टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

राजस्थान हाईकोर्ट का 76 वां स्थापना दिवस आज, जानिए कैसे हुआ था राजस्थान हाईकोर्ट का गठन

जोधपुर, 29 अगस्त।

15 अगस्त 1947 को देश आजाद होने के बावजूद 20 रियासतों के राजपुताना और ब्रिटिश राज सहित मत्स्य राज्य को एक करने के प्रयास किए जा रहे थे। सरदार पटेल के प्रयासों से 30 मार्च 1949 को राजस्थान राज्य की स्थापना हुई, लेकिन मत्स्य राज्य 15 मई 1949 को शामिल हुआ। इसके साथ ही जयपुर को राजनीतिक राजधानी तथा जोधपुर को न्यायिक राजधानी बनाने की घोषणा की गई.

उदयपुर के महाराणा को महाराज प्रमुख तथा जयपुर के राजा सवाई मानसिंह को राजप्रमुख घोषित किया गया। राज्यो के बीच किये गये इस पहचान के समझौते के चलते जयपुर में स्थापित हाईकोर्ट को जोधपुर में स्थापित किया गया.

एकीकृत हाईकोर्ट से पूर्व थे 5 हाईकोर्ट

राजस्थान में न्याय के सर्वोच्च मंदिर राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना के आज 76 वर्ष पूर्ण हो गये है. आज ही के दिन 29 अगस्त 1949 को तत्कालिन राजप्रमुख सवाई मानसिंह द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना कि गयी थी.

राजस्थान हाईकोर्ट कि स्थापना के साथ ही 29 अगस्त 1949 को ही मुख्य न्यायाधीश कमलकांत वर्मा सहित कुल 12 जजो को जोधपुर में जज के रूप में शपथ दिलायी गयी. जस्टिस कमलकांत वर्मा इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस थे

राजस्थान में एकीकृत हाईकोर्ट से पूर्व राज्य में कुल 5 हाईकोर्ट कार्यरत थे. जिनमें जोधपुर, जयपुर, बीकानेर, पूर्व राजस्थान और मत्स्य संघ हाईकोर्ट शामिल थे.

आजादी के बाद जब राजस्थान राज्य का पुर्नगठन हुआ तो रियासतों में बटे हाईकोर्ट को भी एकीकृत कर दिया गया.यू तो राजस्थान का पहला हाईकोर्ट 1948 में उदयपुर में बना था…जिसमें 5 जज सुनवाई करते थे..

30 मार्च 1949 को वृहद राजस्थान के अस्तित्व में आने के साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट का भी पुर्नगठन किया गया.

सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश

राजस्थान के पूर्ण एकीकरण के बाद राजस्थान हाईकोर्ट को जयपुर से जोधपुर सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर स्थानान्तरित किया गया था.

राजस्थान हाईकोर्ट अध्यादेश 1949 के जरिए राजस्थान हाईकोर्ट के एकीकृत रूप की स्थापना कि गयी. इस आध्यादेश के जरिए दूसरे सभी हाईकोर्ट समाप्त कर दिए गए.

जोधपुर को न्यायिक राजधानी बनाते हुए 29 अगस्त 1949 को हाईकोर्ट की स्थापना कि गयी.इलाहाबाद हाईकोर्ट से रिटायर्ड हो चुके और उदयपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कमलकांत वर्मा को ही मुख्य न्यायाधीश बनाया गया.

26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने और योग्यता अनुसार उम्र ज्यादा होने के चलते जस्टिस वर्मा को मुख्य न्यायाधीश के पद से हटा दिया गया.

मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 12 जज थे हाईकोर्ट में, दो बार ली शपथ

राजस्थान हाईकोर्ट कि स्थापना के समय समाप्त किए गए अन्य हाईकोर्ट के जजों में से कुल 12 जजों को नवगठित हाईकोर्ट में नियुक्त किया गया.

