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नाबालिग पत्नी से संबंध बनाना अपराध! शादी के बावजूद चल सकता है POCSO केस, केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Kerala HC Refuses to Quash POCSO Case Against Man Accused of Sex With Minor Wife

तिरुवनंतपुरम। क्या नाबालिग लड़की से शादी कर लेने के बाद उसके साथ संबंध बनाने पर POCSO का केस खत्म हो जाएगा?

इसका जबाव देते हुए केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगर लड़की की उम्र 18 साल से कम है, तो शादी का दावा करके POCSO के मामले से बचा नहीं जा सकता।

इसी के तहत केरल हाईकोर्ट ने नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध के आरोप से जुड़े मामले में आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया है।

हाईकोर्ट ने 17 साल की लड़की से रेप के आरोपी की याचिका खारिज करते हुए उसके खिलाफ दर्ज POCSO केस रद्द करने से इनकार कर दिया।

आरोपी ने दावा किया था कि लड़की उसकी पत्नी है और दोनों की शादी मुस्लिम रीति-रिवाज से हुई थी। उसने इसी आधार पर अपने खिलाफ दर्ज केस रद्द करने की मांग की थी।

लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि लड़की 18 साल से कम उम्र की थी, इसलिए POCSO के प्रावधान लागू होंगे। नाबालिग से शादी होने का दावा POCSO के तहत कार्रवाई को खत्म नहीं करता।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि शादी हुई थी या नहीं, और अगर हुई थी तो वह वैध थी या नहीं, इसका फैसला ट्रायल के दौरान होगा।

इसी के साथ जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने आरोपी की याचिका खारिज करते हुए एफआईआर, अंतिम रिपोर्ट और आगे की आपराधिक कार्रवाई रद्द करने से इनकार कर दिया।

आरोपी ने दी शादी होने की दलील

ये मामला केरल के मन्नारक्कड़ पुलिस स्टेशन में दर्ज केस से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ 17 साल की लड़की से जबरन संबंध बनाने के आरोप में केस दर्ज किया गया था।

आरोप है कि आरोपी 23 अक्टूबर 2021 को लड़की को अपने घर ले गया। इसके बाद उसी रात और अगले चार दिनों तक उसके साथ जबरन संबंध बनाने का आरोप है।

मामले में आरोपी के माता-पिता पर भी उसकी मदद करने के आरोप लगाए गए थे।

लेकिन आरोपी ने हाईकोर्ट में अलग कहानी रखी। उसका कहना था कि उसने लड़की को भगाया नहीं था, बल्कि दोनों की शादी पहले ही हो चुकी थी।

उसके मुताबिक 23 जुलाई 2021 को दोनों की शादी मुस्लिम रीति-रिवाज से हुई थी। उस समय लड़की की उम्र 17 साल 1 महीने थी। आरोपी का दावा था कि शादी दोनों परिवारों की मौजूदगी में हुई थी।

यही दलील देकर उसने अपने खिलाफ दर्ज केस को रद्द करने की मांग की।

शादी हुई तो POCSO से बच जाएंगे?

यही इस मामले का सबसे अहम सवाल था। आरोपी की दलील थी कि लड़की उसकी पत्नी है, इसलिए उसके साथ संबंध बनाने को अपराध नहीं माना जाना चाहिए।

लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि 18 साल से कम उम्र का हर व्यक्ति कानून की नजर में बच्चा है। इसलिए 17 साल की लड़की से संबंध बनाने के आरोप में POCSO लागू होगा।

आरोपी सिर्फ यह कहकर नहीं बच सकता कि लड़की उसकी पत्नी थी और दोनों की शादी हो चुकी थी।

हाईकोर्ट ने साफ किया कि मुस्लिम रीति-रिवाज से शादी का दावा भी POCSO की कार्रवाई को खत्म नहीं करता।

मुस्लिम पर्सनल लॉ की दलील भी नहीं चली

आरोपी ने कहा था कि लड़की से उसकी शादी मुस्लिम रीति-रिवाज से हुई थी। उसने इसी दलील को अपने बचाव का आधार बनाया।

