी की कार्रवाई में दखल देने से भी इनकार कर दिया।
यानी टैक्स जमा कर देने के बावजूद कंपनी की पेनल्टी से राहत की मांग स्वीकार नहीं हुई।
