नई दिल्ली। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में डंपर से कुचलकर वन रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
अवैध खनन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने घटना का संज्ञान लेते हुए राजस्थान सरकार से मामले में जवाब तलब किया हैं.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले को गंभीर और तत्काल सुनवाई योग्य मानते हुए 6 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की।
सीनियर एडवोकेट निखिल गोयल ने सुनवाई के दौरान घटना का जानकारी दी.
एडवोकेट गोयल नेशनल चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान मामले में एमिकस क्यूरी के रूप में अदालत की सहायता कर रहे हैं।
डंपर रोकने की कोशिश में वन रेंजर को कुचलने का आरोप
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बताया गया कि 21 सितंबर की देर रात प्रतापगढ़ के छोटी सादड़ी क्षेत्र में वन रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत ने एक डंपर को रोकने का प्रयास किया था।
आरोप है कि इसी दौरान डंपर ने उन्हें और उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी और उन्हें घसीटते हुए ले गया, जिससे उनकी मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार, घटनास्थल के पास एक तालाब के निकट JCB मशीन से कथित रूप से अवैध रूप से मिट्टी की खुदाई की जा रही थी।
इसी दौरान वन रेंजर द्वारा वाहन को रोकने का प्रयास किए जाने की बात सामने आई है।
सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया मामला
सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट निखिल गोयल ने जब इस मामले की जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दी। उन्होंने पीठ को बताया कि घटना से संबंधित समाचार रिपोर्ट की प्रति राजस्थान के अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा को पहले ही उपलब्ध करा दी गई है।
राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने अदालत को बताया कि यह घटना नेशनल चंबल घड़ियाल अभयारण्य से संबंधित नहीं है और न ही यह अवैध रेत खनन का मामला है।
‘ऐसे मामलों में भी प्रिवेंटिव डिटेंशन का इस्तेमाल हो’
घटना पर गंभीर रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि ऐसी घटनाओं में भी प्रिवेंटिव डिटेंशन (निवारक निरोध) का इस्तेमाल किया जाना चाहिए और यह कार्रवाई राज्य में कहीं भी ऐसे मामलों में की जानी चाहिए।
पीठ ने राजस्थान सरकार को मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और सुनवाई के लिए 6 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की।
सुनवाई के दौरान DGP से कि बात
बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) से बात की.
जिसके बाद उन्होने कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया कि घटना के संबंध में कार्रवाई की गई है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि इस मामले में विस्तृत Action Taken Report (ATR) दाखिल की जाएगी।
अवैध रेत खनन मामले में पहले से चल रही है सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
यह घटनाक्रम उस स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन को लेकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित संबंधित राज्यों को कई निर्देश जारी किए हैं।
इन निर्देशों में अवैध खनन पर निगरानी मजबूत करने, चेकपोस्ट और निगरानी व्यवस्था प्रभावी करने, अवैध खनन से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ अभियोजन कार्रवाई करने तथा फ्रंटलाइन वन अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई 2026 के आदेश में संगठित अवैध रेत खनन के पीछे मौजूद कथित किंगपिन और आदतन अपराधियों के खिलाफ प्रिवेंटिव डिटेंशन के प्रावधान पर भी राज्यों को विचार करने के निर्देश दिए थे।
वन अधिकारियों की सुरक्षा पर फिर उठा बड़ा सवाल
प्रतापगढ़ की घटना के बाद अवैध खनन और वन क्षेत्र में कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने प्रमुखता से आया है।
अदालत ने घटना को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अब 6 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में राजस्थान सरकार की ओर से विस्तृत जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखी जाएगी।