लेकिन कोर्ट ने कहा कि अभी यह मानने की कोई वजह नहीं है कि शादी कानूनी तौर पर साबित हो चुकी है। शादी के दावे को साबित करने वाला कोई दस्तावेज भी कोर्ट के सामने नहीं था।

इसलिए शादी वास्तव में हुई थी या नहीं और अगर हुई थी तो वह वैध थी या नहीं, इसका फैसला अभी नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि इन सवालों पर ट्रायल के दौरान सबूत देखे जाएंगे।

यानी अभी सिर्फ शादी का दावा करके पूरे आपराधिक केस को इस स्तर पर खत्म नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने FIR, फाइनल रिपोर्ट और आगे की आपराधिक कार्रवाई में लगाए गए आरोपों को देखते हुए इस स्तर पर केस को रद्द करने से इनकार कर दिया।

रेप के आरोप में भी शादी का तर्क खारिज

मामले में आरोपी ने रेप से जुड़ी धारा के तहत चल रही कार्रवाई को भी चुनौती दी थी। उसका तर्क था कि लड़की उसकी पत्नी थी। इसलिए उसके खिलाफ रेप और पॉक्सो की कार्रवाई जारी नहीं रखी जानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने आरोपी की इस दलील को भी नहीं माना।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के इंडिपेंडेंट थॉट बनाम यूनियन ऑफ इंडिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 18 साल से कम उम्र की पत्नी को सिर्फ शादी के आधार पर रेप कानून से बाहर नहीं किया जा सकता।

इसी वजह से हाईकोर्ट ने सिर्फ शादी का हवाला देकर आरोपी को आपराधिक कार्रवाई से राहत देने से इनकार कर दिया।

क्या कहता है POCSO कानून?

इस मामले को समझने के लिए POCSO का सबसे अहम नियम जानना जरूरी है।

POCSO यानी Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012। यह कानून 18 साल से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से बचाने और कानूनी सुरक्षा देने के लिए ही बनाया गया है।

इस कानून में बच्चे की उम्र 18 साल से कम तय की गई है।

कानून में बच्चे की उम्र को लेकर कोई ऐसी छूट नहीं है कि शादी हो जाने के बाद वह POCSO के दायरे से बाहर हो जाएगा।

इसलिए 17 साल की लड़की से जुड़े यौन अपराध के आरोप में POCSO की धाराएं लग सकती हैं।

इस मामले में लड़की की उम्र 17 साल एक महीने बताई गई थी।

इसी वजह से हाईकोर्ट ने आरोपी की यह दलील स्वीकार नहीं की कि शादी के कारण पॉक्सो की कार्रवाई खत्म कर दी जानी चाहिए।

शादी वैध थी या नहीं, ट्रायल में तय होगा

हाईकोर्ट ने इस मामले में एक और बात साफ की। उसने शादी की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी ने शादी होने का दावा किया है, लेकिन उसे साबित करने वाला दस्तावेजी सबूत सामने नहीं है।

इसलिए शादी की वास्तविक स्थिति और उसकी वैधता का फैसला ट्रायल के दौरान ही किया जाएगा।

इसका मतलब यह भी है कि हाईकोर्ट ने अभी यह तय नहीं किया है कि आरोपी दोषी है या नहीं।

हाईकोर्ट ने सिर्फ यह देखा कि इस स्तर पर उसके खिलाफ दर्ज FIR और आपराधिक कार्रवाई को खत्म करने की कोई वजह है या नहीं।

आरोपी की याचिका खारिज

केरल हाईकोर्टजस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने आरोपी की ओर से दाखिल याचिका खारिज कर दी।

हाईकोर्ट ने FIR, अंतिम रिपोर्ट और उसके आधार पर शुरू हुई आगे की आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट ने साफ किया कि शादी की वैधता से जुड़े विवादित सवालों का फैसला ट्रायल कोर्ट में सबूतों के आधार पर किया जाएगा।

यानी इस फैसले स्पष्ट है कि नाबालिग से शादी का दावा POCSO से बचने का रास्ता नहीं बन सकता।

18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध के मामले में केवल नाबालिग से शादी का दावा करके पॉक्सो के तहत चल रही कार्रवाई को शुरुआती स्तर पर खत्म नहीं कराया जा सकता।

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