जोधपुर। जिले के डेरिया क्षेत्र में बनाए गए दो नए राजस्व गांव ‘रेवत सिंह नगर’ और ‘देवजी नगर डेरिया’ के नामों को लेकर आपत्ति सामने आई, जिसके बाद अब फिर से इन गांवों के नामों की समीक्षा की जाएगी।
राजस्थान हाईकोर्ट ने दोनों नए राजस्व गांवों के नाम को लेकर दायर अपीलों पर फैसला सुनाते हुए ‘रेवत सिंह नगर’ और ‘देवजी नगर डेरिया’ के नामों की दोबारा समीक्षा के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने जोधपुर जिला कलेक्टर को 8 हफ्ते का समया दिया है और तय समय में संबंधित रिकॉर्ड की जांच करने और प्रभावित पक्षों को सुनने के बाद कारण बताते का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने माना कि 2009 की नीति के तहत किसी व्यक्ति के नाम पर राजस्व गांव का नाम नहीं रखा जा सकता।
हालांकि हाईकोर्ट ने दोनों गांवों का गठन रद्द नहीं किया है। गांवों की सीमाएं और उनका प्रशासनिक दर्जा भी बरकरार रहेगा। सिर्फ नामों की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया गया है।
हाईकोर्ट का कहना है कि किसी राजस्व गांव का नाम तय करने के लिए वही सरकारी नियम देखे जाएंगे, जो उस समय लागू थे जब गांव को अधिसूचित किया गया था।
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की डिवीजन बेंच ने डाला राम और राणा राम की अपीलों पर यह आदेश दिया। दोनों ने जोधपुर के डेरिया क्षेत्र में बनाए गए दो नए राजस्व गांवों के नामों को चुनौती दी थी।
‘रेवत सिंह नगर’ का नाम 2009 की नीति के खिलाफ माना
हाईकोर्ट ने पाया कि ‘रेवत सिंह नगर’ को 28 नवंबर 2024 को राजस्व गांव के तौर पर अधिसूचित किया गया था। उस समय 2009 की सरकारी नीति लागू थी।
इस नीति में राजस्व गांव का नाम किसी खास व्यक्ति के नाम पर रखने की अनुमति नहीं थी।
हाईकोर्ट के सामने यह बात आई कि ‘रेवत सिंह नगर’ का नाम श्री रेवत सिंह के नाम पर रखा गया था।
इसी वजह से कोर्ट ने कहा कि ‘रेवत सिंह नगर’ नाम 2009 की नीति के तहत नहीं रखा जा सकता। अब कलेक्टर को नियमों के मुताबिक इस नाम की दोबारा समीक्षा करनी होगी।
यानी गांव का गठन अपने आप में गलत नहीं माना गया, लेकिन उसके नाम को लेकर उस समय लागू नियमों का पालन नहीं हुआ। इसलिए सिर्फ नाम की समीक्षा का निर्देश दिया गया है।
‘देवजी नगर डेरिया’ के लिए बदली नीति लागू होगी
दूसरे गांव ‘देवजी नगर डेरिया’ को 26 मार्च 2025 को राजस्व गांव का दर्जा दिया गया था। इसलिए इसके नाम की जांच उस समय लागू संशोधित सरकारी नीति के मुताबिक की जाएगी।
हाईकोर्ट ने कलेक्टर को यह जांचने को कहा है कि ‘देवजी नगर डेरिया’ नाम का इस्तेमाल स्थानीय लोग पहले से करते आ रहे थे या यह नाम स्थानीय लोगों की भावना से जुड़ा हुआ है।
साथ ही यह भी देखना होगा कि नाम रखने की तय प्रक्रिया का सही तरीके से पालन किया गया था या नहीं।
यानी दोनों गांवों के नामों पर एक ही नियम लागू नहीं होगा। हर गांव के नाम की जांच उस समय लागू नीति के आधार पर होगी, जब उसे राजस्व गांव के रूप में अधिसूचित किया गया था।
गांव का गठन और सीमाएं रहेंगी बरकरार
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में दोनों राजस्व गांवों के गठन को खत्म नहीं किया है। उनकी सीमाएं और प्रशासनिक स्थिति भी पहले की तरह बनी रहेगी।
इसका मतलब है कि विवाद फिलहाल सिर्फ नाम को लेकर है।
प्रशासनिक कामकाज के लिए मौजूदा नामों का इस्तेमाल जारी रह सकता है, जब तक कलेक्टर अपनी समीक्षा पूरी नहीं कर लेते।
हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था इसलिए रखी है ताकि नाम को लेकर चल रही प्रक्रिया के दौरान गांवों के प्रशासनिक कामकाज पर असर न पड़े।
‘Res Judicata’ की दलील भी खारिज की
मामले की सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई कि इसी मुद्दे से जुड़ी याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं। इसलिए अब इन अपीलों पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए।
इस दलील को कानूनी भाषा में ‘Res Judicata’ कहा जाता है। इसका मतलब है कि किसी मामले पर पहले फैसला हो चुका हो, तो उसी मुद्दे को दोबारा नहीं उठाया जा सकता।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि जिन रिट याचिकाओं के खारिज होने का हवाला दिया गया, उनके खिलाफ ये अपीलें पहले ही दाखिल की जा चुकी थीं।
इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि अपीलों में उसी मामले को बाद में दोबारा उठाया गया है।
अब 8 हफ्ते में तय होगा दोनों गांवों का नाम
डिवीजन बेंच ने मामले को जिला कलेक्टर, जोधपुर के पास वापस भेज दिया है।
हाईकोर्ट ने जोधपुर के जिला कलेक्टर को दोनों गांवों के नाम से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड की जांच करने का निर्देश दिया है।
यानी अब कलेक्टर को अलग-अलग समय पर लागू रही सरकारी नीतियों को ध्यान में रखते हुए दोनों गांवों के नाम की समीक्षा करनी होगी।
साथ ही कलेक्टर को इस मामले से जुड़े सभी प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने का मौका देना होगा। इसके बाद सभी पक्षों की बात और रिकॉर्ड देखने के बाद कारण बताते हुए फैसला लेना होगा।
हाईकोर्ट ने इसके लिए 8 हफ्ते की समय सीमा तय की है। यानी कलेक्टर को तय समय के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी करके अपना फैसला देना होगा।
हाईकोर्ट ने गांवों का अस्तित्व बरकरार रखते हुए सिर्फ नामों पर दोबारा फैसला लेने का रास्ता खोला है।
अब अंतिम फैसलै जिला कलेक्टर की 8 हफ्ते के भीतर होने वाली समीक्षा के बाद सामने आएगा।
नाम बदलने तक मौजूदा नाम से पहचान जारी
हाईकोर्ट ने दोनों अपीलों को आंशिक रूप से मंजूर करते हुए नामों की समीक्षा का निर्देश दिया है। हालांकि, इससे गांवों का गठन, उनकी सीमाएं और प्रशासनिक स्थिति नहीं बदलेगी।
जब तक कलेक्टर इस प्रक्रिया को पूरा करके नया फैसला नहीं लेते, तब तक मौजूदा नामों का इस्तेमाल प्रशासनिक पहचान के लिए किया जा सकता है।
इस फैसले से साफ है कि राजस्व गांव का नाम तय करना सिर्फ स्थानीय पसंद का मामला नहीं है। नामकरण के समय लागू सरकारी नीति और तय प्रक्रिया का पालन भी जरूरी है।
अब कलेक्टर की समीक्षा के बाद तय होगा कि दोनों नाम मौजूदा नियमों के तहत कायम रहेंगे या इनमें बदलाव करना पड़ेगा।