जयपुर: राजस्थान में निकाय चुनाव से ठीक पहले नागौर SP की कुर्सी को लेकर उठा विवाद अब राजस्थान हाईकोर्ट से निकलकर चुनाव आयोग की चौखट पर पहुंच गया है।
हाईकोर्ट ने मामले में सीधे SP की नियुक्ति पर कोई आदेश देने के बजाय राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) को अपनी मांग और आपत्तियां चुनाव आयोग के सामने रखने को कहा है।
अब आयोग इस अभ्यावेदन पर विचार कर उचित फैसला लेगा।
दरअसल, नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने नियमित SP की नियुक्ति की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था।
नागौर में SP का पद खाली होने और चुनाव से ठीक पहले ASP को SP का अतिरिक्त चार्ज दिए जाने पर पार्टी ने सवाल उठाया था।
RLP का कहना था कि चुनाव के दौरान जिले की पुलिस व्यवस्था बेहद अहम होती है। ऐसे में SP जैसे अहम पद पर नियमित नियुक्ति होनी चाहिए और पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
RLP ने चुनाव के दौरान इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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हाईकोर्ट का RLP को आदेश
इस मामले पर 2 सितंबर को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने RLP की याचिका को निस्तारित कर दिया, लेकिन नागौर में SP की नियुक्ति को लेकर खुद कोई सीधा आदेश नहीं दिया।
हाईकोर्ट ने RLP को निर्देश दिया कि वह अपनी मांग और आपत्तियों को लेकर चुनाव आयोग के सामने अभ्यावेदन दे। इसके बाद चुनाव आयोग को उस अभ्यावेदन पर विचार कर उचित फैसला लेना होगा।
यानी हाईकोर्ट ने यह नहीं कहा कि ASP को दिया गया SP का अतिरिक्त चार्ज गलत है या तुरंत नियमित SP की नियुक्ति की जाए।
हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को चुनाव आयोग के सामने रखने का रास्ता दिया है।
अब RLP अपनी मांग आयोग के सामने रखेगी और नागौर में चुनाव के दौरान पुलिस प्रशासन की व्यवस्था को लेकर अगला फैसला चुनाव आयोग करेगा।
क्या है नागौर SP विवाद?
नागौर के तत्कालीन SP रोशन मीणा के ट्रांसफर के बाद जिले में SP का पद खाली हो गया था। इसी बीच राज्य में नगर निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही थी।
इसके बाद कार्मिक विभाग ने 19 अगस्त 2026 को ASP को नागौर SP का अतिरिक्त चार्ज दे दिया गया।
RLP ने इसी व्यवस्था को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए नियमित SP की नियुक्ति की मांग की।
पार्टी का कहना था कि जिले में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए जिले में नियमित SP की नियुक्ति होनी चाहिए। ऐसे चुनावी समय में ASP को SP का अतिरिक्त चार्ज देना उचित नहीं है।
ASP को अतिरिक्त चार्ज देने पर आपत्ति
RLP का कहना है कि चुनाव के दौरान जिले में पुलिस प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे समय में SP का पद खाली रहना और किसी ASP को अतिरिक्त जिम्मेदारी देना सवाल खड़े करता है।
पार्टी ने अपनी याचिका में नियमित SP की नियुक्ति के साथ-साथ चुनाव के दौरान पुलिस प्रशासन को निष्पक्ष तरीके से काम करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की थी।
RLP की ओर से यह भी आशंका जताई गई थी कि चुनावी माहौल में पुलिस कार्रवाई किसी एक दल या उम्मीदवार के पक्ष में नहीं होनी चाहिए। सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।
अब चुनाव आयोग के फैसले पर नजर
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब अगला कदम RLP की ओर से उठाया जाएगा। पार्टी अपनी मांग और आपत्तियों को चुनाव आयोग के सामने रखेगी।
इसके बाद आयोग यह देखेगा कि RLP की ओर से उठाए गए मुद्दों पर क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।
खास तौर पर नागौर में SP की मौजूदा व्यवस्था और चुनाव के दौरान पुलिस प्रशासन की भूमिका को लेकर फैसला आयोग के स्तर पर होगा।
यानी अब निगाह इस बात पर है कि RLP के अभ्यावेदन पर चुनाव आयोग क्या फैसला लेता है।
फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट ने यह तय नहीं किया है कि ASP को SP का अतिरिक्त चार्ज देना गलत है या नागौर में नियमित SP की नियुक्ति अनिवार्य रूप से की जाए।