तत्कालिन राजप्रमुख सवाई मानसिंह ने ही इन सभी जजों को शपथ दिलाई गयी.

गौरतलब है कि 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने पर मुख्य न्यायाधीश वर्मा सहित सभी जजों को एक बार फिर से संविधान के अनुसार जज के पद की शपथ दिलाई गयी थी.

लेकिन कुछ दिन बाद ही जस्टिस वर्मा को मुख्य न्यायाधीश पद से हटा दिया गया.

राजस्थान हाईकोर्ट के पहले जज

राजप्रमुख सवाई मानसिंह ने 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच का उद्घाटन किया और इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज कमलकांत वर्मा को मुख्य न्यायाधीश की शपथ दिलाई गई.

राजस्थान हाईकोर्ट में अन्य रियासतों को प्रतिनिधित्व देते हुए जोधपुर के नवल किशोर व अमरसिंह जसोल, जयपुर के केएल बाफना व इब्राहिम,उदयपुर के जेएस राणावत और सार्दुलसिंह मेहता, बूंदी के डीएस दवे, बीकानेर के त्रिलोक दत्त, अलवर के आनंद नारायण कौल, भरतपुर के केके शर्मा और कोटा के खेमचंद गुप्ता को हाईकोर्ट जज की शपथ दिलाई गई।

नहीं होते थे रजिस्ट्रार के पद

शुरूआत में राजस्थान हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार जनरल सहित कई पद नहीं होते था. क्योंकि उस समय जिस दिन केस दर्ज होता था जज उसी दिन उस मामले की सुनवाई शुरू कर देते थे जरूरत के अनुसार ये बाद में सृजित किया गया था.

सबसे रोचक बात ये भी है कि राजस्थान हाईकोर्ट के प्रथम जजों में से अधिकांश विधि स्नातक भी नहीं थे.

जोधपुर मुख्यपीठ और तीन बैंच

1949 से लेकर 1952 तक जोधपुर में हाईकोर्ट की मुख्यपीठ के साथ साथ जयपुर, उदयपुर और कोटा में बैंच कार्यरत थी.धीरे धीरे कोटा, उदयपुर की बैंच को समाप्त कर दिया गया.

1958 में तत्कालिन चीफ जस्टिस के एन वांचू ने जयपुर बैंच को भी समाप्त कर दिया. और इस तरह 31 जनवरी 1977 तक जोधपुर में ही राजस्थान हाईकोर्ट रहा.लंबे समय तक चले संघर्ष के बाद आखिकार 1977 में जयपुर बैंच को फिर से स्थापित किया गया…

राजस्थान हाईकोर्ट के साथ जुड़े है कई संयोग भी

राजस्थान हाईकोर्ट कि स्थापना से लेकर अब तक एक बड़ा संयोग रहा कि हाईकोर्ट में कभी भी स्वीकृत पदों पर पूर्ण नियुक्ति नहीं कि गयी.

शुरूआत में राजस्थान हाईकोर्ट के जजों को 1500 से लेकर 2000 रूपए तक वेतन के रूप में मिलते थे.

बाद में 1956 में पहली बार हाईकोर्ट के जजों का वेतन बढाकर 2 हजार से 3500 रूपये किया गया.

वर्तमान में राजस्थान हाईकोर्ट जजों का वेतन 2 लाख रूपये हैं.

एक बेहतरीन इतिहास

अब तक राजस्थान हाईकोर्ट के कुल 43 मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हो चुके है जस्टिस के आर श्रीराम हाल ही में 43 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली हैं.

राजस्थान हाईकोर्ट में अब तक कुल 200 जजों की नियुक्ति हो चुकी हैं.

वही राजस्थान हाईकोर्ट के 14 मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त हो चुके हैं. वही मूल राजस्थान हाईकोर्ट के कुल 15 जज सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त हो चुके हैं.

वर्तमान में जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय विश्नोई सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त हैं.

सबसे अधिक लोकप्रिय