IOCL ने पेट्रोल-डीजल टैंकर को 2 साल के लिए किया था ब्लैकलिस्ट, राजस्थान हाईकोर्ट ने कार्रवाई में दखल से किया इनकार; बामनिया ऑटोमोबाइल्स की याचिका खारिज
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) की ओर से बामनिया ऑटोमोबाइल्स के पेट्रोल-डीजल टैंकर और उसके क्रू को 2 साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने के मामले में अहम आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने बामनिया ऑटोमोबाइल्स की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें IOCL के ब्लैकलिस्टिंग ऑर्डर और उसके खिलाफ दायर अपील खारिज करने के फैसले को चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी ने कहा कि कंपनी को शो-कॉज नोटिस के बाद अपना पक्ष रखने के लिए कई मौके दिए गए थे, लेकिन वह तय तारीखों पर पेश नहीं हुई। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि कंपनी को सुनवाई का उचित मौका नहीं मिला।
इसी के साथ हाईकोर्ट ने IOCL के 15 दिसंबर 2025 के ब्लैकलिस्टिंग ऑर्डर और 14 फरवरी 2026 के अपीलीय ऑर्डर में दखल देने से इनकार कर दिया।
मामले में बामनिया ऑटोमोबाइल्स की ओर से अधिवक्ता दिविक माथुर ने पैरवी की, जबकि IOCL की ओर से अधिवक्ता निशांत बोरा और धीरज जांगिड़ पेश हुए।
2 साल के लिए ब्लैकलिस्ट और ₹1 लाख की पेनल्टी लगाई गई
दरअसल बामनिया ऑटोमोबाइल्स ने 12 मार्च 2018 को IOCL के साथ पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की ढुलाई का एग्रीमेंट किया था। इसके तहत कंपनी का RJ-12-GA-3895 नंबर का टैंकर पेट्रोल-डीजल की ट्रांसपोर्टेशन करता था।
5 अगस्त 2025 को IOCL के अधिकारियों ने टैंकर का निरीक्षण किया। इसके अगले दिन 6 अगस्त को FIR दर्ज हुई। इसमें आरोप लगाया गया कि टैंकर से बिना अनुमति ईंधन निकाला गया था।
इसके बाद IOCL ने 30 सितंबर 2025 को शो-कॉज नोटिस जारी कर बामनिया ऑटोमोबाइल्स से जवाब मांगा। बाद में 15 दिसंबर 2025 को टैंकर और उसके क्रू को 2 साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया और ₹1 लाख की पेनल्टी लगाई गई। यह कार्रवाई 5 अगस्त 2025 से लागू मानी गई।
टैंकर और हजारों लीटर पेट्रोल-डीजल की जब्ती भी हुई थी
इसी मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत टैंकर और उसमें मौजूद ईंधन की जब्ती की कार्रवाई भी शुरू हुई थी।
कार्रवाई के दौरान 4,000 लीटर डीजल और 7,277 लीटर पेट्रोल जब्त किया गया था। बामनिया ऑटोमोबाइल्स ने इस कार्रवाई को जिला एवं सत्र न्यायालय, उदयपुर में चुनौती दी थी।
28 नवंबर 2025 को कोर्ट ने बामनिया ऑटोमोबाइल्स की अपील मंजूर कर ली और टैंकर के साथ जब्त पेट्रोल-डीजल की जब्ती का ऑर्डर रद्द कर दिया।
हालांकि, इसके बाद भी IOCL की ओर से टैंकर को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई जारी रही। यही कार्रवाई बाद में राजस्थान हाईकोर्ट के सामने चुनौती दी गई।
कंपनी ने कहा- बीमारी की वजह से समय मांगा था
हाईकोर्ट में कंपनी की ओर से दलील दी गई कि IOCL ने 30 सितंबर 2025 को शो-कॉज नोटिस दिया था। इसके जवाब के लिए कंपनी ने मेडिकल कारणों और चल रही दूसरी कानूनी कार्रवाई का हवाला देते हुए समय बढ़ाने की मांग की थी।
कंपनी का कहना था कि इसके बावजूद उसे पर्याप्त मौका दिए बिना ब्लैकलिस्ट करने का ऑर्डर पास कर दिया गया। इसी आधार पर कंपनी ने हाईकोर्ट से IOCL का 15 दिसंबर 2025 का ऑर्डर रद्द करने की मांग की थी।
IOCL ने कहा- कई मौके दिए, लेकिन पेश नहीं हुए
मामले में IOCL की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया कि याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने के लिए एक नहीं, बल्कि कई मौके दिए गए थे।
IOCL के रिकॉर्ड के मुताबिक, पहले जवाब देने की समय सीमा 15 अक्टूबर 2025 तक थी, जिसे बढ़ाकर 3 नवंबर कर दिया गया। इसके बाद 3 नवंबर को पेश नहीं होने पर 18 नवंबर तक और फिर 2 दिसंबर 2025 तक मौका दिया गया।
लेकिन इन तारीखों पर भी याचिकाकर्ता की ओर से पेश होकर अपना पक्ष नहीं रखा गया। इसके बाद 15 दिसंबर 2025 को टैंकर और उसके चालक दल को दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। साथ ही एक लाख रुपये की पेनल्टी भी लगाई गई।
हाईकोर्ट ने माना- सुनवाई का उचित मौका मिला था
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड में मौजूद ई-मेल देखे और पाया कि IOCL की ओर से कंपनी को बार-बार अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से साफ है कि कि शो-कॉज नोटिस के बाद कंपनी की समय बढ़ाने की मांग पर भी विचार किया गया और कई बार तारीख आगे बढ़ाई गई। इसके बावजूद याचिकाकर्ता इन मौकों पर पेश नहीं हुआ।
हाईकोर्ट ने कहा कि बामनिया ऑटोमोबाइल्स ने इन ई-मेल को चुनौती नहीं दी, जिनके जरिए उसे अपना पक्ष रखने के लिए अलग-अलग तारीखों पर बुलाया गया था। ऐसे में रिकॉर्ड से यह साफ है कि बामनिया ऑटोमोबाइल्स को अपना पक्ष रखने के पर्याप्त मौके दिए गए थे।
ब्लैकलिस्टिंग ऑर्डर में दखल से हाईकोर्ट का इनकार
हाईकोर्ट ने कहा कि बामनिया ऑटोमोबाइल्स यह साबित नहीं कर पाई कि IOCL की कार्रवाई ‘नेचुरल जस्टिस’ के सिद्धांतों के खिलाफ थी या उसे उचित सुनवाई का मौका नहीं मिला।
यानी हाईकोर्ट ने भी माना कि कंपनी को 3 नवंबर, 18 नवंबर और 2 दिसंबर 2025 को अपना पक्ष रखने के मौके दिए गए थे, लेकिन उसने इन मौकों का इस्तेमाल नहीं किया।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने बामनिया ऑटोमोबाइल्स की रिट याचिका खारिज कर दी।