मुंबई। अभिनेता टाइगर श्रॉफ फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस की जांच तेज हो गई है। मुंबई की एस्प्लेनेड कोर्ट ने मामले में गिरफ्तार 3 आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
पुलिस ने आरोपियों को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार कर मुंबई लाने के बाद कोर्ट में पेश किया था।
सुनवाई के दौरान पुलिस ने फायरिंग में इस्तेमाल हथियार बरामद करने, इलेक्ट्रॉनिक सबूत जुटाने और आरोपियों के कथित गैंग कनेक्शन की जांच के लिए 14 दिन की हिरासत मांगी थी।
वहीं, बचाव पक्ष ने 14 दिन की हिरासत की मांग का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ट्रांजिट रिमांड के दौरान पहले ही पुलिस हिरासत में रह चुके हैं।
जिसके बाद एस्प्लेनेड कोर्ट ने आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
कोटा से मुंबई लाकर कोर्ट में पेश किए गए आरोपी
टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाकर हुई फायरिंग के मामले की जांच मुंबई पुलिस की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल कर रही है। जांच के सिलसिले में तीन आरोपियों को बुधवार तड़के करीब 3 बजे राजस्थान के कोटा से मुंबई लाया गया।
इसके बाद उनकी मेडिकल जांच कराई गई और उन्हें एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान आरोपियों की गिरफ्तारी के समय को लेकर भी सवाल उठा।
एक आरोपी ने कोर्ट को बताया कि उसे 19 अक्टूबर की सुबह गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद तीनों आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
पुलिस ने हथियार और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की बरामदगी की दलील दी
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट से 14 दिन की पुलिस हिरासत देने की मांग की। पुलिस का कहना था कि फायरिंग में कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी जरूरी है।
जांच एजेंसी हथियार के स्रोत का पता लगाने के साथ यह भी जानना चाहती है कि घटना को अंजाम देने के पीछे क्या वजह थी।
पुलिस ने मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जुड़े सबूत जुटाने की जरूरत भी बताई। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में सामने आए दावों की पुष्टि करने और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने के लिए आरोपियों से पूछताछ जरूरी है।
‘दूसरे राज्यों में संपर्क और गैंग कनेक्शन की भी जांच जरूरी’
पुलिस ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों के महाराष्ट्र से बाहर कुछ लोगों के साथ कथित संपर्कों की भी पड़ताल करनी है। इसके लिए अलग-अलग जगहों पर जाकर जांच करने की जरूरत पड़ सकती है।
पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि फायरिंग के पीछे किसी गिरोह की भूमिका थी या नहीं और आरोपियों का ऐसे लोगों से किस तरह का संपर्क था।
हालांकि, मामले में हमले की वजह और कथित गैंग कनेक्शन को लेकर जांच जारी है। पुलिस ने इन्हीं पहलुओं को हिरासत की मांग का आधार बनाया।
बचाव पक्ष ने कहा- इलेक्ट्रॉनिक सबूत के लिए हिरासत जरूरी नहीं
आरोपियों की ओर से पेश अधिवक्ता सत्यव्रत जोशी ने पुलिस की 14 दिन की हिरासत की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी ट्रांजिट रिमांड के दौरान पहले ही पुलिस हिरासत में रह चुके हैं।
उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) जैसे इलेक्ट्रॉनिक सबूत संबंधित मोबाइल सेवा प्रदाताओं से सीधे हासिल किए जा सकते हैं। इसके लिए आरोपियों को लंबे समय तक हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है।
आरोपियों ने पूछताछ में सहयोग करने का दावा किया
एक अन्य आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता अजिंक्य मिर्गल मधुकर ने भी पुलिस हिरासत बढ़ाने का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि ट्रांजिट रिमांड का उद्देश्य आरोपियों को राजस्थान से मुंबई लाना था, लेकिन इस दौरान आरोपी रात में भी पुलिस के साथ रहे और उनसे पूछताछ की गई।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपियों ने जांच में सहयोग किया और पुलिस को जानकारी दी, जिससे जांच आगे बढ़ी।
वकीलों ने दलील दी कि हथियार या मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए लंबी हिरासत जरूरी नहीं है और आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जाना चाहिए। वकीलों ने आरोपियों को पुलिस हिरासत के बजाय न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की।
कोर्ट ने 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एस्प्लेनेड कोर्ट ने तीनों आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
कोर्ट ने पुलिस की जांच संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों को अपने मुवक्किलों से कुछ देर मुलाकात कर मामले के संबंध में निर्देश लेने की अनुमति भी दी गई।
अब पुलिस हथियार की बरामदगी, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों और आरोपियों के कथित संपर्कों की जांच आगे बढ़ाएगी।