नई दिल्ली। अब ट्रैफिक चालान भरने से बचना भारी पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने बकाया चालानों की वसूली के लिए ऐसा सुझाव दिया है, जिसके तहत चालान की रकम को बिजली बिल से जोड़ने पर विचार किया जा सकता है।
यानी अगर यह तरीका लागू होता है तो चालान नहीं भरने का असर सिर्फ गाड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आपके घर के बिजली बिल तक पहुंच सकता है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच के सामने बताया गया कि देशभर में करीब 45 हजार करोड़ रुपये के ई-चालान जारी हुए हैं, जिनमें से करीब 25 हजार करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। करीब 20 हजार करोड़ रुपये अब भी बाकी हैं।
इसी पर कोर्ट ने कहा कि सिर्फ हजारों-लाखों चालान जारी कर देना काफी नहीं है, अब ऐसी व्यवस्था बनाने की जरूरत है, जिससे बकाया जुर्माने की रकम वास्तव में वसूली जा सके। कोर्ट ने सुझाव दिया कि बकाया चालान की रकम को बिजली बिल से जोड़कर वसूली का रास्ता तलाशा जा सकता है।
यानी भविष्य में ट्रैफिक चालान सिर्फ गाड़ी के कागजों या लाइसेंस तक सीमित मामला न रहकर आपके घर के बिजली बिल से भी जुड़ सकता है।
हालांकि, यह अभी कोई लागू नियम नहीं है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इसे बकाया चालान की वसूली के एक संभावित तरीके के तौर पर सुझाया है।
देशभर में 20 हजार करोड़ की रकम अब भी बाकी
सुप्रीम कोर्ट में सड़क सुरक्षा से जुड़े वर्ष 2012 के मामले की सुनवाई के दौरान ई-चालान की वसूली का मुद्दा सामने आया। कोर्ट को बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को करीब 45 हजार करोड़ रुपये के ई-चालान की रकम वसूलनी है।
इनमें से करीब 25 हजार करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है, जबकि करीब 20 हजार करोड़ रुपये अभी बाकी हैं। कोर्ट ने इसी अंतर पर चिंता जताते हुए कहा कि हजारों और लाखों चालान जारी करने से बात पूरी नहीं होती। असली सवाल यह है कि लगाए गए जुर्माने की रकम वसूल कैसे होगी।
किन राज्यों में कितना बकाया?
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2021 से 30 जुलाई 2026 तक अलग-अलग राज्यों में ई-चालान की बकाया रकम भी सामने आई है। इसमें-
| राज्य | बकाया रकम |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 11,331.55 करोड़ रुपये |
| दिल्ली | 11,076.09 करोड़ रुपये |
| हरियाणा | 2,620.53 करोड़ रुपये |
| राजस्थान | 2,066.92 करोड़ रुपये |
| गुजरात | 1,607.64 करोड़ रुपये |
| महाराष्ट्र | 1,252.73 करोड़ रुपये |
| मध्य प्रदेश | 262.38 करोड़ रुपये |
सुप्रीम कोर्ट ने चालान को बिजली बिल से जोड़ने का सुझाव दिया
सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला ने सुझाव दिया कि अगर कोई व्यक्ति ट्रैफिक चालान नहीं भरता है तो उसकी बकाया रकम को बिजली के बकाया बिल से जोड़ने का तरीका देखा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का तर्क था कि बिजली बिल का भुगतान नहीं करने पर कनेक्शन कटने की स्थिति बन सकती है। इसलिए बकाया चालान की रकम को बिजली बिल से जोड़ने से लोग जुर्माना भरने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
लेकिन यह अभी कोई नया लागू नियम नहीं है। कोर्ट ने सरकार और संबंधित अधिकारियों के सामने इसे एक संभावित उपाय के तौर पर रखा है।
गाड़ी के कागजों पर भी लग सकती है रोक
सुप्रीम कोर्ट ने बकाया चालान की वसूली के लिए कई दूसरे तरीकों पर भी विचार किया। कोर्ट ने कहा कि जिन वाहनों के चालान बाकी हैं, उनके रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण को रोकने का तरीका देखा जा सकता है।
ऐसे वाहनों के डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र जारी करने और वाहन का मालिकाना हक दूसरे व्यक्ति के नाम करने पर भी रोक लगाने पर विचार किया जा सकता है।
यानी जब तक पुराने चालान का भुगतान नहीं होता, तब तक वाहन से जुड़े जरूरी काम रोकने का विकल्प इस्तेमाल किया जा सकता है।
फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र भी रुक सकते हैं
सुप्रीम कोर्ट ने वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र को भी बकाया चालान से जोड़ने का सुझाव दिया। यानी जिस वाहन पर चालान बाकी हैं, उसके फिटनेस प्रमाणपत्र को तब तक जारी नहीं करने पर विचार किया जा सकता है, जब तक बकाया रकम जमा नहीं हो जाती।
इसी तरह प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र यानी पीयूसी जारी करने पर भी रोक लगाने का सुझाव दिया गया। ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण को रोकने और पहले से जारी लाइसेंस को निलंबित करने जैसे विकल्पों पर भी कोर्ट ने विचार किया।
परिवहन पोर्टल पर वाहन को ब्लैकलिस्ट करने का सुझाव दिया
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि बकाया चालान वाले वाहनों को परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने का तरीका देखा जा सकता है। इसके अलावा वाहन के मालिकाना हक में बदलाव पर भी रोक लगाई जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ ऑनलाइन चालान काटने से काम नहीं चलेगा। जमीन पर भी जांच होनी चाहिए। इसके लिए वाहनों की अचानक जांच की जा सकती है। अगर जांच में किसी वाहन पर बकाया ई-चालान मिलता है और उसका भुगतान नहीं हुआ है, तो जरूरत पड़ने पर वाहन को जब्त करने जैसे कदम पर भी विचार किया जा सकता है।
‘सिर्फ चालान काटना काफी नहीं, वसूली भी जरूरी’
सुप्रीम कोर्ट की बात का सीधा मतलब है कि चालान काटने के बाद उसका पैसा भी वसूल होना चाहिए। कोर्ट ने अधिकारियों से कहा है कि ऐसा तरीका निकाला जाए, जिससे लंबे समय से बाकी चालानों की रकम भी आसानी से वसूली जा सके।
इसी दौरान बिजली बिल में बकाया चालान की रकम जोड़ने का सुझाव सामने आया। इसके अलावा गाड़ी के जरूरी कागजों का काम रोकने, ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक लगाने, पीयूसी और फिटनेस प्रमाणपत्र जारी नहीं करने जैसे तरीकों पर भी विचार किया गया।
हालांकि, अभी इनमें से कोई नया नियम लागू नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इन तरीकों पर सुझाव और विचार के तौर पर चर्चा की है। आगे इन्हें लागू करने का फैसला संबंधित सरकार और विभागों को करना होगा।