जयपुर। राजस्थान की सुपरवाइजर (वुमन एम्पावरमेंट) डायरेक्ट रिक्रूटमेंट परीक्षा 2018 के पेपर लीक केस में राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आरोपी अलका को अग्रिम जमानत दे दी है।
हाईकोर्ट ने पाया कि एफआईआर में उनका नाम नहीं है, गवाहों ने उनकी कोई खास भूमिका नहीं बताई और जांच में दाखिल दो चार्जशीट में भी उनका नाम नहीं आया है।
जस्टिस फरजंद अली ने कहा कि सिर्फ एक व्यक्ति के बयान के आधार पर दूसरे और फिर तीसरे व्यक्ति का नाम सामने आने से किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। गिरफ्तारी के लिए इससे आगे ठोस सबूत होना जरूरी है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने साफ किया कि अग्रिम जमानत मिलने का मतलब जांच पर रोक नहीं है। जांच एजेंसी उपलब्ध सामग्री के आधार पर अपनी जांच जारी रख सकती है।
बीकानेर के श्री रामसहाय आदर्श स्कूल के परीक्षा केंद्र से हुआ था पेपल लीक
यह मामला राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड की सुपरवाइजर (वुमन एम्पावरमेंट) डायरेक्ट रिक्रूटमेंट परीक्षा 2018 से जुड़ा है। इस भर्ती में 180 पद थे और परीक्षा 2019 में हुई थी।
एफआईआर के मुताबिक, जांच में ऐसे गिरोह की जानकारी सामने आई, जो परीक्षा का पेपर पहले हासिल करके अभ्यर्थियों तक पहुंचाने और ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल कराने में शामिल था।
आरोप है कि बीकानेर के श्री रामसहाय आदर्श सेकेंडरी स्कूल में बने परीक्षा केंद्र से परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र बाहर निकाला गया। इसके बाद प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर व्हाट्सऐप के जरिए दूसरे लोगों तक भेजी गई।
प्रश्नपत्र हल कराने के बाद उसके जवाब ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए परीक्षा दे रहे कुछ अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए। पुलिस का आरोप है कि इस तरीके से कुछ अभ्यर्थियों को गलत फायदा मिला।
मामले में 2024 में दर्ज हुई थी FIR
इस मामले में IPC की धारा 419, 420 और 120-B के साथ राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम और IT एक्ट की धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल और सूचना प्रौद्योगिकी कानून से जुड़ी धाराएं लगाई गई थीं।
अलका को इस मामले में गिरफ्तारी की आशंका थी। उन्होंने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर कर कहा कि उनके खिलाफ आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है और उनकी गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है।
वहीं, सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध किया गया। उनका कहना था कि जांच में सामने आई बातों के आधार पर अलका को मामले से जोड़कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
FIR और गवाहों के बयानों में महिला का नाम नहीं था
हाईकोर्ट ने उस कड़ी पर भी गौर किया, जिसके आधार पर बाद में अलका को मामले से जोड़ने की कोशिश की गई। कोर्ट ने पाया कि एफआईआर में अलका का नाम नहीं है।
जांच के दौरान किसी गवाह ने भी अलका की कोई खास भूमिका या पेपर लीक में उनकी सीधी संलिप्तता नहीं बताई। कोर्ट ने यह भी देखा कि मामले में अलग-अलग आरोपियों के खिलाफ दो चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं।
पहली चार्जशीट 25 सितंबर 2025 और दूसरी 25 सितंबर 2026 को दाखिल हुई, लेकिन दोनों में अलका का नाम आरोपी या गवाह के तौर पर नहीं है।
एक के बयान से दूसरे तक पहुंची थी जांच
हाईकोर्ट पाया कि अलका का नाम सीधे किसी सबूत या एफआईआर से सामने नहीं आया था। जांच के दौरान एक व्यक्ति के बयान में दूसरे व्यक्ति का नाम आया और फिर उसी कड़ी में आगे किसी तीसरे व्यक्ति का नाम सामने आया।
हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस तरह एक व्यक्ति के बयान से दूसरे और फिर तीसरे व्यक्ति तक पहुंचने की कड़ी को गिरफ्तारी का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता। खासकर तब, जब एफआईआर में अलका का नाम नहीं है, गवाहों ने उनकी कोई खास भूमिका नहीं बताई है और दो चार्जशीट में भी उनका नाम नहीं आया है।
हाईकोर्ट ने कहा-बाद में आरोपी बनाने के लिए ठोस सबूत जरूरी
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को सिर्फ इस आधार पर गिरफ्तार नहीं किया जा सकता कि जांच के दौरान उसका नाम सामने आया है और जांच एजेंसी उसे आरोपी मान रही है। गिरफ्तारी के लिए उसके खिलाफ अपराध से जुड़ी ठोस सबूत होना जरूरी है।
हाईकोर्ट ने इस मामले के समयक्रम को भी ध्यान में रखा। भर्ती 2018 की थी, परीक्षा 2019 में हुई और एफआईआर 2024 में दर्ज की गई। इसके बाद जांच हुई और दूसरे आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल हो गई, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अलका का नाम सामने नहीं आया।
बाद में उन्हें केस से जोड़ने के लिए सिर्फ बयानों की यह कड़ी पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के लिए उनके खिलाफ अपराध से जुड़ी अलग और ठोस सामग्री होना जरूरी है।
हाईकोर्ट ने दी महिला को दी अग्रिम जमानत
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने अलका को अग्रिम जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस आधार सामने नहीं है, जिससे उनकी गिरफ्तारी जरूरी साबित हो।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जांच अपनी प्रक्रिया के अनुसार जारी रह सकती है। आदेश में की गई टिप्पणियां ट्रायल के दौरान मामले की मेरिट पर असर नहीं डालेंगी।
अग्रिम जमानत के तहत अलका को जरूरत पड़ने पर पुलिस की पूछताछ में उपलब्ध रहना होगा। उन्हें केस से जुड़े किसी व्यक्ति को प्रभावित करने, धमकाने या लालच देने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, कोर्ट की अनुमति के बिना वे भारत से बाहर नहीं जा सकेंगी।